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Land For Job Scam: क्या लालू परिवार का सियासी भविष्य दांव पर? तेजस्वी यादव की छवि को हो सकता है नुकसान
कुमार निशांत, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 10 Jan 2026 04:09 AM IST
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सार
जमीन के बदले नौकरी मामले में आरोप तय हो गए हैं। इस मामले में मुख्य आरोपी लालू परिवार है। साफ हो गया है कि अब यह मामला जल्द लालू परिवार का पीछा नहीं छोड़ेगा और साथ ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस मामले से लालू परिवार के सियासी भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा गए हैं?
लालू परिवार
- फोटो : PTI
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विस्तार
रेलवे में जमीन के बदले नौकरी घोटाले में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती और हेमा यादव समेत 46 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। इससे साफ है कि अब मामला लंबी कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ चुका है। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान परिवार के वरिष्ठ सदस्य लालू प्रसाद यादव पहले से स्वास्थ्य और उम्र के चलते सीमित भूमिका में हैं। ऐसे में युवा नेतृत्व खासकर तेजस्वी पर दबाव बढ़ना तय है।
तेजस्वी यादव के राजनीतिक नैरेटिव पर सीधी चोट
राजनीतिक दृष्टि से इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र तेजस्वी हैं। वे न सिर्फ राजद का सबसे बड़ा चेहरा हैं, बल्कि हाल के वर्षों में उन्होंने खुद को शासन और रोजगार के मुद्दे पर स्थापित करने की कोशिश की है। ऐसे में नौकरी के बदले जमीन जैसे आरोप उनके राजनीतिक नैरेटिव को सीधी चोट पहुंचाते हैं। विपक्ष इसे नैतिकता और विश्वसनीयता का सवाल बनाकर भुनाने की कोशिश करेगा, जबकि राजद इसे कानूनी लड़ाई बताते हुए राजनीतिक साजिश का तर्क आगे रखेगा।
गठबंधन की राजनीति पर भी पड़ेगा असर
लालू परिवार पर कानूनी शिकंजा कसने का असर सहयोगी दलों की रणनीति पर भी पड़ेगा। सार्वजनिक तौर पर भले सहयोगी समर्थन जताएं, लेकिन चुनावी समय में यह केस बोझ बन सकता है। खासकर शहरी और युवा मतदाताओं के बीच भ्रष्टाचार का मुद्दा फिर से तेज होने की आशंका है। हालांकि, लालू के राजनीतिक जीवन में यह पहला मौका नहीं है, जब वे कानूनी संकट में हैं। अतीत में ऐसे मामलों ने उनके समर्थक वर्ग में सहानुभूति भी पैदा की है। सवाल है कि क्या वही सहानुभूति अब भी उतनी ही असरदार है? बदलते सामाजिक राजनीतिक माहौल में जवाब उतना आसान नहीं। लालू परिवार के लिए यह वक्त कानूनी लड़ाई के साथ-साथ राजनीतिक संतुलन साधने की भी कड़ी परीक्षा है।
जमीन के बदले नौकरी घोटाले में सीबीआई से मांगा गया जवाब
आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के एक सहयोगी की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सीबीआई से जवाब मांगा। लालू के पूर्व विशेष कार्य अधिकारी भोला यादव ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि जमीन के बदले नौकरी घोटाले में पांच लोगों को माफी देते समय सीबीआई ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। जस्टिस मनोज जैन ने भोला यादव की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। हाईकोर्ट को शुक्रवार को बताया गया कि ट्रायल अदालत ने शुक्रवार को आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को आदेश की प्रति रिकॉर्ड पर रखने को कहा और याचिका की अगली सुनवाई 27 जनवरी को सूचीबद्ध की। भोला यादव आरजेडी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और लालू प्रसाद यादव के परिवार के साथ भूमि-बदले-नौकरी मामले में सह-आरोपी हैं।
ये भी पढ़ें- ED raid on I-PAC: ईडी की कार्रवाई के एक दिन बाद आई-पैक की ओर से आई पहली प्रतिक्रिया, छापेमारी को बताया 'असहज करने वाला कदम'
ये सौदे जांच के दायरे में
6 फरवरी 2008 को किशुन देव राय ने 3,375 वर्ग फुट जमीन राबड़ी देवी को मात्र 3.75 लाख में बेची। उसी साल उनके परिवार के तीन सदस्यों को सेंट्रल रेलवे, मुंबई में ग्रुप-डी की नौकरी मिली।
फरवरी 2008 में संजय राय ने भी इतनी ही जमीन राबड़ी देवी को 3.75 लाख में बेची। बदले में उनके परिवार के दो सदस्यों को नौकरी मिली।
नवंबर 2007 में किरण देवी ने 80,905 वर्ग फुट (सबसे बड़ी जमीन) मीसा भारती को 3.70 लाख में बेची। 2008 में उनके बेटे को मुंबई में नौकरी मिली।
फरवरी 2007 में हजारी राय ने 9,527 वर्ग फुट जमीन एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को 10.83 लाख में बेची। बाद में कंपनी की संपत्ति राबड़ी और मीसा के नाम हुई। बदले में उनके भतीजों को जबलपुर और कोलकाता में नौकरी मिली।
पहले नौकरी, बाद में जमीन – लाल बाबू राय के बेटे को 2006 में जयपुर में नौकरी मिली। बाद में 2015 में उन्होंने 1,360 वर्ग फुट जमीन राबड़ी देवी को 13 लाख में दी।
हृदयानंद चौधरी को 2005 में नौकरी मिलने के बाद 2014 में उन्होंने 62 लाख रुपये मूल्य की जमीन हेमा यादव को गिफ्ट डीड से तोहफे में दे दी।
2008 में नौकरी मिलने के बाद 2014 में जमीन का एक टुकड़ा हेमा यादव को तोहफे में दे दिया गया। जब जमीन के मालिक के पोते को रेलवे में नौकरी मिल गई।
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तेजस्वी यादव के राजनीतिक नैरेटिव पर सीधी चोट
राजनीतिक दृष्टि से इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र तेजस्वी हैं। वे न सिर्फ राजद का सबसे बड़ा चेहरा हैं, बल्कि हाल के वर्षों में उन्होंने खुद को शासन और रोजगार के मुद्दे पर स्थापित करने की कोशिश की है। ऐसे में नौकरी के बदले जमीन जैसे आरोप उनके राजनीतिक नैरेटिव को सीधी चोट पहुंचाते हैं। विपक्ष इसे नैतिकता और विश्वसनीयता का सवाल बनाकर भुनाने की कोशिश करेगा, जबकि राजद इसे कानूनी लड़ाई बताते हुए राजनीतिक साजिश का तर्क आगे रखेगा।
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गठबंधन की राजनीति पर भी पड़ेगा असर
लालू परिवार पर कानूनी शिकंजा कसने का असर सहयोगी दलों की रणनीति पर भी पड़ेगा। सार्वजनिक तौर पर भले सहयोगी समर्थन जताएं, लेकिन चुनावी समय में यह केस बोझ बन सकता है। खासकर शहरी और युवा मतदाताओं के बीच भ्रष्टाचार का मुद्दा फिर से तेज होने की आशंका है। हालांकि, लालू के राजनीतिक जीवन में यह पहला मौका नहीं है, जब वे कानूनी संकट में हैं। अतीत में ऐसे मामलों ने उनके समर्थक वर्ग में सहानुभूति भी पैदा की है। सवाल है कि क्या वही सहानुभूति अब भी उतनी ही असरदार है? बदलते सामाजिक राजनीतिक माहौल में जवाब उतना आसान नहीं। लालू परिवार के लिए यह वक्त कानूनी लड़ाई के साथ-साथ राजनीतिक संतुलन साधने की भी कड़ी परीक्षा है।
जमीन के बदले नौकरी घोटाले में सीबीआई से मांगा गया जवाब
आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के एक सहयोगी की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सीबीआई से जवाब मांगा। लालू के पूर्व विशेष कार्य अधिकारी भोला यादव ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि जमीन के बदले नौकरी घोटाले में पांच लोगों को माफी देते समय सीबीआई ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। जस्टिस मनोज जैन ने भोला यादव की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। हाईकोर्ट को शुक्रवार को बताया गया कि ट्रायल अदालत ने शुक्रवार को आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को आदेश की प्रति रिकॉर्ड पर रखने को कहा और याचिका की अगली सुनवाई 27 जनवरी को सूचीबद्ध की। भोला यादव आरजेडी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और लालू प्रसाद यादव के परिवार के साथ भूमि-बदले-नौकरी मामले में सह-आरोपी हैं।
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ये सौदे जांच के दायरे में
6 फरवरी 2008 को किशुन देव राय ने 3,375 वर्ग फुट जमीन राबड़ी देवी को मात्र 3.75 लाख में बेची। उसी साल उनके परिवार के तीन सदस्यों को सेंट्रल रेलवे, मुंबई में ग्रुप-डी की नौकरी मिली।
फरवरी 2008 में संजय राय ने भी इतनी ही जमीन राबड़ी देवी को 3.75 लाख में बेची। बदले में उनके परिवार के दो सदस्यों को नौकरी मिली।
नवंबर 2007 में किरण देवी ने 80,905 वर्ग फुट (सबसे बड़ी जमीन) मीसा भारती को 3.70 लाख में बेची। 2008 में उनके बेटे को मुंबई में नौकरी मिली।
फरवरी 2007 में हजारी राय ने 9,527 वर्ग फुट जमीन एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को 10.83 लाख में बेची। बाद में कंपनी की संपत्ति राबड़ी और मीसा के नाम हुई। बदले में उनके भतीजों को जबलपुर और कोलकाता में नौकरी मिली।
पहले नौकरी, बाद में जमीन – लाल बाबू राय के बेटे को 2006 में जयपुर में नौकरी मिली। बाद में 2015 में उन्होंने 1,360 वर्ग फुट जमीन राबड़ी देवी को 13 लाख में दी।
हृदयानंद चौधरी को 2005 में नौकरी मिलने के बाद 2014 में उन्होंने 62 लाख रुपये मूल्य की जमीन हेमा यादव को गिफ्ट डीड से तोहफे में दे दी।
2008 में नौकरी मिलने के बाद 2014 में जमीन का एक टुकड़ा हेमा यादव को तोहफे में दे दिया गया। जब जमीन के मालिक के पोते को रेलवे में नौकरी मिल गई।