{"_id":"6a805202a755c15d5001a1e8","slug":"up-election-2027-bijnor-assembly-seat-history-bjp-sp-bsp-congress-political-equation-2026-08-15","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सीट का समीकरण: कभी कांग्रेस के गढ़ बिजनौर में अब BJP का दबदबा, 1990 के दशक में बसपा तो अब सपा से दे रही चुनौती","category":{"title":"Election","title_hn":"चुनाव","slug":"election"}}
सीट का समीकरण: कभी कांग्रेस के गढ़ बिजनौर में अब BJP का दबदबा, 1990 के दशक में बसपा तो अब सपा से दे रही चुनौती
Wed, 19 Aug 2026 05:29 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 19 Aug 2026 05:29 AM IST
सार
बिजनौर विधानसभा सीट पर लंबे समय तक कांग्रेस का दबदबा रहा, लेकिन बाद में भाजपा, बसपा और जनता दल समेत कई दलों ने यहां जीत दर्ज की। 2022 में भाजपा की शुचि चौधरी ने करीबी मुकाबले में आरएलडी के नीरज चौधरी को हराया था। आइए जानते हैं इस सीट का पूरा चुनावी इतिहास...
विज्ञापन
बिजनौर सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। देश की राजनीति का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके वर्चस्व को खत्म कर देगा। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात बिजनौर जिले की बिजनौर (Bijnor) विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं बिजनौर सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित बिजनौर जिला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें हैं- नजीबाबाद, नगीना, बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर, बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर। शुरुआती विधानसभा चुनावों से ही इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा। 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में बिजनौर सीट से कांग्रेस की चंद्रावती विजयी हुई थीं। 1957 में भी कांग्रेस के टिकट पर चंद्रावती ने ही यहां दोबारा जीत दर्ज की।
2022 विधानसभा चुनाव के नतीजे कैसे रहे?
2022 के विधानसभा चुनाव में बिजनौर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में भाजपा की सुचि चौधरी ने राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के नीरज चौधरी को हराया था। इस चुनाव में भाजपा की सुचि चौधरी को 97,165 वोट मिले थे, जबकि आरएलडी के नीरज चौधरी को 95,720 वोट मिले। जीत का अंतर मात्र 1,445 वोट का रहा। इससे पहले 2017 में भी भाजपा उम्मीदवार सुचि चौधरी ने इस सीट से बड़ी जीत हासिल की थी, तब उन्होंने सपा की रुचि वीरा को बड़े अंतर से हराया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
पहले जानते हैं बिजनौर सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित बिजनौर जिला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें हैं- नजीबाबाद, नगीना, बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर, बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर। शुरुआती विधानसभा चुनावों से ही इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा। 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में बिजनौर सीट से कांग्रेस की चंद्रावती विजयी हुई थीं। 1957 में भी कांग्रेस के टिकट पर चंद्रावती ने ही यहां दोबारा जीत दर्ज की।
विज्ञापन
2022 विधानसभा चुनाव के नतीजे कैसे रहे?
2022 के विधानसभा चुनाव में बिजनौर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में भाजपा की सुचि चौधरी ने राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के नीरज चौधरी को हराया था। इस चुनाव में भाजपा की सुचि चौधरी को 97,165 वोट मिले थे, जबकि आरएलडी के नीरज चौधरी को 95,720 वोट मिले। जीत का अंतर मात्र 1,445 वोट का रहा। इससे पहले 2017 में भी भाजपा उम्मीदवार सुचि चौधरी ने इस सीट से बड़ी जीत हासिल की थी, तब उन्होंने सपा की रुचि वीरा को बड़े अंतर से हराया था।
विज्ञापन
बिजनौर सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
बिजनौर विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन सीटों में शामिल है जहां जातीय और सामाजिक समीकरण चुनाव परिणामों को गहराई से प्रभावित करते हैं। यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा जाट, दलित, ठाकुर, गुर्जर, वैश्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाता चुनावी गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार मुस्लिम मतदाता इस सीट पर एक बड़ा चुनावी फैक्टर रहे हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में जाट, गुर्जर और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं का प्रभाव भी नतीजों को तय करता है।
बिजनौर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
बिजनौर विधानसभा सीट के शुरुआती इतिहास की बात करें तो यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दबदबा रहा। 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार चंद्रावती ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 1957 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की चंद्रावती ही दोबारा विधायक चुनी गईं।
कांग्रेस ने इस दबदबे को आगे भी बरकरार रखा। 1962 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कुंवर सत्यवीर ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1967 के चुनाव में भी कांग्रेस ने अपनी बढ़त बनाए रखी और उसके उम्मीदवार कुंवर सत्यवीर ने दोबारा जीत हासिल करके बिजनौर सीट पर परचम लहराया।
बिजनौर विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन सीटों में शामिल है जहां जातीय और सामाजिक समीकरण चुनाव परिणामों को गहराई से प्रभावित करते हैं। यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा जाट, दलित, ठाकुर, गुर्जर, वैश्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाता चुनावी गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार मुस्लिम मतदाता इस सीट पर एक बड़ा चुनावी फैक्टर रहे हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में जाट, गुर्जर और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं का प्रभाव भी नतीजों को तय करता है।
बिजनौर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
बिजनौर विधानसभा सीट के शुरुआती इतिहास की बात करें तो यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दबदबा रहा। 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार चंद्रावती ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 1957 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की चंद्रावती ही दोबारा विधायक चुनी गईं।
कांग्रेस ने इस दबदबे को आगे भी बरकरार रखा। 1962 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कुंवर सत्यवीर ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1967 के चुनाव में भी कांग्रेस ने अपनी बढ़त बनाए रखी और उसके उम्मीदवार कुंवर सत्यवीर ने दोबारा जीत हासिल करके बिजनौर सीट पर परचम लहराया।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1969 में हुई भारतीय क्रांति दल की एंट्री
1969 के चुनाव में बिजनौर सीट पर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला। यहां भारतीय क्रांति दल (BKD) के रामपाल सिंह ने जीत दर्ज कर कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती दी। इन चुनावों में बीकेडी के रामपाल सिंह को 28,759 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के कुंवर सत्यवीर को 20,346 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।
1974 का चुनाव
1974 में कांग्रेस के अजीजुर रहमान ने बिजनौर सीट पर फिर से कांग्रेस की वापसी कराई। इन चुनावों में कांग्रेस के अजीजुर रहमान ने इंडियन नेशनल कांग्रेस (ऑर्गनाइजेशन यानी NCO) के कुंवर सत्यवीर को 10,673 वोटों से हराया।
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला।
1969 के चुनाव में बिजनौर सीट पर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला। यहां भारतीय क्रांति दल (BKD) के रामपाल सिंह ने जीत दर्ज कर कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती दी। इन चुनावों में बीकेडी के रामपाल सिंह को 28,759 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के कुंवर सत्यवीर को 20,346 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।
1974 का चुनाव
1974 में कांग्रेस के अजीजुर रहमान ने बिजनौर सीट पर फिर से कांग्रेस की वापसी कराई। इन चुनावों में कांग्रेस के अजीजुर रहमान ने इंडियन नेशनल कांग्रेस (ऑर्गनाइजेशन यानी NCO) के कुंवर सत्यवीर को 10,673 वोटों से हराया।
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1977 का चुनाव
1977 के चुनाव में बिजनौर सीट पर जनता पार्टी (जेएनपी) ने जीत हासिल की और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इन चुनावों में जनता पार्टी के कुंवर सत्यवीर ने कांग्रेस के केशो शरण शर्मा को 20,633 वोटों से हराया। चुनाव में कुंवर सत्यवीर को 39,939 वोट मिले, वहीं केशो शरण शर्मा को 19,306 वोट मिले थे।
1980 और 1989 का चुनाव
1980 के चुनाव में बिजनौर सीट से कांग्रेस (आई) के अजीजुर रहमान विजयी हुए। वहीं 1985 में भी यह सीट कांग्रेस के पास ही रही, जिस पर कांग्रेस की तरफ से लड़ते हुए अजीजुर रहमान दोबारा विजयी हुए।
1989 के विधानसभा चुनाव में जनता दल के सुखवीर सिंह ने बिजनौर सीट से जीत दर्ज की। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राजा गजनफर को महज 556 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया। इस चुनाव में कांग्रेस के अजीजुर रहमान तीसरे नंबर पर रहे।
1990 के दशक का सियासी समीकरण
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में बिजनौर विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
साल 1991 और 1993 में इस सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। 1991 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी महेंद्र पाल सिंह ने 15,660 वोटों से जीत दर्ज की। उन्हें 67,009 वोट मिले और उन्होंने बसपा के राजा गजनफर को हराया, जिन्हें 51,349 वोट मिले थे। वहीं 1993 के चुनाव में महेंद्र पाल सिंह ने 11,608 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की; उन्हें 52,338 वोट मिले थे, जबकि जनता दल के सुखवीर सिंह 40,730 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे।
1996 के चुनाव में बिजनौर सीट से बसपा के राजा गजनफर ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के तेजपाल को 26,007 वोटों के अंतर से हराया।
1977 के चुनाव में बिजनौर सीट पर जनता पार्टी (जेएनपी) ने जीत हासिल की और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इन चुनावों में जनता पार्टी के कुंवर सत्यवीर ने कांग्रेस के केशो शरण शर्मा को 20,633 वोटों से हराया। चुनाव में कुंवर सत्यवीर को 39,939 वोट मिले, वहीं केशो शरण शर्मा को 19,306 वोट मिले थे।
1980 और 1989 का चुनाव
1980 के चुनाव में बिजनौर सीट से कांग्रेस (आई) के अजीजुर रहमान विजयी हुए। वहीं 1985 में भी यह सीट कांग्रेस के पास ही रही, जिस पर कांग्रेस की तरफ से लड़ते हुए अजीजुर रहमान दोबारा विजयी हुए।
1989 के विधानसभा चुनाव में जनता दल के सुखवीर सिंह ने बिजनौर सीट से जीत दर्ज की। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राजा गजनफर को महज 556 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया। इस चुनाव में कांग्रेस के अजीजुर रहमान तीसरे नंबर पर रहे।
1990 के दशक का सियासी समीकरण
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में बिजनौर विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
साल 1991 और 1993 में इस सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। 1991 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी महेंद्र पाल सिंह ने 15,660 वोटों से जीत दर्ज की। उन्हें 67,009 वोट मिले और उन्होंने बसपा के राजा गजनफर को हराया, जिन्हें 51,349 वोट मिले थे। वहीं 1993 के चुनाव में महेंद्र पाल सिंह ने 11,608 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की; उन्हें 52,338 वोट मिले थे, जबकि जनता दल के सुखवीर सिंह 40,730 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे।
1996 के चुनाव में बिजनौर सीट से बसपा के राजा गजनफर ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के तेजपाल को 26,007 वोटों के अंतर से हराया।
2002 में भाजपा की वापसी
2002 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कुंवर भारतेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने सपा के उम्मीदवार तसलीम को 16,339 वोटों से हराया और भाजपा ने इस सीट पर मजबूत पकड़ बनाई।
2007 के चुनाव
2007 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के शाहनवाज ने बिजनौर सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के कुंवर भारतेंद्र सिंह को बेहद करीबी मुकाबले में महज 557 वोटों से हराया। इस चुनाव में बसपा के शाहनवाज को 61,588 वोट मिले, जबकि 61,031 वोटों के साथ भाजपा दूसरे नंबर पर रही। वहीं सपा के शाहिद अली 21,825 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
2012 का चुनाव
2012 के विधानसभा चुनाव में बिजनौर सीट पर फिर से भाजपा के कुंवर भारतेंद्र सिंह ने जीत हासिल की। उन्होंने बसपा के उम्मीदवार महबूब को 17,836 वोटों से हराकर सीट पर फिर से कब्जा जमाया। इसके बाद इस सीट पर 2014 के यूपी विधानसभा उपचुनाव हुए। इस चुनाव में बिजनौर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की रुचि वीरा विजयी हुईं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हेमेंद्र पाल को 11,567 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रुचि वीरा को 1,01,748 वोट, जबकि हेमेंद्र पाल को 90,181 वोट मिले।
2017 का चुनाव
वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो इन चुनावों में भाजपा की शुचि चौधरी ने शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 1,05,548 वोट मिले, जबकि सपा उम्मीदवार रुचि वीरा को 78,267 वोट मिले थे। भाजपा ने यह चुनाव 27,281 वोटों के अंतर से जीता था।
2002 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कुंवर भारतेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने सपा के उम्मीदवार तसलीम को 16,339 वोटों से हराया और भाजपा ने इस सीट पर मजबूत पकड़ बनाई।
2007 के चुनाव
2007 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के शाहनवाज ने बिजनौर सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के कुंवर भारतेंद्र सिंह को बेहद करीबी मुकाबले में महज 557 वोटों से हराया। इस चुनाव में बसपा के शाहनवाज को 61,588 वोट मिले, जबकि 61,031 वोटों के साथ भाजपा दूसरे नंबर पर रही। वहीं सपा के शाहिद अली 21,825 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
2012 का चुनाव
2012 के विधानसभा चुनाव में बिजनौर सीट पर फिर से भाजपा के कुंवर भारतेंद्र सिंह ने जीत हासिल की। उन्होंने बसपा के उम्मीदवार महबूब को 17,836 वोटों से हराकर सीट पर फिर से कब्जा जमाया। इसके बाद इस सीट पर 2014 के यूपी विधानसभा उपचुनाव हुए। इस चुनाव में बिजनौर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की रुचि वीरा विजयी हुईं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हेमेंद्र पाल को 11,567 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रुचि वीरा को 1,01,748 वोट, जबकि हेमेंद्र पाल को 90,181 वोट मिले।
2017 का चुनाव
वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो इन चुनावों में भाजपा की शुचि चौधरी ने शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 1,05,548 वोट मिले, जबकि सपा उम्मीदवार रुचि वीरा को 78,267 वोट मिले थे। भाजपा ने यह चुनाव 27,281 वोटों के अंतर से जीता था।