विधानसभा चुनाव परिणाम 2019: सिक्किम में टूटा 25 साल का रिकॉर्ड, चामलिंग की पार्टी हारी
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सिक्किम में लंबे समय से ही क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा रहा है। इस बार भी यहां यही नजारा दिखा। लेकिन हैरानी की बात ये रही कि 25 साल से सत्ता में काबिज पवन कुमार चामलिंग की सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट पार्टी (एसडीएफ) को हार नसीब हुई। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने जीत हासिल की है।
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सिक्किम में लंबे समय से ही क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा रहा है। इस बार भी यहां यही नजारा दिखा। लेकिन हैरानी की बात ये रही कि 25 साल से सत्ता में काबिज पवन कुमार चामलिंग की सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट पार्टी (एसडीएफ) को हार नसीब हुई। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने जीत हासिल की है।
चामलिंग की एसडीएफ पार्टी ने 32 में से 15 सीट हासिल की हैं। जबकि 2013 में अस्तित्व में आए एसकेएम ने 17 सीटें हासिल की हैं। बहुमत के लिए भी 17 सीटें ही चाहिए। यहां राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है। साल 1994 से एसडीएफ के नेता पवन कुमार चामलिंग राज्य के मुख्यमंत्री थे।
चामलिंग पांच बार मुख्यमंत्री रहे हैं। उनकी पार्टी की हार से राज्य में 25 साल का दौर खत्म हो गया है। लेकिन चामलिंग ने जिन दो सीटों पर चुनाव लड़ा वहां उन्होंने जीत हासिल की है। पवन कुमार चामलिंग ने विधानसभा की दोनों सीटों पर जीत हासिल कर ली है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चामलिंग ने नामची सिंह थांग और पकलोक विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा था।
उन्होंने नामची सिंह थांग सीट से 377 मतों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं पकलोल से उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के खड़क बहादुर राय को 2,899 वोट से परास्त कर दिया।
2014 में क्या थी स्थिति?
2014 में हुए विधानसभा चुनावों में एसडीएफ को 22 सीटें मिली थीं। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) को 10 सीटें मिली थीं। इससे पहले 2009 में हुए चुनावों में चामलिंग की पार्टी को पूरी 32 सीटें मिली थीं। वहीं राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति यहां बिल्कुल मजबूत नहीं है।