{"_id":"6a7dd230088f9b926809675a","slug":"kailas-mansarovar-yatra-affordable-accessible-safe-kirti-vardhan-singh-2026-08-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैलाश मानसरोवर यात्रा: यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या-क्या कर रही सरकार? कीर्ति वर्धन सिंह ने सब कुछ बताया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कैलाश मानसरोवर यात्रा: यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या-क्या कर रही सरकार? कीर्ति वर्धन सिंह ने सब कुछ बताया
Thu, 13 Aug 2026 07:48 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 13 Aug 2026 07:48 PM IST
सार
सरकार का जोर कैलाश यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर है। इसके लिए चिकित्सा जांच, आपात स्थिति में हेलीकॉप्टर से निकासी, सड़क संपर्क और परिवहन, ठहरने तथा भोजन की सुविधाओं में सुधार किया जा रहा है। नेपाल मार्ग पर भारतीय दूतावास सुरक्षा और आपात सहायता के लिए नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। यात्रियों को जरूरी वीजा और प्रवेश परमिट हासिल करने के बाद ही यात्रा शुरू करने की सलाह दी गई है।
विज्ञापन
कैलाश मानसरोवर यात्रा
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कैलाश मानसरोवर यात्रा को भारतीय नागरिकों के लिए अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। यात्रियों की सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और सड़क संपर्क बेहतर करने पर लगातार काम किया जा रहा है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी।
बीजू जनता दल की सांसद सुलता देव के एक सवाल के लिखित जवाब में मंत्री ने बताया कि विदेश मंत्रालय उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और सिक्किम सरकारों, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर यात्रा का आयोजन करता है।
दो आधिकारिक मार्गों से होती है यात्रा
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दो आधिकारिक मार्ग हैं। उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा मार्ग 1981 से इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, सिक्किम का नाथू ला दर्रा मार्ग 2015 से यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यात्रा के सुचारु संचालन के लिए विदेश मंत्रालय चीन सरकार और विभिन्न भारतीय एजेंसियों के साथ समन्वय करता है।
विज्ञापन
यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम?
सरकार ने यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई व्यवस्थाएं की हैं। इनमें-
नेपाल मार्ग पर क्या है व्यवस्था?
कैलाश मानसरोवर यात्रा नेपाल के रास्ते भी होती है। इस मार्ग पर निजी यात्रा संचालक यात्रा का आयोजन करते हैं। कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाली अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में रहता है। जरूरत पड़ने पर भारतीय यात्रियों को समय पर बाहर निकालने, आश्रय, चिकित्सा उपचार और अन्य सहायता उपलब्ध कराने के लिए समन्वय किया जाता है।
मंत्री का यह जवाब उस सवाल के जवाब में आया, जिसमें यात्रा की लागत, बुनियादी ढांचे, सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, बीमा, आर्थिक मदद और यात्रियों के कल्याण समेत सभी पहलुओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने पर विचार किए जाने के बारे में पूछा गया था।
यह भी पढ़ें: Pithoragarh News: आस्था और संस्कृति का संदेश लेकर कैलाश मानसरोवर यात्रा का अंतिम दल धारचूला रवाना
छह अगस्त को सरकार ने क्या चेतावनी दी थी?
इससे पहले छह अगस्त को कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया था कि नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों की सुरक्षा के लिए भारतीय दूतावास नेपाली अधिकारियों के साथ करीबी समन्वय कर रहा है। उन्होंने बताया था कि विदेश मंत्रालय को ऐसे भारतीय नागरिकों से मदद के कई अनुरोध मिले, जो निजी यात्रा संचालकों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल पहुंचे थे, लेकिन उनके पास जरूरी चीनी वीजा और प्रवेश परमिट नहीं थे। विदेश मंत्रालय ने 27 जून 2026 को परामर्श जारी कर यात्रियों से कहा था कि जरूरी यात्रा दस्तावेज हासिल किए बिना भारत से यात्रा शुरू न करें।
जून से अगस्त-सितंबर के बीच होती है यात्रा
कैलाश मानसरोवर यात्रा हर साल जून से अगस्त और सितंबर के बीच होती है। हिंदुओं के लिए इसका विशेष धार्मिक महत्व है और इसे भगवान शिव का निवास माना जाता है। जैन और बौद्ध धर्म में भी इसका विशेष महत्व है। वैध भारतीय पासपोर्ट रखने वाले पात्र भारतीय नागरिक धार्मिक उद्देश्य से कैलाश-मानसरोवर की यात्रा कर सकते हैं।
विज्ञापन
बीजू जनता दल की सांसद सुलता देव के एक सवाल के लिखित जवाब में मंत्री ने बताया कि विदेश मंत्रालय उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और सिक्किम सरकारों, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर यात्रा का आयोजन करता है।
विज्ञापन
दो आधिकारिक मार्गों से होती है यात्रा
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दो आधिकारिक मार्ग हैं। उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा मार्ग 1981 से इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, सिक्किम का नाथू ला दर्रा मार्ग 2015 से यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यात्रा के सुचारु संचालन के लिए विदेश मंत्रालय चीन सरकार और विभिन्न भारतीय एजेंसियों के साथ समन्वय करता है।
विज्ञापन
यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम?
सरकार ने यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई व्यवस्थाएं की हैं। इनमें-
- यात्रियों की चिकित्सकीय जांच।
- ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा करने की क्षमता की जांच।
- आपात स्थिति में भारतीय क्षेत्र में हेलीकॉप्टर से यात्रियों को बाहर निकालने की व्यवस्था।
- लिपुलेख दर्रे तक यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए सड़क संपर्क का विकास।
- पूरे मार्ग पर परिवहन, ठहरने और भोजन जैसी सुविधाओं में लगातार सुधार।
नेपाल मार्ग पर क्या है व्यवस्था?
कैलाश मानसरोवर यात्रा नेपाल के रास्ते भी होती है। इस मार्ग पर निजी यात्रा संचालक यात्रा का आयोजन करते हैं। कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाली अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में रहता है। जरूरत पड़ने पर भारतीय यात्रियों को समय पर बाहर निकालने, आश्रय, चिकित्सा उपचार और अन्य सहायता उपलब्ध कराने के लिए समन्वय किया जाता है।
मंत्री का यह जवाब उस सवाल के जवाब में आया, जिसमें यात्रा की लागत, बुनियादी ढांचे, सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, बीमा, आर्थिक मदद और यात्रियों के कल्याण समेत सभी पहलुओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने पर विचार किए जाने के बारे में पूछा गया था।
यह भी पढ़ें: Pithoragarh News: आस्था और संस्कृति का संदेश लेकर कैलाश मानसरोवर यात्रा का अंतिम दल धारचूला रवाना
छह अगस्त को सरकार ने क्या चेतावनी दी थी?
इससे पहले छह अगस्त को कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया था कि नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों की सुरक्षा के लिए भारतीय दूतावास नेपाली अधिकारियों के साथ करीबी समन्वय कर रहा है। उन्होंने बताया था कि विदेश मंत्रालय को ऐसे भारतीय नागरिकों से मदद के कई अनुरोध मिले, जो निजी यात्रा संचालकों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल पहुंचे थे, लेकिन उनके पास जरूरी चीनी वीजा और प्रवेश परमिट नहीं थे। विदेश मंत्रालय ने 27 जून 2026 को परामर्श जारी कर यात्रियों से कहा था कि जरूरी यात्रा दस्तावेज हासिल किए बिना भारत से यात्रा शुरू न करें।
जून से अगस्त-सितंबर के बीच होती है यात्रा
कैलाश मानसरोवर यात्रा हर साल जून से अगस्त और सितंबर के बीच होती है। हिंदुओं के लिए इसका विशेष धार्मिक महत्व है और इसे भगवान शिव का निवास माना जाता है। जैन और बौद्ध धर्म में भी इसका विशेष महत्व है। वैध भारतीय पासपोर्ट रखने वाले पात्र भारतीय नागरिक धार्मिक उद्देश्य से कैलाश-मानसरोवर की यात्रा कर सकते हैं।