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कोलकाता हाईकोर्ट की टिप्पणी: 'जमीन के कागजात भारत की नागरिकता का प्रमाण नहीं'; अदालत के फैसले में और क्या?

Sat, 18 Jul 2026 02:10 AM IST
एन अर्जुन अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता।
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता। Published by: एन अर्जुन Updated Sat, 18 Jul 2026 02:10 AM IST
सार

कोलकाता हाईकोर्ट ने नागरिकता के मामले में अहम टिप्पणी की है। बांग्लादेश से घुसपैठ के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति के मामले में अदालत ने पीड़ित को एक और मौका दिया। कोर्ट ने कहा कि 20 जुलाई तक नागरिकता के वैध दस्तावेज दाखिल करें। जमीन के कागजात भारत की नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं। जानिए क्या है पूरा मामला

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Calcutta High Court Land documents not proof of Indian citizenship know details of verdict in case
कलकत्ता हाईकोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि जमीन के कागजात किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं माने जा सकते। बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार नासिर मोल्ला से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की। नासिर मोल्ला को पिछले जून में गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह डिटेंशन सेंटर में है। उसकी ओर से एक रिश्तेदार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि वह भारतीय नागरिक है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में जमीन से जुड़े दस्तावेज पेश किए और उन्हें नागरिकता के समर्थन में साक्ष्य बताया।

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इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि भारत में जमीन खरीदना किसी व्यक्ति के भारतीय नागरिक होने का प्रमाण नहीं है। अदालत ने कहा कि कोई विदेशी नागरिक भी भारत में अचल संपत्ति खरीद सकता है और केवल जमीन का मालिक होना नागरिकता का आधार नहीं बन सकता।
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि गिरफ्तार व्यक्ति ने पूछताछ के दौरान खुद को विदेशी नागरिक स्वीकार किया है। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता से नागरिकता के वैध और प्रमाणिक दस्तावेज पेश करने को कहा।
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अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिससे भारतीय नागरिकता साबित होती हो। इसके साथ ही अदालत ने एक बार फिर दोहराया कि जमीन के दस्तावेज नागरिकता का प्रमाण नहीं माने जा सकते। हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक और अवसर देते हुए 20 जुलाई तक हलफनामे के साथ नागरिकता संबंधी वैध दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया है।

नागरिकता के मामलों में पहले भी उठ चुका है दस्तावेजों का मुद्दा हाल ही में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने भी एक नागरिकता विवाद से जुड़े मामले में पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पारिवारिक दस्तावेज और जमीन के कागजात सहित कई दस्तावेजों को नागरिकता साबित करने के लिए अपर्याप्त माना था। अदालत ने विदेशी अधिनियम, 1964 की धारा 9 का हवाला देते हुए कहा था कि नागरिकता साबित करने का दायित्व संबंधित व्यक्ति पर ही होता है।


क्या पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण है?
हाल के दिनों में पासपोर्ट को लेकर भी बहस छिड़ी है। केंद्र सरकार के सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, पासपोर्ट अपने आप में नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाता, बल्कि यह मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, जो उपलब्ध दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर जारी किया जाता है।

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