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TMC की शहीद दिवस रैली पर हाईकोर्ट सख्त: ममता गुट को दी चेतावनी; भीड़ कैसे बनी पूर्व मुख्यमंत्री की मुसीबत?
Fri, 31 Jul 2026 09:06 PM IST
प्रशांत तिवारी
आईएएनएस, कोलकाता
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Fri, 31 Jul 2026 09:06 PM IST
सार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली में तय सीमा से अधिक भीड़ जुटाने और ट्रैफिक व्यवस्था बाधित करने के मामले में ममता बनर्जी गुट को चेतावनी दी है। अदालत ने साफ कहा कि भविष्य में उसके आदेशों की अनदेखी हुई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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ममता बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कोलकाता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के मूल लेकिन अल्पसंख्यक गुट को अदालत के आदेशों के उल्लंघन पर कड़ी चेतावनी दी। मामला 21 जुलाई को मध्य कोलकाता स्थित बिरला तारामंडल के सामने आयोजित 'शहीद दिवस' रैली से जुड़ा है, जहां अदालत द्वारा तय की गई प्रतिभागियों की अधिकतम सीमा का कथित रूप से पालन नहीं किया गया।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि रैली में शामिल लोगों की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक होने के आरोप बेहद गंभीर हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भविष्य में उसके निर्देशों का पूरी सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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याचिका में क्या आरोप लगाए गए थे?
पिछले सप्ताह कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अदालत द्वारा निर्धारित सीमा से कहीं अधिक लोगों को रैली में शामिल किया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इससे अदालत के आदेशों का उल्लंघन हुआ।
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ट्रैफिक व्यवस्था कैसे प्रभावित हुई?
याचिकाकर्ता के मुताबिक, रैली में जरूरत से ज्यादा भीड़ पहुंचने के कारण बिरला तारामंडल के सामने की दोनों लेन बंद करनी पड़ीं। जबकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि दो लेन में से एक लेन हर हाल में वाहनों की आवाजाही के लिए खुली रखी जाएगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने क्या टिप्पणी की?
यह मामला शुक्रवार दोपहर न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के अंत में अदालत ने प्रतिभागियों की तय सीमा का उल्लंघन और दोनों लेन बंद किए जाने पर गहरा खेद जताया।
भविष्य के लिए अदालत ने क्या चेतावनी दी?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में उसके आदेशों का उल्लंघन दोहराया गया तो न्यायालय को संबंधित पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
रैली की अनुमति किन शर्तों पर मिली थी?
शुरुआत में कोलकाता पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के ममता गुट को 21 जुलाई को मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड क्रॉसिंग स्थित सीईएससी हाउस के सामने पारंपरिक स्थल पर रैली आयोजित करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत ने रैली की अनुमति तो दी, लेकिन कुछ सख्त शर्तें भी लागू कीं।
हाईकोर्ट की मुख्य शर्तें क्या थीं?
अदालत ने दो प्रमुख शर्तें रखी थीं। पहली, रैली में प्रतिभागियों की संख्या 2,500 से अधिक नहीं होगी। दूसरी, बिरला तारामंडल के सामने की दो लेन में से एक लेन वाहनों के आवागमन के लिए हर समय खुली रखी जाएगी।
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आखिर विवाद क्यों खड़ा हुआ?
अदालत में पेश तथ्यों के अनुसार, रैली में शामिल लोगों की संख्या 2,500 की तय सीमा से काफी अधिक थी। इसके चलते बिरला तारामंडल के सामने की दोनों लेन बंद करनी पड़ीं, जिससे शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक में लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। इसी कथित उल्लंघन को लेकर हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी गुट को भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी जारी की।