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टलेगा बंगलूरू निकाय चुनाव: कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों मांगा चार महीने का वक्त? इसे बनाया कारण

Fri, 10 Jul 2026 03:00 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 10 Jul 2026 03:00 PM IST
सार

कर्नाटक सरकार ने ग्रेटर बंगलूरू अथॉरिटी (जीबीए) के तहत नगर निगम चुनाव कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 31 दिसंबर 2026 तक समय बढ़ाने की मांग की है। सरकार का कहना है कि मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के कारण चुनाव कराना फिलहाल संभव नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट पहले ही 31 अगस्त तक चुनाव कराने का अंतिम निर्देश दे चुका है और चुनाव में हो रही लगातार देरी पर नाराजगी भी जता चुका है।

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Bengaluru civic polls to be deferred Why Karnataka government seek four months time from Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक सरकार ने ग्रेटर बंगलूरू अथॉरिटी (जीबीए) के तहत नगर निगमों के चुनाव कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 31 दिसंबर 2026 तक समय बढ़ाने की मांग की है। सरकार ने इसके पीछे मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का हवाला दिया है।

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क्या 31 अगस्त तक चुनाव कराना अब संभव नहीं है?
सुप्रीम कोर्ट ने पहले राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि बंगलूरू नगर निकाय चुनाव 31 अगस्त तक हर हाल में पूरे कराए जाएं। हालांकि, राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के चलते तय समयसीमा का पालन करना संभव नहीं है।
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सरकार ने कर्मचारियों की कमी का क्या कारण बताया?
सरकार के मुताबिक, जीबीए चुनाव कराने के लिए करीब 56,000 अधिकारियों की जरूरत होती है। इनमें बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) भी शामिल हैं, जो फिलहाल घर-घर जाकर मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के काम में जुटे हुए हैं।
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एसआईआर अभियान चुनाव की राह में कैसे बना चुनौती?
अधिकारियों ने बताया कि बंगलूरू में 1.03 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता गणना प्रपत्रों का वितरण, संग्रह और सत्यापन किया जा रहा है। इसी वजह से चुनावी तैयारियों के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसी आधार पर ग्रेटर बंगलूरू अथॉरिटी के मुख्य आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट से 31 अगस्त की समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 करने का अनुरोध किया है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने क्या कहा?
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार अदालत के निर्देशों का पालन कर रही है, लेकिन एसआईआर अभियान के कारण व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने हमें प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। एसआईआर अभियान के कारण कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। मैंने यह मामला अधिकारियों पर छोड़ दिया है। राजनीतिक दल के तौर पर हम चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।

क्या सरकार पहले भी चुनाव टालने की कोशिश करती रही है?
गौरतलब है कि राज्य सरकार पहले भी बंगलूरू नगर निकाय चुनाव टालने के लिए अलग-अलग कारणों का हवाला देती रही है। ग्रेटर बंगलूरू अथॉरिटी अधिनियम के तहत जीबीए के अंतर्गत आने वाले पांच नगर निगमों के लिए चुनाव कराए जाने हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने देरी पर क्या सख्त टिप्पणी की?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताई और राज्य सरकार से बार-बार चुनाव टालने के कारणों पर सवाल उठाए। इससे पहले भी शीर्ष अदालत कर्नाटक सरकार को चुनाव टालने के लिए 'देरी की रणनीति' अपनाने पर कड़ी फटकार लगा चुकी है। अदालत ने अंतिम बार 31 अगस्त 2026 तक का समय देते हुए स्पष्ट कहा था कि इसके बाद किसी भी तरह का और विस्तार नहीं दिया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अगस्त तक का अंतिम समय देते हुए साफ किया था कि इसके बाद और मोहलत नहीं मिलेगी।


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पहले समय बढ़ाने के लिए सरकार ने क्या दलील दी थी?
उस समय कर्नाटक सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जनगणना कार्य और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए समय बढ़ाने का अनुरोध किया था।

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