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BJP Politics In Bengal: बंगाल में नरम हिंदुत्व की राह पर भाजपा, मुस्लिम ध्रुवीकरण से सबक लेकर बदली चुनावी चाल
Fri, 11 Jul 2025 07:51 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 11 Jul 2025 07:51 AM IST
सार
पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने रणनीति बदली है। समिक भट्टाचार्य के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी अब आक्रामक नहीं, बल्कि नरम हिंदुत्व की राह पर चलेगी। मुस्लिम वोटों के टीएमसी के पक्ष में एकतरफा ध्रुवीकरण की काट के लिए यह बदलाव किया गया है।
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भाजपा का झंडा
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। समिक भट्टाचार्य के नए अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद पार्टी ने यहां आक्रामक हिंदुत्व की जगह नरम हिंदुत्व को चुनावी हथियार बनाने का फैसला किया है। लोकसभा के बीते दो और विधानसभा के एक चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से पार पाने की कोशिश में नाकाम रहने के बाद पार्टी ने अब राज्य के 30 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं के एकतरफा ध्रुवीकरण की काट की कोशिश में लगी है।
गौरतलब है कि 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को सियासी अखाड़े में चित करने के लिए आक्रामक हिंदुत्व की राह पकड़ी थी। इस रणनीति के कारण भाजपा इस राज्य में नंबर दो की पार्टी का हैसियत तो पा गई, मगर टीएमसी की जगह खुद सत्ता हासिल करने का उसका सपना पूरा नहीं हुआ। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनआरसी) जैसे मुद्दे पर भाजपा के आक्रामक रुख के कारण राज्य के मुस्लिम मतदाता कांग्रेस, वाम दलों से करीब-करीब पूरी तरह से किनारा कर सत्तारूढ़ टीएमसी के पक्ष में गोलबंद हो गए।
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ऐसे बदलती गई तस्वीर
राष्ट्रीय राजनीति में मोदी युग की 2014 में शुरुआत के बाद पश्चिम बंगाल की सियासी तस्वीर पलटती चली गई। भाजपा के सत्ता में आने के भय से मुस्लिम मतदाता टीएमसी के पक्ष में एकतरफा गोलबंद होते चले गए। मसलन 2015 के विधानसभा चुनाव में 44 सीटें और 12 फीसदी वोट हासिल करने वाली कांग्रेस और 26 सीटें और 20 फीसदी वोट हासिल करने वाले वाम दल 2020 के चुनाव में सियासी परिदृश्य से लगभग गायब हो गए। बीते चुनाव में कांग्रेस और वाम दल एक भी सीट नहीं जीत पाई और इनके वोट प्रतिशत में क्रमश: 10 और 16 फीसदी की कमी आई।
ये भी पढ़ें:- पश्चिम बंगाल: भांगर में तृणमूल नेता रज्जाक खान की गोली मारकर हत्या, व्यक्तिगत रंजिश की आशंका
भाजपा मुसलमानों के नहीं बल्कि कट्टरपंथ के खिलाफ है। हम चाहते हैं कि मुसलमानों के हाथ में पत्थर की जगह किताब रहे। राज्य में राजनीतिक हिंसा के शिकार लोगों में 90 फीसदी मुसलमान हैं। हम राज्य का पुराना सांप्रदायिक सौहार्द वापस लाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि दुर्गा पूजा और मुहर्रम का जुलूस एक साथ शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो। मुसलमानों के शिक्षा और रोजागर पर भी बात हो। -समिक भट्टाचार्य, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
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गौरतलब है कि 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को सियासी अखाड़े में चित करने के लिए आक्रामक हिंदुत्व की राह पकड़ी थी। इस रणनीति के कारण भाजपा इस राज्य में नंबर दो की पार्टी का हैसियत तो पा गई, मगर टीएमसी की जगह खुद सत्ता हासिल करने का उसका सपना पूरा नहीं हुआ। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनआरसी) जैसे मुद्दे पर भाजपा के आक्रामक रुख के कारण राज्य के मुस्लिम मतदाता कांग्रेस, वाम दलों से करीब-करीब पूरी तरह से किनारा कर सत्तारूढ़ टीएमसी के पक्ष में गोलबंद हो गए।
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भाजपा मुसलमानों के नहीं बल्कि कट्टरपंथ के खिलाफ है। हम चाहते हैं कि मुसलमानों के हाथ में पत्थर की जगह किताब रहे। राज्य में राजनीतिक हिंसा के शिकार लोगों में 90 फीसदी मुसलमान हैं। हम राज्य का पुराना सांप्रदायिक सौहार्द वापस लाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि दुर्गा पूजा और मुहर्रम का जुलूस एक साथ शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो। मुसलमानों के शिक्षा और रोजागर पर भी बात हो। -समिक भट्टाचार्य, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा