Congress: 'जातिगत जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है सरकार', जयराम रमेश ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार पर जाति जनगणना टालने और महिला आरक्षण कानून में बदलाव कर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता ने कहा कि अनुच्छेद 334-A में संशोधन की योजना से जाति जनगणना के नतीजे जानबूझकर देर से लाने की कोशिश हो रही है, जबकि कुछ राज्यों ने यह काम कुछ ही महीनों में पूरा किया है।
विस्तार
कांग्रेस ने रविवार को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का कहना है कि सरकार जाति जनगणना को जानबूझकर टालना चाहती है और महिलाओं के आरक्षण कानून में बदलाव करके देश को गुमराह कर रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि सरकार का इरादा जाति जनगणना को 'ठंडे बस्ते' में डालने का है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर भारी भ्रम फैला रहे हैं।
जयराम रमेश के मुताबिक, सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन करना चाहती है। इस आर्टिकल में यह प्रावधान है कि महिलाओं को संसद और विधानसभा में आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा।कांग्रेस का कहना है कि सरकार अब यह कह रही है कि जाति जनगणना के नतीजे आने में कई साल लगेंगे, जबकि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने 6 महीने के अंदर ही जाति सर्वे पूरा कर लिया था।
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पहले क्या कह चुकी है सरकार?
इस दौरान कांग्रेस नेता ने सरकार के पुराने बयानों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2021 में संसद में सरकार ने कहा था कि वह SC/ST के अलावा अन्य जातियों की गणना नहीं करेगी। उसी साल सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार ने हलफनामा देकर यही बात दोहराई। रमेश ने आगे कहा कि 2024 में एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने जाति जनगणना की मांग करने वालों की आलोचना की, लेकिन बाद में 2025 में सरकार ने अचानक घोषणा कर दी कि अगली जनगणना में जाति जनगणना भी होगी। ।
अब समझिए नया विवाद क्यों?
मामले में कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अब कानून में बदलाव करके जाति जनगणना के नतीजों को और देर से लाना चाहती है। इसका असली मकसद जाति जनगणना को लागू ही न करना है। जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री देश को गुमराह कर रहे हैं और यह बड़ा धोखा है।
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महिलाओं के आरक्षण पर भी विवाद
गौरतलब है कि सरकार जल्द ही महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है। इसके तहत लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। लेकिन दूसरी ओर मामले में कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया ठीक नहीं है। इससे भविष्य में गंभीर राजनीतिक असर पड़ सकता है।
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