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भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम: बंगाल की जीत से भाटिया का कद बढ़ा, हरियाणा की जीत ने पूनिया को पहुंचाया दिल्ली

Tue, 18 Aug 2026 01:14 PM IST
Sharukh Khan आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 18 Aug 2026 01:14 PM IST
सार

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में हरियाणा से जुड़े चेहरों को जगह मिलने के पीछे सिर्फ संगठनात्मक समीकरण नहीं, बल्कि चुनावी प्रदर्शन की कहानी भी दिखाई देती है। संजय भाटिया और सतीश पूनिया, दोनों ने अलग-अलग राज्यों में चुनावी मोर्चे पर पार्टी के लिए काम किया और परिणाम दिए। यही चुनावी अनुभव अब राष्ट्रीय संगठन में उनके काम आ रहा है।

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Sanjay Bhatia stature rose with victory in Bengal while win in Haryana propelled Satish Poonia to Delhi
सतीश पूनिया और संजय भाटिया को बड़ी जिम्मेदारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में हरियाणा से जुड़े संजय भाटिया को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिलना संगठनात्मक फेरबदल नहीं है। महज इसके पीछे चुनाव मैदान में उनकी भूमिका और संगठन को परिणाम तक पहुंचाने की क्षमता भी दिखाई देती है। 
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हरियाणा भाजपा के प्रभारी रहे सतीश पूनिया को भी राज्य में पार्टी की लगातार चुनावी सफलता के बाद राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका मिली। जून में उन्हें राजस्थान से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया। इस तरह दोनों नेताओं को मियामी यात्रा का एक साझा सूत्र है चुनावी प्रबंधन, संगठन और परिणाम।
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मनोहर के लिए सीट छोड़ी, विधानसभा चुनाव में रहे पर्दे के पीछे
2019 में करनाल लोकसभा सीट से बड़ी जीत के बाद संजय भाटिया का राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने मनोहर लाल को प्रदेश से हटाकर केंद्रीय राजनीति में लाने का फैसला। संजय भाटिया ने मनोहर लाल के लिए करनाल लोकसभा सीट से अपनी दावेदारी हटा ली।

विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरने के बजाय संजय ने पर्दे के पीछे रह कर पूरा चुनाव प्रबंधन संभाला और पार्टी को तीसरी बार सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद अप्रैल 2026 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया और अब राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने उनके संगठनात्मक कद को और स्पष्ट कर दिया है।

 

बंगाल में भाटिया ने संभाला मोर्चा
संजय भाटिया को भाजपा में लंबे समय से संगठन और चुनावी प्रबंधन के माहिर नेताओं में गिना जाता है। परिश्म बंगाल समेत कई राज्यों में उन्हें चुनावी जिम्मेदारियां दी गई। पश्चिम बंगाल में उन्होंने हुगली जिले, आरामबाग और श्रीरामपुर क्षेत्र के साथ हावड़ा शहर में संगठनात्मक काम संभाला।

 
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चुनाव से काफी पहले मैदान में उतरकर उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने पर जोर दिया। भाजपा की चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाना, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय और बूथ स्तर पर लक्ष्य तय करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा। पार्टी के भीतर उनकी पहचान ऐसे नेता की बनी जो खुद सुर्खियों में रहने के बजाय संगठन को आगे रखकर काम करते हैं। 

हरियाणा में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों और चुनामी कार्यक्रमों के प्रबंधन में भाटिया की भूमिका रही है। यही संगठनात्मक पृष्ठभूमि अब उन्हें राष्ट्रीय टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद और बड़ा मंच दे रही है। 17 अगस्त को घोषित नई टीम में उन्हें आठ राष्ट्रीय महासचिवों में शामिल किया गया है।

हरियाणा में पूनिया ने दिया परिणाम
सतीश पूनिया की कहानी भी चुनावी प्रदर्शन से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने की है। जुलाई 2024 में उन्हें हरियाणा भाजपा का प्रभारी बनाया गया था। उस समय कांग्रेस को राज्य में मजबूत चुनौती माना जा रहा था। पूनिया ने संगठन को सक्रिय करने, कमजो मानी जा रही सीटों पर फोकस बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति के अनुरूप जुटाने पर जोर दिया। 

 

अक्तूबर 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 में से 48 सीट जीतकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। इस प्रदर्शन में पूनिया की संगठनात्मक भूमिका को पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण माना गया। इसके बाद जून 2026 में भाजपा ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजा। पार्टी के इस फैसले को हरियाणा में उनके संगठनात्मक प्रदर्शन और राजस्थान में उनके राजनीतिक अनुभव दोनों के मेल के तौर पर देखा गया।

 

हरियाणा के बाद अब पंजाब की जिम्मेदारी
पूनिया की भूमिका हरियाणा तक सीमित नहीं रही। जून 2026 में उन्हें पंजाब भाजपा के संगठनात्मक पुनर्गठन की जिम्मेदारी सौंपे जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इससे साफ है कि पार्टी उन्हें केवल किसी एक राज्य के प्रभारी के तौर पर नहीं, बल्कि चुनावी और संगठनात्मक रणनीति तैधार करने वाले नेता के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

 

धनखड़ की गैरमौजूदगी भी चर्चा में
नई राष्ट्रीय टीम में पूर्व हरियाणा भाजपा अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ को राष्ट्रीय पदाधिकारी के तौर पर जगह नहीं मिली है। हालांकि उन्हें पूरी तरह संगठन से बाहर मानना जल्दबाजी होगी। जून 2026 में हरियाणा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद के बदलाव के दौरान धनखड़ राष्ट्रीय सचिव के तौर पर पार्टी के कार्यक्रम में मौजूद थे। नई टीम में पार्टी ने अनुभव के साथ नए चेहरों को भी जगह दी है। ऐसे में धनखड़ के लिए आगे किसी अन्य संगठनात्मक जिम्मेदारी की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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