सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Assam Assembly passes Uniform Civil Code Bill even as opposition demands it be sent to select committee

UCC: असम विधानसभा में पारित हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक, विपक्ष ने की थी चयन समिति के पास भेजने की मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी (असम)। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 27 May 2026 03:18 PM IST
विज्ञापन
सार

UCC: असम विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित कर दिया है। हालांकि, विपक्ष ने इसे पहले चयन समिति को भेजने की मांग की थी। इसके साथ ही असम यूसीसी कानून लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात भी इस कानून को अपना चुके हैं। पढ़िए रिपोर्ट-

Assam Assembly passes Uniform Civil Code Bill even as opposition demands it be sent to select committee
असम विधानसभा - फोटो : एक्स/ओम बिरला
विज्ञापन

विस्तार

असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित कर दिया। यह कानून धर्म से अलग सभी लोगों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिश्तों से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने के लिए लाया गया है। हालांकि, विपक्ष ने मांग की थी कि विधेयक को पहले विस्तृत चर्चा के लिए चयन समिति के पास भेजा जाए।


विधेयक पारित होने के बाद सदन में जोरदार तालियों के साथ इसका स्वागत किया गया। असम सरकार ने सोमवार को यह विधेयक सदन में पेश किया था। इसका मकसद विवाग, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे निजी मामलों में सभी धर्मों के लिए समान कानून लागू करना है। विधेयक में बहुविवाह पर रोक लगाने और लिव-इन रिश्तों का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान भी शामिल है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि, इस कानून को असम में रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों पर लागू नहीं किया जाएगा। विधेयक में कई सख्त दंड का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें द्विविवाह या बहुविवाह के लिए सात साल तक की जेल और लिव-इन संबंध का पंजीकरण नहीं कराने पर तीन महीने तक की सजा शामिल है।
विज्ञापन
Trending Videos


यूसीसी विधेयक पारित करना वाला तीसरा राज्य बना असम
इसके साथ ही असम इस विधेयक को पारित करने वाला तीसरा राज्य बन गया है। इससे पहले उत्तराखंड ने 2024 और गुजरात ने इसी वर्ष मार्च में इस कानून को अपनाया था। उत्तराखंड इस तरह का कानून लाने वाला पहला राज्य था, जो संविधान के राज्य नीति निदेशक सिद्धांतों के अनुरूप है। संविधान का अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करेगा।

इस विधेयक पर मुख्यमंत्री ने पहले क्या कहा था?
इससे पहले मुख्यमंत्री सरमा ने इसको लेकर कहा था कि यह विधेयक असम की सामाजिक संरचना और विशिष्ट जनसांख्यिकीय विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सरमा ने बताया कि इस विधेयक में मुख्य रूप से न्यूनतम आयु, बहुविवाह पर प्रतिबंध, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों के समान अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित मामलों को शामिल हैं। 

एक साल पूरे होने पर धामी ने की थी यूसीसी की सराहना
इस साल जनवरी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में यूसीसी लागू होने का एक वर्ष पूरा होने पर इसकी सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि इस कानून ने महिलाओं को सशक्त बनाया है और उनकी सुरक्षा बढ़ी है। सीएम धामी ने कहा था कि यूसीसी को लेकर लोगों की तमाम शंकाएं और अफवाहें खत्म हो चुकी हैं। पांच लाख से अधिक मामलों में निजता के उल्लंघन का एक भी मामला सामने नहीं आया है। उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, अब ऑनलाइन माध्यम से रिकॉर्ड संख्या में शादियां पंजीकृत हो रही हैं। महज एक साल में 4,74,447 विवाह ऑनलाइन पंजीकृत किए गए हैं। दूसरी ओर, गुजरात विधानसभा ने भी इसी साल मार्च में महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और समानता देने के उद्देश्य से यूसीसी विधेयक पारित किया है।

ये भी पढ़ें: कर्नाटक में सीएम पद पर खींचतान को लेकर भाजपा का तंज, कहा- कांग्रेस ने 'टेंडर सिस्टम' अपनाया

सत्र की शुरुआत से ही इस विधेयक को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सत्ता पक्ष का कहना था कि सरकार ने पहले ही सत्र में यूसीसी लाकर जनता से किया अपना सबसे बड़ा चुनावी वादा निभाया है। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और रायजोर दल जैसी विपक्षी पार्टियों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। विपक्ष ने कानून को लाने के समय और इसके सामाजिक असर को लेकर सदन में विरोध दर्ज कराया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed