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असम चुनाव 2026: सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों तरफ से हो रहा दल-बदल; असम चुनाव में कौन से मुद्दे हावी?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: शशिधर पाठक Updated Tue, 24 Mar 2026 08:24 PM IST
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सार

असम में चुनाव से पहले घुसपैठ, डेमोग्राफी और असमिया पहचान बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं, जिन पर भाजपा आक्रामक है, जबकि कांग्रेस सत्ता विरोधी लहर से उम्मीद लगा रही है। राज्य में बड़े पैमाने पर दलबदल जारी है, जिससे राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। पढ़िए रिपोर्ट-

assam assembly election 2026 party switching and analysis of major issues
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

असम में जोरदार घमासान की तैयारी है। घुसपैठ का मुद्दा यहां बड़ा बनता दिख रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा इसे जोरशोर से उठा रहे हैं। वहीं, कांग्रेस को हिमंत के रुख से खुद का फायदा होता दिख रहा है। कहा जा रहा है कि घुसपैठियों को बाहर करने का मुद्दा भाजपा के पक्ष में असम मूल के लोगों को कर सकता है। डेमोग्राफी बदलने के खतरे का मुद्दा भी भाजपा उठा रही है। कांग्रेस को भाजपा के 15 साल के शासन से उपजी सत्ता विरोधी लहर से जीत मिलने की उम्मीद है।
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दलबदल का खेल जारी
राज्य में भाजपा 126 में से 89 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 37 सीट पर सहयोगी दल बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और यूपीपीएल लड़ेंगे। भाजपा ने मौजूदा 19 विधायकों टिकट काट  दिया है। इनमें राज्य मंत्री नंदिता गारलोसा शामिल हैं। टिकट कटने पर गारलोसा कांग्रेस में चली गई हैं। गारलोसा अब हाफलांग सीट से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस के भी कई नेता भाजपा में आ गए हैं। इनमें प्रद्युत बोरदोलोई, भूपेन बोरा, नवज्योति तालुकदार शामिल हैं। 
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कौन से मुद्दे चर्चा में?
पिछले चुनावों में ऊपरी असम में भाजपा काफी मजबूत रही है। निचले असम में कांग्रेस और एआईयूडीएफ से मुकाबला होता है। बराक घाटी में स्थिति थोड़ी भिन्न रहती है। हालांकि, इस बार चुनाव परिसीमन के बाद हो रहा है। इसलिए समीकरण बदल गए हैं। 

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जहां तक बात मुद्दों की है तो असम में बेरोजगारी का मुद्दा काफी बड़ा है। लोगों को रोजगार चाहिए। कांग्रेस इस मुद्दे पर जोर दे रही है। असमिया पहचान और अवैध प्रवासन भी बड़े मुद्दों में शामिल है। बाढ़ और पुनर्वास, एनआरसी को लेकर जनता के बीच में चर्चा है। राज्य में राज्य सरकार का कामकाज, प्रशासन और भ्रष्टाचार भी बड़ा मुद्दा है। असम के चाय बगानों की समस्या, श्रमिकों की समस्या, बाल विवाह, बेदखली, गायक जुबिन की मृत्यु का ममला जैसे मुद्दे भी वोटों का समीकरण बनाएंगे, बिगाड़ेंगे।  


 
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