CAA Protest: सीएए का कई राज्यों में विरोध, केजरीवाल बोले- नागरिकता मिलने से देश में होगी रोजगार-आवास की किल्लत
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विस्तार
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने से इसके कारण पड़ने वाले असर को भांपते हुए विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु ने साफ कर दिया है कि वे इस कानून को अपने राज्यों में लागू नहीं होने देंगे। ममता बनर्जी ने रमजान महीने की शुरुआत के ठीक पहले नागरिकता संशोधन कानून लागू करने को मुस्लिम समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया है। अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि हम अपने ही लोगों को रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में इन देशों से आने वाले बेरोजगार लोगों को भारत में नागरिकता देने से देश की समस्याएं बढ़ जाएंगी। उन्होंने इस कानून को वापस लेने की मांग की है। हालांकि, संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यों के पास इस कानून को अपने यहां लागू होने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है।
राजनीतिक दलों का नागरिकता संशोधन कानून का विरोध पूरी तरह राजनीतिक है। भाजपा इस कानून को जबरदस्त तरीके से भुनाने की कोशिश कर रही है। उसके नेता-कार्यकर्ता जगह-जगह पर अपने भाषणों में यह कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार ने चुनाव में किया गया अपना सबसे बड़ा वादा निभा दिया है। इससे मतदाताओं में सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण हो सकता है। इसका लाभ भाजपा को मिलेगा, जबकि इसका नुकसान कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों को हो सकता है।
ममता बनर्जी क्यों परेशान हैं?
नागरिकता संशोधन कानून का सबसे ज्यादा विरोध ममता बनर्जी ने किया है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आने वाले अवैध प्रवासियों का मुद्दा बहुत गर्म है। आरोप है कि मतुआ समुदाय के हिंदू लोगों का एक वर्ग विरोध करता है, तो बांग्लादेश से आने वाले मुस्लिम समुदाय के अवैध प्रवासियों को वहां रहने-खाने से लेकर हर तरह की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
लेकिन नए कानून के कारण मतुआ समुदाय के लोगों को नागरिकता का लाभ मिल सकता है, जबकि बांग्लादेश के अवैध मुस्लिम प्रवासियों को देश से जाना पड़ सकता है। ऐसा होने की स्थिति में मतुआ समुदाय भाजपा को वोट कर सकता है, जिससे भाजपा को लाभ होगा, जबकि अवैध मुस्लिम प्रवासियों के राशन कार्ड, आधार कार्ड रद्द होने से ममता बनर्जी या कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों को नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि ममता बनर्जी ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
केरल में भी भाजपा का प्लान तैयार
केरल अब तक भाजपा के लिए बंजर जमीन रहा है। पार्टी वहां पर अभी तक खाता नहीं खोल पाई है। केरल की 20 लोकसभा सीटों पर वामदलों या कांग्रेस का कब्जा रहा है। लेकिन भाजपा यहां के हिंदू मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। वह ईसाई समुदाय के प्रभावशाली नेताओं को भी अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है। लव जिहाद जैसे मामले इसमें उसकी मदद भी कर रहे हैं।
नागरिकता संशोधन कानून का केरल में भी असर हो सकता है, क्योंकि अवैध बांग्लादेशी और म्यांमार के प्रवासी वहां भी रहने लगे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर कुछ समुदाय के लोग नाराज हैं। भाजपा का अनुमान है कि इससे उसे लाभ मिल सकता है।
संविधान विशेषज्ञ ने क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार दुबे ने अमर उजाला से कहा कि नागरिकता का मुद्दा शेड्यूल सात में शामिल है। इस शेड्यूल में शामिल विषयों पर केंद्र को पूरा अधिकार प्राप्त है और इन मुद्दों पर किए गए किसी निर्णय का कोई राज्य विरोध नहीं कर सकता। वह इसे कानून की किसी अनुच्छेद के सहारे गलत भी नहीं ठहरा सकता। लिहाजा नागरिकता संशोधन कानून का विरोध राजनीति से प्रेरित है।
कांग्रेस ने कहा
वहीं, कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन कानून को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और मुद्दे से भटकाने की साजिश बताया है। कांग्रेस नेता प्रबल प्रताप शाही ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा इस चुनाव में 400 सीटें जीतने की बात कह रही है। वह दो तिहाई बहुमत लाकर अनुसूचित जाति, जनजाति को दिया जाने वाला आरक्षण समाप्त करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल जनता का असली मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए लाया गया है।