Nagaland Rain Havoc: नगालैंड में भारी बारिश से कई जगह भूस्खलन, आठ लोगों की मौत, 12 घायल
नागालैंड के मोन जिले में रविवार को लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं हुईं। इन हादसों में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 अन्य घायल हुए हैं। मोन जिले के उपायुक्त ने एएनआई को बताया कि अब तक चार शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि चार लोग अब भी मलबे में दबे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नगालैंड के मोन जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच रविवार सुबह हुए भीषण भूस्खलन में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका है। डिफेंस कॉलोनी क्षेत्र में हुए इस हादसे में 10 से 15 मकान, जिनमें 13 घर पूरी तरह प्रभावित बताए जा रहे हैं, मलबे में दब गए। प्रशासन के अनुसार राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन लगातार बारिश, अस्थिर पहाड़ी ढलानों और तेज बहाव के कारण अभियान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को तत्काल अनुग्रह राशि और प्रभावित परिवारों को राहत सहायता देने की घोषणा की है।
यह भी पढ़ें- Supreme Court: 'अभद्र भाषा का इस्तेमाल मात्र अश्लीलता नहीं', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला; जानें और क्या कहा
अब तक चार शव निकाले गए
मोन के उपायुक्त वेन्येई कोन्याक ने कहा कि अब तक 4 शव बरामद किए गए हैं और चार अन्य लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हैं। उन्होंने बताया कि कई लोगों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका है और उनकी तलाश जारी है। उन्होंने कहा, सबसे अधिक प्रभावित इलाके मोन टाउन और तिजित हैं। भारी बारिश रात करीब 1 बजे शुरू हुई और हमें सुबह करीब 6-7 बजे भूस्खलन की घटनाओं की जानकारी मिली। SDRF, पुलिस, असम राइफल्स, NDRF की टीमें और स्थानीय लोग खोज और बचाव अभियान में लगे हुए हैं। अब तक हमने मलबे से चार शव बरामद किए हैं, जिनमें तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। 12 अन्य लोग घायल हुए हैं। कई जगहों पर खोज और बचाव अभियान चल रहा है।
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार असम राइफल्स, एनडीआरएफ, नागालैंड पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), जिला प्रशासन तथा स्थानीय स्वयंसेवक संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रहे हैं। भारी वर्षा के कारण मोन शहर के अन्य हिस्सों में भी भूस्खलन और जलभराव की घटनाएं सामने आई हैं। नदी किनारे तेज कटाव से कई अन्य मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
यह भी पढ़ें- 'दांतों को हथियार नहीं माना जा सकता': मुंबई की अदालत ने सुनाया अहम फैसला, आरोपी को बरी किया
पीड़ितों को मुआवजा देगी सरकार
मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को तत्काल अनुग्रह राशि और प्रभावित परिवारों को राहत सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और सभी संबंधित एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। प्रशासन ने भारतीय मौसम विभाग द्वारा अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनजर लोगों से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी किनारों और असुरक्षित ढलानों से दूर रहने की अपील की है।
उत्तर और पूर्वी भारत में मानसून का कहर
देश के उत्तर और पूर्वी राज्यों में मानसून का असर लगातार बना हुआ है। भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के कारण रविवार को अलग-अलग राज्यों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगले छह-सात दिनों तक उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश की संभावना जताई है। सबसे ज्यादा नुकसान जम्मू-कश्मीर में हुआ, जहां पुंछ और राजौरी जिलों में भारी बारिश के बाद भूस्खलन और फ्लैश फ्लड से 11 लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। प्रशासन और एनडीआरएफ समेत कई एजेंसियां राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। खराब मौसम को देखते हुए अमरनाथ यात्रा को पहलगाम और बालटाल मार्ग से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
उत्तराखंड के हरिद्वार में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। लगातार बारिश के कारण राज्य में 84 सड़कें, जिनमें दो राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं, बंद हो गई हैं। कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, नागालैंड के कोहिमा में फ्लैश फ्लड से तीन लोगों की मौत हो गई। कई मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और सड़कें बंद हो गई हैं।पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों में भी अगले दो दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और निचले क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका जताई है। साथ ही तीस्ता, तोर्सा, जलढाका और रायडक जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ने की चेतावनी भी दी गई है।