Bengal Election Results: बंगाल के इन तीन क्षेत्रों से तय होती है सरकार, अबकी किसके हाथ लगेगी सत्ता की चाभी?
पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति को अगर देखना-समझना हो तो इसे भौगोलिक स्तर पर बांटा जाना जरूरी है। दरअसल, बंगाल में अलग क्षेत्रों में 2021 के चुनावों में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस ने जलवा दिखाया है। अब 2026 के चुनाव में दोनों ही दल इन क्षेत्रों में फिर दबदबे की लड़ाई लड़ रहे हैं। 4 मई को मतगणना में यह साफ हो जाएगा कि किस पार्टी का किस क्षेत्र में कितना दबदबा रहा।
विस्तार
अमर उजाला आपको इसी आसान ढांचे में समझा रहा है कि 2021 में इन तीनों हिस्सों में किसका कितना दबदबा रहा। साथ ही 2016 की भी एक झलक देखेंगे, जब भाजपा महज तीन सीटों पर सिमटी थी और फिर एकाएक 2021 में 77 सीटों तक पहुंच गई। इसके अलावा यह भी समझेंगे कि कैसे दशकों तक प्रभाव में रही वाम राजनीति धीरे-धीरे बंगाल से लगभग गायब हो गई। साथ ही समझेंगे 2026 में कहां है असली खेला। कौन सा हिस्सा इस बार भी बना हुआ है गेम चेंजकर और किस हिस्से में छुपी है सत्ता की चाभी।
बंगाल के तीनों हिस्सों में 2021 में क्या रहे थे नतीजे?
1. उत्तर बंगाल
54 सीटों वाले इस क्षेत्र में एनडीए को ने 2021 में 30 सीटें जीतकर बढ़त बनाई, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को 24 सीटें मिलीं। कूचबिहार, अलीपुरद्वार और दार्जिलिंग में भाजपा गठबंधन मजबूत रहा, जबकि मालदा और उत्तर दिनाजपुर में तृणमूल ने कुछ संतुलन बनाए रखा।
दक्षिण और मध्य बंगाल 2021 में तृणमूल का किला साबित हुआ था। 183 सीटों वाले सबसे बड़े क्षेत्र में टीएमसी ने 2021 में 153 सीटें जीतकर दबदबा कायम रखा। एनडीए को 29 सीटें मिलीं, जबकि अन्य को एक सीट पर जीत मिली। कोलकाता, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना जैसे इलाकों में तृणमूल का लगभग क्लीन स्वीप रहा, यही क्षेत्र सत्ता की कुंजी साबित हुआ।
3. राढ़ बंगाल
राढ़ बंगाल की 57 सीटों पर मुकाबला कड़ा रहा। यहां तृणमूल कांग्रेस ने 39 सीटों के साथ बढ़त बनाए रखी, जबकि एनडीए ने 18 सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति मजबूत की। पुरुलिया और बांकुड़ा जैसे जिलों में भाजपा आगे रही, जबकि बीरभूम और बर्धमान में तृणमूल का प्रभाव कायम रहा। अगर पूरे राज्य की तस्वीर देखें तो 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि एनडीए 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बना। इस चुनाव में कांग्रेस और वाम दलों का सफाया हो गया।
2016 में क्या थी इन तीनों क्षेत्रों की स्थिति?
2016 के चुनाव पर नजर डालें तो तस्वीर पूरी तरह अलग थी। उस समय तृणमूल कांग्रेस ने 211 सीटें जीतकर मजबूत बहुमत हासिल किया था। कांग्रेस को 44 सीटें और वाम दलों को 33 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा सिर्फ 3 सीटों तक सीमित रही थी। यानी 2016 में जहां मुकाबला तृणमूल बनाम कांग्रेस-वाम के बीच था, वहीं 2021 तक आते-आते भाजपा ने जबरदस्त उछाल लेते हुए खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित कर लिया और राज्य की राजनीति पूरी तरह दोध्रुवीय हो गई।2026 में कहां है असली लड़ाई
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता के लिए तीनों क्षेत्रों में दबदबा कायम रखना होगा। हालांकि दक्षिण बंगाल अभी भी गेमचेंजर बना हुआ है। 183 सीटों वाले इस इलाके में अगर टीएमसी अपनी पकड़ बनाए रखती है, तो सत्ता की राह आसान हो जाती है। अगर भाजपा यहां सेंध लगाने में सफल होती है, तो पूरा समीकरण बदल सकता है।दूसरी ओर, उत्तर बंगाल को भाजपा का मजबूत आधार माना जा रहा है। 2021 में मिली बढ़त के बाद पार्टी की कोशिश इस इलाके में अपनी बढ़त बरकरार रखने और उसे और मजबूत करने की है। अगर यहां बढ़त कायम रहती है, तो भाजपा को बड़ी बढ़त मिल सकती है।
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