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Bombay High Court: सीएम योगी पर बनी फिल्म 'अजेय' को सेंसर बोर्ड की मंजूरी में देरी, निर्माता पहुंचे हाईकोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 15 Jul 2025 07:32 PM IST
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सार
हिंदी फिल्म 'अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी' के निर्माता सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) से मंजूरी में हो रही देरी को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि सीबीएफसी कानून के तहत तय समयसीमा के भीतर प्रमाणपत्र देने का जिम्मेदार है और उससे बच नहीं सकता।
बॉम्बे हाई कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित हिंदी फिल्म 'अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी' के निर्माता सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) से मंजूरी में हो रही देरी को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। यह फिल्म 1 अगस्त, 2025 को देशभर में रिलीज होनी है। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखलेने मंगलवार को सीबीएफसी को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। अगली सुनवाई अब 17 जुलाई को होगी।
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सीबीएफसी पर 'मनमानी देरी' का आरोप
फिल्म के निर्माता सम्राट सिनेमेटिक्स इंडिया प्रा. लि.ने याचिका दायर कर कहा है कि उन्होंने 5 जून 2025को फिल्म को सर्टिफिकेट दिलाने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन कानून के तहत तय समयसीमा (15 दिन) बीतने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी बताया कि 3 जुलाई को उन्होंने सेंसर बोर्ड की 'प्राथमिकता योजना' के तहत तीन गुना फीस भरकर दोबारा आवेदन किया। इसके बाद 7 जुलाई को स्क्रीनिंग तय की गई थी, लेकिन एक दिन पहले ही बिना कोई कारण बताए उसे रद्द कर दिया गया।
'एनओसी की मांग कानून के खिलाफ'
निर्माताओं ने आरोप लगाया कि सीबीएफसी ने उनसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ)से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (एनओसी) लाने की मांग की, जिसका किसी भी कानून में कोई प्रावधान नहींहै। याचिका में कहा गया कि 'सीएमओ से एनओसी मांगना पूरी तरह अवैध, अनुचित और फिल्म की रिलीज में देरी करने की एक कोशिश है।'
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आर्थिक नुकसान और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
फिल्म निर्माताओं ने दावा किया कि अब तक वे करीब 30 करोड़ रुपये का खर्च कर चुके हैं और रिलीज तक 10 करोड़ रुपये और खर्च होने की संभावना है। सीबीएफसी की देरी की वजह से प्रमोशनल कैंपेन में रुकावट आई, जिससे उन्हें भारी आर्थिक और साख का नुकसान हुआ। याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म 'वह साधु जो मुख्यमंत्री बन गया' नाम की किताब पर आधारित है, जो 2017 में प्रकाशित हुई थी और 12 भाषाओं में उपलब्ध है। यह किताब योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक यात्रा को सम्मानपूर्वक और तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करती है। यही किताब फिल्म की प्रेरणा भी है।
कोर्ट ने सीबीएफसी को याद दिलाई जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि सीबीएफसी कानून के तहत तय समयसीमा के भीतर प्रमाणपत्र देने का जिम्मेदार है और उससे बच नहीं सकता। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि सीबीएफसी को आदेश दिया जाए कि वह पांच दिन के भीतर फिल्म, ट्रेलर, टीजर और गाने को प्रमाणित करे। फिल्म की स्क्रीनिंग तुरंत करवाई जाए।
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सीबीएफसी पर 'मनमानी देरी' का आरोप
फिल्म के निर्माता सम्राट सिनेमेटिक्स इंडिया प्रा. लि.ने याचिका दायर कर कहा है कि उन्होंने 5 जून 2025को फिल्म को सर्टिफिकेट दिलाने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन कानून के तहत तय समयसीमा (15 दिन) बीतने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी बताया कि 3 जुलाई को उन्होंने सेंसर बोर्ड की 'प्राथमिकता योजना' के तहत तीन गुना फीस भरकर दोबारा आवेदन किया। इसके बाद 7 जुलाई को स्क्रीनिंग तय की गई थी, लेकिन एक दिन पहले ही बिना कोई कारण बताए उसे रद्द कर दिया गया।
'एनओसी की मांग कानून के खिलाफ'
निर्माताओं ने आरोप लगाया कि सीबीएफसी ने उनसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ)से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (एनओसी) लाने की मांग की, जिसका किसी भी कानून में कोई प्रावधान नहींहै। याचिका में कहा गया कि 'सीएमओ से एनओसी मांगना पूरी तरह अवैध, अनुचित और फिल्म की रिलीज में देरी करने की एक कोशिश है।'
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आर्थिक नुकसान और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
फिल्म निर्माताओं ने दावा किया कि अब तक वे करीब 30 करोड़ रुपये का खर्च कर चुके हैं और रिलीज तक 10 करोड़ रुपये और खर्च होने की संभावना है। सीबीएफसी की देरी की वजह से प्रमोशनल कैंपेन में रुकावट आई, जिससे उन्हें भारी आर्थिक और साख का नुकसान हुआ। याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म 'वह साधु जो मुख्यमंत्री बन गया' नाम की किताब पर आधारित है, जो 2017 में प्रकाशित हुई थी और 12 भाषाओं में उपलब्ध है। यह किताब योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक यात्रा को सम्मानपूर्वक और तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करती है। यही किताब फिल्म की प्रेरणा भी है।
कोर्ट ने सीबीएफसी को याद दिलाई जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि सीबीएफसी कानून के तहत तय समयसीमा के भीतर प्रमाणपत्र देने का जिम्मेदार है और उससे बच नहीं सकता। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि सीबीएफसी को आदेश दिया जाए कि वह पांच दिन के भीतर फिल्म, ट्रेलर, टीजर और गाने को प्रमाणित करे। फिल्म की स्क्रीनिंग तुरंत करवाई जाए।
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