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'बहुविवाह-सरकारी नौकरी साथ नहीं चल सकते': असम सीएम की चेतावनी, कहा- बहन-बेटियों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे
Sun, 19 Jul 2026 10:35 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 19 Jul 2026 10:35 AM IST
सार
हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर बहुविवाह को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बहुविवाह जैसा अपराध और सरकारी नौकरी साथ-साथ नहीं चल सकते। वे अपनी बहन-बेटियों पर किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने देंगे।
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सीएम हिमंत बिस्व सरमा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने एक से ज्यादा शादी (बहुविवाह) के खिलाफ राज्य सरकार का सख्त रुख दोहराया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर लिखा कि बहुविवाह जैसा अपराध और सरकारी नौकरी दोनों एक साथ नहीं चल सकते। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसी प्रथाओं में शामिल लोगों को सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी। सरकार इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए पूरी तरह गंभीर है।
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मुख्यमंत्री ने महिलाओं के अधिकारों और उनके सम्मान की रक्षा के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी बहनों और बेटियों के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे अन्याय करने वाला व्यक्ति कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सीएम सरमा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम सरकार ने बहुविवाह के खिलाफ अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। सरकार अब बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने की तैयारी में है। इसके लिए असम सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1964 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। वित्त मंत्री जयंत मल्लबरुआ ने बजट भाषण में इसकी घोषणा थी। सरकार का कहना है कि यह फैसला महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और जवाबदेह पारिवारिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: नौकरी जाएगी, सरकारी योजनाएं भी बंद: बहुविवाह करने वाले अधिकारियों की खैर नहीं, क्या है असम सरकार की तैयारी?
हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, बहुविवाह करने वाले पुरुषों को राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इसके साथ ही आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों को भी कई सरकारी योजनाओं से बाहर रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और कानून के पालन को बढ़ावा मिलेगा।
असम विधानसभा ने मई 2026 में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित किया था। इस कानून का उद्देश्य बहुविवाह और बाल विवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगाना तथा विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए सभी नागरिकों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
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बहुविवाह जैसा अपराध और सरकारी नौकरी साथ-साथ नहीं चल सकते। हमारी बहन-बेटियों पर कोई अन्याय नहीं होने देंगे, चाहे वह कोई भी हो।
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#UCCAssam pic.twitter.com/eGkYFjSmbN— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) July 18, 2026
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मुख्यमंत्री ने महिलाओं के अधिकारों और उनके सम्मान की रक्षा के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी बहनों और बेटियों के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे अन्याय करने वाला व्यक्ति कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सीएम सरमा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम सरकार ने बहुविवाह के खिलाफ अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। सरकार अब बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने की तैयारी में है। इसके लिए असम सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1964 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। वित्त मंत्री जयंत मल्लबरुआ ने बजट भाषण में इसकी घोषणा थी। सरकार का कहना है कि यह फैसला महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और जवाबदेह पारिवारिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: नौकरी जाएगी, सरकारी योजनाएं भी बंद: बहुविवाह करने वाले अधिकारियों की खैर नहीं, क्या है असम सरकार की तैयारी?
हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, बहुविवाह करने वाले पुरुषों को राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इसके साथ ही आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों को भी कई सरकारी योजनाओं से बाहर रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और कानून के पालन को बढ़ावा मिलेगा।
असम विधानसभा ने मई 2026 में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित किया था। इस कानून का उद्देश्य बहुविवाह और बाल विवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगाना तथा विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए सभी नागरिकों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।