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कैसे मानसून को लेकर गलत हो गया मौसम विभाग का पूर्वानुमान: कहां-कैसे हैं गर्मी के हालात, कब तक मिलेगी राहत?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 27 May 2026 04:11 PM IST
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सार
देशभर में मौसम का अलग-अलग मिजाज देखने को मिल रहा है। उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर मध्य भारत तक लोगों को जहां गर्मी और लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दक्षिण और पूर्वी, पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर है। इस बीच मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, जल्द ही पूरे देश का मौसम करवट लेने वाला है। हालांकि, मानसून के फिलहाल एक जून के बाद ही केरल के तट से टकराने के आसार हैं।
भारत में मौसम का हाल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत में अप्रैल से मई के अंतिम हफ्तों तक गर्मी का स्तर जबरदस्त स्तर पर पहुंच चुका है। खासकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में, जहां पारा 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने लगा है। राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक के जिलों में पारा लगातार ऊंचा बना हुआ है। भले ही इस बीच पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में कहीं-कहीं मौसम में बदलाव और मानसून के आने से पहले आने वाली हवाओं-बारिश के चलते तापमान थोड़ा कम हुआ, लेकिन एक मौसम प्रणाली ने भारत के साथ पूरी दुनिया का डर कायम रखा है। इसका नाम है सुपर अल-नीनो।
यह नाम चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि दुनिया में आमतौर पर दो मौसम प्रणालियों की चर्चा हमेशा से रही है। पहली- अल-नीनो और दूसरी ला-नीना की। महासागरों में तापमान पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक इन्हीं दोनों प्रणालियों के आधार पर यह अनुमान लगाते हैं कि आखिर इस बार कौन से देश भीषण गर्मी का सामना करेंगे और कौन से क्षेत्रों में वर्षा और ठंड की स्थिति बेहतर होगी। हालांकि, 2026-27 के लिए जिस मौसमी प्रणाली की चर्चा सबसे ज्यादा है, वह एक संभावित सुपर अल-नीनो की है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि जिस तरह प्रशांत महासागर के अलग-अलग दायरों में गर्मी दर्ज की जा रही है, वह चौंकाने वाली है। यही गर्मी अब हवा के साथ घुलकर कुछ देशों में तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाने वाली है। यह स्थिति एक मजबूत अल-नीनो की स्थिति पैदा कर रही है।
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यह नाम चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि दुनिया में आमतौर पर दो मौसम प्रणालियों की चर्चा हमेशा से रही है। पहली- अल-नीनो और दूसरी ला-नीना की। महासागरों में तापमान पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक इन्हीं दोनों प्रणालियों के आधार पर यह अनुमान लगाते हैं कि आखिर इस बार कौन से देश भीषण गर्मी का सामना करेंगे और कौन से क्षेत्रों में वर्षा और ठंड की स्थिति बेहतर होगी। हालांकि, 2026-27 के लिए जिस मौसमी प्रणाली की चर्चा सबसे ज्यादा है, वह एक संभावित सुपर अल-नीनो की है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि जिस तरह प्रशांत महासागर के अलग-अलग दायरों में गर्मी दर्ज की जा रही है, वह चौंकाने वाली है। यही गर्मी अब हवा के साथ घुलकर कुछ देशों में तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाने वाली है। यह स्थिति एक मजबूत अल-नीनो की स्थिति पैदा कर रही है।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह अल-नीनो क्या है? इसका किसी क्षेत्र में पड़ने वाली गर्मी और सर्दी से क्या संबंध है? सुपर अल-नीनो क्या है, जिसे लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है? इसके चलते दुनिया में किस तरह की स्थिति पैदा हो सकती है? भारत में सुपर अल-नीनो किस तरह का प्रभाव डाल रहा है? आइये जानते हैं...
पहले जानें- क्या है अल-नीनो?
अल-नीनो एक स्पैनिश भाषा का शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ है- लिटिल बॉय यानी छोटा लड़का। यह प्रशांत महासागर में होने वाली एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो हर दो से सात साल में होती है। एक बार अल-नीनो की स्थिति बनने के बाद इसका चक्र आमतौर पर नौ से 12 महीने तक चलता है।अल-नीनो के दौरान क्या होता है?
- अल-नीनो की स्थिति तब रिकॉर्ड होती है, जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के केंद्रीय और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है।
- सामान्य स्थितियों में हवाएं समुद्र के गर्म पानी को पश्चिम की ओर (एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ) धकेलती हैं। पर अल-नीनो के दौरान, ये हवाएं कमजोर हो जाती हैं।
- कई मर्तबा यह हवाएं दिशा उलट कर पश्चिम से पूर्व की ओर बहने लगती हैं। इससे गर्म पानी पूर्व की ओर (दक्षिण अमेरिका की तरफ) इकट्ठा होने लगता है।
इस स्थिति का असर क्या होता है?
महासागर के तापमान और हवाओं की दिशा में होने वाले इस बदलाव का दुनिया भर के मौसम और वायुमंडल से जुड़ी प्रणालियों पर गहरा असर पड़ता है। यह वैश्विक स्तर पर हवाओं के तंत्र और बारिश के पैटर्न को पूरी तरह से बदल देता है। यह बारिश के सामान्य पैटर्न को भी प्रभावित करता है। इससे दुनिया के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ आती है, जबकि अन्य हिस्सों में गंभीर सूखा और अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ता है।1. वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी और हीटवेव
अल-नीनो महासागरों में जमा भारी मात्रा में गर्मी को वापस वायुमंडल में छोड़ता है, जिससे वैश्विक औसत सतह का तापमान काफी बढ़ जाता है। इसकी वजह से दुनिया के कई हिस्सों में जबरदस्त गर्मी और लू (हीटवेव) का खतरा बढ़ जाता है। अगर यह एक सुपर अल-नीनो में बदल जाता है, तो यह वैश्विक गर्मी के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
2. भारी बारिश और बाढ़ का खतरा
आमतौर पर जो बारिश इंडोनेशिया और आसपास के क्षेत्रों में होती है, वह खिसककर मध्य प्रशांत या दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट की ओर चली जाती है। इसका असर यह होता है कि अमेरिका के पश्चिमी तट (जैसे कैलिफोर्निया), दक्षिणी अमेरिका, दक्षिण-पूर्वी दक्षिण अमेरिका, हॉर्न ऑफ अफ्रीका, ईरान, अफगानिस्तान, पश्चिम एशिया और दक्षिण-मध्य एशिया के हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
3. सूखा और जंगल की आग
हवाओं और नमी के खिसकने से उन क्षेत्रों में बारिश काफी कम हो जाती है, जहां आमतौर पर अच्छी बारिश होती है। इसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया में जंगल की आग का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह इंडोनेशिया, उत्तरी दक्षिण अमेरिका (अमेजॉन वर्षावन), मध्य और दक्षिणी अफ्रीका और भारत में गंभीर सूखे की स्थिति पैदा होने का जोखिम बढ़ जाता है।
आमतौर पर जो बारिश इंडोनेशिया और आसपास के क्षेत्रों में होती है, वह खिसककर मध्य प्रशांत या दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट की ओर चली जाती है। इसका असर यह होता है कि अमेरिका के पश्चिमी तट (जैसे कैलिफोर्निया), दक्षिणी अमेरिका, दक्षिण-पूर्वी दक्षिण अमेरिका, हॉर्न ऑफ अफ्रीका, ईरान, अफगानिस्तान, पश्चिम एशिया और दक्षिण-मध्य एशिया के हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
3. सूखा और जंगल की आग
हवाओं और नमी के खिसकने से उन क्षेत्रों में बारिश काफी कम हो जाती है, जहां आमतौर पर अच्छी बारिश होती है। इसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया में जंगल की आग का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह इंडोनेशिया, उत्तरी दक्षिण अमेरिका (अमेजॉन वर्षावन), मध्य और दक्षिणी अफ्रीका और भारत में गंभीर सूखे की स्थिति पैदा होने का जोखिम बढ़ जाता है।
4. तूफान और चक्रवात पर असर
अल-नीनो वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में हवा की गति को बदल देता है। इसकी वजह से अटलांटिक महासागर में उठने वाले तूफान कमजोर पड़ जाते हैं या पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं। लेकिन इसके उलट प्रशांत महासागर (पश्चिमी और मध्य-उत्तरी प्रशांत) में विनाशकारी चक्रवात और शक्तिशाली तूफानों के आने की आशंका बढ़ जाती है।
अल-नीनो वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में हवा की गति को बदल देता है। इसकी वजह से अटलांटिक महासागर में उठने वाले तूफान कमजोर पड़ जाते हैं या पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं। लेकिन इसके उलट प्रशांत महासागर (पश्चिमी और मध्य-उत्तरी प्रशांत) में विनाशकारी चक्रवात और शक्तिशाली तूफानों के आने की आशंका बढ़ जाती है।
अब जानें- भारत पर इस अल-नीनो का क्या असर?
भारत के संदर्भ में बात करें तो, अल-नीनो को अक्सर कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून, कम बारिश और गर्मियों में तापमान बढ़ने (हीटवेव) से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर अल-नीनो साल में भारत में सूखा पड़े, क्योंकि 'इंडियन ओशन डाइपोल' (आईओडी) जैसे अन्य कारक भी इसके प्रभाव को संतुलित कर सकते हैं।
हालांकि, मौजूदा स्थिति की बात करें तो अल-नीनो का असर कुछ हद तक दिखने भी लगा है। जहां 17 मई की अपनी प्रेस रिलीज में मौसम विभाग ने अनुमान जताया था कि मानसून के आगमन के लिए स्थितियां अनुकूल हैं और यह 26 मई तक केरल के तट से टकरा सकता है। वहीं, 26 मई को मौसम विभाग ने साफ किया कि कुछ परिस्थितियों के चलते मानसून अभी बंगाल की खाड़ी के पास अटका है। इसके अगले दो से तीन दिन में अरब सागर के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व, कोमोरिन क्षेत्र, बंगाल की खाड़ी और अंडमान के बचे हुए क्षेत्रों में पहुंचने की उम्मीद है। इन अनुकूल परिस्थितियों के बीच मानसून दो से चार जून के बीच केरल के तट से टकरा जाएगा। बता दें कि मानसून के केरल से टकराने की सामान्य तिथि 1 जून है।
भारत में मौसम के ताजा हालात कैसे?
ताजा हालात की बात की जाए तो भारत में हीटवेव का जबरदस्त दौर देखा जा रहा है। भारत में बुधवार को मौसम के हालात अलग-अलग क्षेत्रों में काफी अलग-अलग हैं। एक तरफ उत्तर और मध्य भारत भीषण गर्मी की चपेट में हैं, तो दूसरी तरफ दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में राहत की बारिश हो रही है।1. उत्तर और मध्य भारत
दिल्ली-एनसीआर: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर में बुधवार को आसमान साफ है और दिन में अधिकतम तापमान 44° सेल्सियस से 46° सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29° सेल्सियस के आसपास दर्ज होने का अनुमान है। भीषण गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग (आईएमडी) ने दिल्ली के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। दिन में 20 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गर्म हवाएं चलने की संभावना है।हालांकि, बुधवार शाम तक दिल्ली के मौसम में बदलाव आ सकता है। शाम को आंशिक रूप से बादल छाने, हल्की बारिश होने और 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ आंधी आने का अनुमान है।
उत्तर भारत के अन्य राज्यों: पंजाब, हरियाणा, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, राजस्थान, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में भीषण लू का प्रकोप जारी है। यहां पारा 45 डिग्री के आसपास बना हुआ है।
पश्चिम भारत: उमस भरी गर्मी और कहीं-कहीं बारिश
- मुंबई में बुधवार को मौसम गर्म और उमस भरा बना रहेगा। यहां अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। हालांकि, शाम या रात के समय आसमान में आंशिक रूप से बादल छाने और हल्की बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ने का भी अनुमान है।
- गुजरात, कोंकण, गोवा और सौराष्ट्र के तटीय इलाकों में भी दिन गर्म और बेहद उमस भरा रहने की भविष्यवाणी की गई है।
दक्षिण भारत: तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट
केरल में अल-नीनो से जुड़ी कुछ घटनाओं की वजह से अब मानसून के आने में कुछ दिन की देरी का अनुमान लगाया गया है और यह 2-4 जून तक केरल से टकरा सकता है। हालांकि, राज्य में पहले से ही बारिश का दौर शुरू हो गया है। बुधवार को केरल के तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और अलाप्पुझा जिलों में भारी बारिश और आंधी के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में भी बारिश, आंधी और तेज हवाएं चलने का अनुमान लगाया गया है है।
पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत: तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना
पूर्वोत्तर राज्य: अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश होने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी है।
पूर्वी भारत: बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और झारखंड में गरज के साथ हल्की से मध्यम और कुछ जगहों पर भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है।
गर्मी झेल रहे इलाकों को कब से राहत मिलने के आसार?
भीषण गर्मी झेल रहे उत्तर और मध्य भारत के इलाकों को मुख्य रूप से 29 मई यानी शुक्रवार से व्यापक राहत मिलने के आसार हैं। पश्चिमी विक्षोभ और हवा में नमी के कारण गर्मी से प्रभावित कई क्षेत्रों में बादल छाने, गरज के साथ छींटे पड़ने और बारिश होने की संभावना है।
दिल्ली और आसपास के इलाकों में यह बदलाव गुरुवार (28 मई) को ही शुरू हो जाएगा और यहां रुक-रुक कर बारिश होने से दिल्ली का तापमान गिरकर 35 डिग्री सेल्सियस से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच आ सकता है, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से काफी कम होगा। सप्ताह के अंत तक शहर के कुछ हिस्सों में बादल छाए रहने और हल्की बारिश होने से राहत का यह दौर जारी रहने की उम्मीद है।
हालांकि, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भीषण लू का प्रकोप जारी रहने की आशंका है। इन सभी राज्यों के कुछ शहरों में तो रात के समय भी गर्मी से तुरंत राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि यहां तापमान में गिरावट के आसार कम ही हैं। कुछ जगहों पर 29 मई से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन यह राहत धीरे-धीरे अलग-अलग इलाकों में पहुंचना शुरू होगी।