CAPF: केंद्रीय बलों में पूर्व अर्धसैनिकों के 'शराब' कोटे पर मची रार, 6 की जगह 2 बोतल तो कहीं माँग रहे ‘रम’
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में रिटायर्ड कर्मियों को मिलने वाली 'शराब' पर रार मच गई है। किसी जगह पर एक केंद्रीय बल की कंटीन में दूसरे बल के पूर्व अर्धसैनिकों को शराब ही नहीं दी जा रही तो कहीं छह की जगह केवल दो ही बोतल मिल रही हैं। एक बल में रिटायर्ड कर्मियों से 'रम' एडवांस नहीं ली जाती तो दूसरे बल में रिटायर्ड कर्मियों से रम एडवांस जमा कराने के बाद ही 'शराब' मिल रही है। अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन का आरोप है कि सीएलएमएस (सेंट्रल लिकर मैनेजमेंट सिस्टम) द्वारा तय नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का आरोप है कि गांधीनगर बीएसएफ फ्रंटियर द्वारा पूर्व अर्धसैनिकों को शराब की सुविधा देने में तय नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। सीएलएमएस (सेंट्रल लिकर मैनेजमेंट सिस्टम) के लिए आईटीबीपी को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
इसके तहत किसी भी सुरक्षा बल का सदस्य कहीं पर भी अन्य सुरक्षा बलों की नजदीकी कंटीन से शराब ले सकता है। जहां तक गुजरात में रहने वाले बीएसएफ के पूर्व कर्मियों का सवाल है, फ्रंटियर हेडक्वार्टर गांधीनगर बीएसएफ अपने रिटायर्ड जवानों को मदिरा सुविधा प्रदान करता है। यहां पर अन्य सुरक्षा बलों (सीआरपीएफ, सीआईएसएफ आईटीबीपी, एसएसबी व असम राइफल) के रिटायर्ड कर्मियों को सीएलएमएस प्रणाली के तहत मिलने वाली शराब नहीं दी जाती। एसोसिएशन ने इसे सीएलएमएस नोडल एजेंसी 'आईटीबीपी' द्वारा जारी एसओपी का साफ तौर पर उल्लंघन बताया है।
अन्य सुरक्षा बलों के रिटायर्ड जवानों को शराब की सुविधा का लाभ दिलाने के लिए एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं पूर्व एडीजी (सीआरपीएफ) एचआर सिंह के नेतृत्व में 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मई में बीएसएफ फ्रंटियर हेडक्वार्टर गांधीनगर के डीआईजी से मुलाकात की थी। तब डीआईजी द्वारा प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया गया था कि अन्य सुरक्षा बलों के रिटायर्ड जवानों को शराब की सुविधा प्रदान करने को लेकर विचार विमर्श चल रहा है। इस सम्बंध में डीजी आईटीबीपी जो कि सीएलएमएस नोडल एजेंसी के चेयरमैन हैं, को एक जून को ईमेल भेजी गई। उसमें कहा गया कि गुजरात में रहने वाले अन्य सुरक्षा बलों के रिटायर्ड जवानों को शराब का तय कोटा दिया जाए।
महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, फ्रंटियर हेडक्वार्टर गांधीनगर, मेहसाणा, भुज व अन्य बीएसएफ कैम्पस में अपने रिटायर्ड कर्मियों को मात्र दो बोतल प्रति महीने का कोटा देते हैं, जबकि छह बोतल देने का प्रावधान है। यहां पर सिपाही और हवलदार के पद से रिटायर हुए जवानों की बात हो रही है। दूसरा भेदभाव यह हो रहा है कि शराब की बोतल देने से पहले आईटीबीपी अपने रिटायर्ड कर्मियों से रम एडवांस नहीं लेता, जबकि सीआरपीएफ अपने रिटायर्ड कर्मियों से रम एडवांस जमा कराने के बाद ही शराब का कोटा जारी करता है। ऐसे में बल के वेलफेयर फंड पर भी सवाल खड़ा होता है। वीर प्रहरी फाउंडेशन गुजरात के महासचिव जितेंद्र सिंह चौहान द्वारा इस बाबत 9 सितंबर को आईजी बीएसएफ फ्रंटियर हेडक्वार्टर गांधीनगर को तीन पेज की चिठ्ठी लिखकर सीआईएसएफ जवानों को शराब की सुविधा प्रदान करने की मांग की गई है।