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Bengal Politics: 'जनता से डरकर मांग रहे केंद्रीय सुरक्षा', TMC के निष्कासित विधायक ने अभिषेक बनर्जी बोला हमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 02 Jun 2026 05:21 PM IST
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सार
Ritabrata Banerjee Statement: टीएमसी से निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि सोनारपुर में जनता के गुस्से के बाद अभिषेक अब केंद्रीय सुरक्षा बल की मांग कर रहे हैं। रितब्रत ने आई-पैक मॉडल को भी टीएमसी की गिरती स्थिति के लिए जिम्मेदार बताया।
निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर टकराव खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी से निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी ने मंगलवार को टीएमसी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनारपुर में जनता के गुस्से का सामना करने के बाद अब अभिषेक बनर्जी केंद्रीय सुरक्षा बल यानी सीएपीएफ सुरक्षा कवर मांग रहे हैं। रितब्रत बनर्जी ने सवाल उठाया कि जो नेता पहले कहते थे कि जनता उनकी सुरक्षा करेगी, अब उन्हें केंद्रीय सुरक्षा की जरूरत क्यों पड़ रही है।
रितब्रत बनर्जी मंगलवार दोपहर अचानक विधानसभा पहुंचे और मीडिया से बातचीत में टीएमसी नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 24 मई को पार्टी की बड़ी हार के बाद अभिषेक बनर्जी 26 दिनों तक घर में ही रहे। उन्होंने कहा, “अगर वह इतने बड़े जननेता हैं तो फिर उन्हें सुरक्षा बलों की जरूरत क्यों पड़ रही है?” रितब्रत ने यह भी कहा कि उन्हें कुछ लोग गद्दार कह सकते हैं, लेकिन कोई उन्हें चोर नहीं कह रहा।
ये भी पढ़ें- शुभेंदु सरकार के खिलाफ ममता का धरना: बोलीं- भाजपा ने 177 सीटों पर की धांधली, कार्यकर्ताओं को रोक रही पुलिस
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क्या रितब्रत बनर्जी ने आई-पैक मॉडल पर उठाए सवाल?
रितब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी यानी आई-पैक के जरिए टीएमसी को कॉरपोरेट स्टाइल में चलाने की कोशिश की। उनके मुताबिक इसी वजह से पार्टी को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि टीएमसी को ममता बनर्जी ने जमीनी स्तर पर मेहनत करके खड़ा किया था, लेकिन अब पार्टी की दिशा बदल गई है। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी जैसी नेता बहुत कम होती हैं और वह आज भी उनका सम्मान करते हैं।
क्या फर्जी हस्ताक्षर विवाद के बाद बढ़ा टकराव?
रितब्रत बनर्जी और एंटाली सीट से विधायक संदीपन साहा को सोमवार को टीएमसी से निष्कासित किया गया था। यह कार्रवाई उस समय हुई जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष से जुड़े प्रस्ताव में हस्ताक्षरों की गड़बड़ी का मामला सबसे पहले इन्हीं दोनों विधायकों ने स्पीकर कार्यालय के सामने उठाया था। इसके बाद यह मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।
क्या सीआईडी जांच से बढ़ी टीएमसी की मुश्किल?
हस्ताक्षर गड़बड़ी मामले की जांच अब पश्चिम बंगाल सीआईडी कर रही है। आरोप है कि विधानसभा में विपक्षी खेमे के लिए आरक्षित चार महत्वपूर्ण पदों के आवंटन से जुड़े प्रस्ताव में विधायकों के हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे थे। इसी के बाद जांच शुरू हुई। इस मामले ने टीएमसी के भीतर असंतोष और अंदरूनी संघर्ष को और बढ़ा दिया है।
क्या टीएमसी के भीतर खुलकर सामने आ रही बगावत?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के अंदर नाराजगी बढ़ती जा रही है। रितब्रत बनर्जी का खुला हमला इसी असंतोष का संकेत माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व जहां इसे अनुशासनहीनता बता रहा है, वहीं विरोधी दल इसे टीएमसी के अंदरूनी संकट का बड़ा संकेत बता रहे हैं।
रितब्रत बनर्जी मंगलवार दोपहर अचानक विधानसभा पहुंचे और मीडिया से बातचीत में टीएमसी नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 24 मई को पार्टी की बड़ी हार के बाद अभिषेक बनर्जी 26 दिनों तक घर में ही रहे। उन्होंने कहा, “अगर वह इतने बड़े जननेता हैं तो फिर उन्हें सुरक्षा बलों की जरूरत क्यों पड़ रही है?” रितब्रत ने यह भी कहा कि उन्हें कुछ लोग गद्दार कह सकते हैं, लेकिन कोई उन्हें चोर नहीं कह रहा।
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क्या फर्जी हस्ताक्षर विवाद के बाद बढ़ा टकराव?
रितब्रत बनर्जी और एंटाली सीट से विधायक संदीपन साहा को सोमवार को टीएमसी से निष्कासित किया गया था। यह कार्रवाई उस समय हुई जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष से जुड़े प्रस्ताव में हस्ताक्षरों की गड़बड़ी का मामला सबसे पहले इन्हीं दोनों विधायकों ने स्पीकर कार्यालय के सामने उठाया था। इसके बाद यह मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।
क्या सीआईडी जांच से बढ़ी टीएमसी की मुश्किल?
हस्ताक्षर गड़बड़ी मामले की जांच अब पश्चिम बंगाल सीआईडी कर रही है। आरोप है कि विधानसभा में विपक्षी खेमे के लिए आरक्षित चार महत्वपूर्ण पदों के आवंटन से जुड़े प्रस्ताव में विधायकों के हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे थे। इसी के बाद जांच शुरू हुई। इस मामले ने टीएमसी के भीतर असंतोष और अंदरूनी संघर्ष को और बढ़ा दिया है।
क्या टीएमसी के भीतर खुलकर सामने आ रही बगावत?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के अंदर नाराजगी बढ़ती जा रही है। रितब्रत बनर्जी का खुला हमला इसी असंतोष का संकेत माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व जहां इसे अनुशासनहीनता बता रहा है, वहीं विरोधी दल इसे टीएमसी के अंदरूनी संकट का बड़ा संकेत बता रहे हैं।