GOAT इंडिया टूर विवाद: बंगाल के पूर्व खेल मंत्री की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक, मेसी का इवेंट किया था खराब
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे के मामले में बड़ी राहत दी है। बिस्वास पर इवेंट के दौरान जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग और कॉम्प्लिमेंट्री पास के कथित गलत इस्तेमाल का आरोप हैं।
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विस्तार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को मेसी के कार्यक्रम में हुए हंगामे और कथित कुप्रबंधन से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को पुलिस की सख्त कार्रवाई से मिली अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर तक बढ़ा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई लंबित रहने के बावजूद जांच एजेंसी अपनी जांच जारी रख सकती है और संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। बिस्वास की आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की याचिका पर अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। राज्य के एडवोकेट जनरल सुरोजित नाथ मित्रा ने कोर्ट के पिछले आदेश के मुताबिक दो रिपोर्ट पेश कीं। इनमें एक पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) की ओर से और दूसरी बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के कमिश्नर की ओर से दाखिल की गई थी। दोनों रिपोर्ट इस घटना की जांच से संबंधित थीं।
अरूप बिस्वास को कितने समय तक मिली सुरक्षा?
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने बिस्वास को पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से मिली अंतरिम सुरक्षा को 30 नवंबर या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, बढ़ा दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि बिस्वास की ओर से अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर 17 नवंबर को फिर से सुनवाई होगी।
क्या जांच एजेंसी अपनी कार्रवाई जारी रख सकती है?
जस्टिस भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि इस कोर्ट में मामला लंबित होने का यह मतलब नहीं है कि जांच एजेंसी मामले की चल रही जांच के संबंध में आगे की कार्रवाई नहीं कर सकती। एजेंसी अपने अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट के सामने रिपोर्ट भी दाखिल कर सकती है। बिस्वास की ओर से पेश वकीलों ने जस्टिस भट्टाचार्य को बताया कि उन्होंने कोर्ट के निर्देश के मुताबिक पुलिस के तीनों समन का पालन किया है और जांच के सिलसिले में पुलिस के सामने पेश हुए हैं।
हाई कोर्ट ने पहले बिस्वास को कब राहत दी थी?
हाई कोर्ट ने 10 जून को पूर्व खेल मंत्री को मेसी शो आयोजित करने वाली इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के मालिक शताद्रु दत्ता की ओर से दर्ज कराए गए मामले में किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी थी।
कोलकाता में मेसी का कार्यक्रम विवादों में क्यों आया?
बिस्वास को अंतरिम सुरक्षा देते समय कोर्ट ने इस बात पर अफसोस जताया था कि अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के इसी तरह के कार्यक्रम हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली जैसे तीन अन्य महानगरों में बिना किसी परेशानी के आयोजित किए गए, लेकिन कोलकाता में कार्यक्रम को सुचारू रूप से आयोजित नहीं किया जा सका। कोर्ट ने कहा था कि इस घटना से फुटबॉल के लिए मशहूर कोलकाता की छवि पर भी दाग लगा है। जस्टिस भट्टाचार्य ने 10 जून को बिधाननगर पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया था कि वह स्वतंत्र रूप से जांच करें कि 13 दिसंबर, 2025 को मेसी का कार्यक्रम ठीक से क्यों आयोजित नहीं हो सका। कोर्ट ने कमिश्नर को इस संबंध में रिपोर्ट भी सौंपने का निर्देश दिया था।
शताद्रु दत्ता ने अरूप बिस्वास पर क्या आरोप लगाए?
दत्ता ने बिस्वास पर जबरन वसूली और आपराधिक धमकी देने, आधिकारिक एवं राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करने तथा गलत तरीके से आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए मेसी कार्यक्रम के कॉम्प्लिमेंट्री टिकटों का कथित तौर पर अवैध तरीके से डायवर्जन, मोनेटाइजेशन और बिक्री करने का आरोप लगाया था।
शिकायत में कॉम्प्लिमेंट्री पास और एक्रेडिटेशन कार्ड को लेकर क्या कहा गया?
बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत में दत्ता ने आरोप लगाया था कि उन्हें बिस्वास को बड़ी संख्या में कॉम्प्लिमेंट्री पास, एक्रेडिटेशन कार्ड और क्लोज प्रॉक्सिमिटी पास सौंपने पड़े थे। शिकायत के मुताबिक, इन पास और कार्ड का कथित तौर पर गलत तरीके से वितरण कर आर्थिक लाभ हासिल किया गया। इतना ही नहीं इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के मालिक शताद्रु दत्ता को उस खराब तरीके से आयोजित कार्यक्रम के सिलसिले में गिरफ्तारी के बाद एक महीने से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा था।
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दत्ता को कब गिरफ्तार किया गया था?
दत्ता को 13 दिसंबर को साल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित मेसी के कार्यक्रम में कथित कुप्रबंधन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 19 जनवरी को उन्हें जमानत मिल गई थी।