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अध्ययन: सदी के अंत तक जंगलों में 97 फीसदी तक बढ़ सकता है कार्बन भंडारण, वैज्ञानिकों ने रिसर्च में किया दावा
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 27 Apr 2026 07:03 AM IST
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सार
एक अध्ययन के अनुसार भारत के जंगल इस सदी के अंत तक कार्बन भंडारण क्षमता लगभग दोगुनी कर सकते हैं। बढ़ती बारिश और CO2 स्तर इसकी वजह हैं, लेकिन वनों की कटाई, आग, सूखा और जलवायु जोखिम इस बढ़त को अस्थिर बना सकते हैं, खासकर सूखे क्षेत्रों में इसका ज्यादा असर दिखेगा।
जंगल
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
भारत के जंगल इस सदी के अंत तक कार्बन भंडारण के मामले में लगभग दोगुनी क्षमता तक पहुंच सकते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह पूरी तरह राहत की खबर नहीं है, क्योंकि जंगलों की कटाई, वनाग्नि, सूखा, कीटों का हमला और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अन्य जोखिम इस बढ़त को अस्थिर बना सकते हैं।
एनवायरनमेंटल रिसर्च क्लाइमेट पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार बारिश में वृद्धि और वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड यानी सीओ2 की बढ़ती मात्रा जंगलों में पेड़ों की वृद्धि तेज कर सकती है, जिससे कार्बन संग्रहण बढ़ेगा। सबसे अधिक वृद्धि राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में दर्ज हो सकती है। भारतीय शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह समझने की कोशिश की कि बदलती जलवायु का भारत के जंगलों पर भविष्य में क्या प्रभाव पड़ेगा। अध्ययन के अनुसार, अलग-अलग जलवायु परिदृश्यों में कार्बन भंडारण की वृद्धि अलग-अलग होगी। यदि प्रदूषण कम रहता है, तो जंगलों में कार्बन भंडारण लगभग 35 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। मध्यम स्तर के प्रदूषण की स्थिति में यह वृद्धि 62 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं, यदि उत्सर्जन बहुत अधिक रहा तो यह बढ़ोतरी 97 प्रतिशत तक जा सकती है।
शोध में कहा गया है कि 2030 तक लगभग सभी परिदृश्यों में समान प्रकार की वृद्धि दिखाई देती है, लेकिन 2050 के बाद अंतर तेजी से बढ़ने लगता है। वैज्ञानिकों ने इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए हैं। पहला कारण है वर्षा में वृद्धि। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के कई हिस्सों में अधिक बारिश की संभावना है। अधिक पानी मिलने से पेड़ों और पौधों की वृद्धि तेज हो सकती है। दूसरा कारण है वायुमंडल में सीओ2 की बढ़ती मात्रा। अधिक सीओ2 होने पर पौधे तेजी से प्रकाश संश्लेषण करते हैं। प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे सूर्य के प्रकाश की मदद से अपना भोजन बनाते हैं। इससे उनकी वृद्धि तेज होती है और जंगलों में अधिक कार्बन जमा होता है।
सूखे इलाकों में ज्यादा असर
अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सबसे अधिक कार्बन वृद्धि घने जंगलों वाले क्षेत्रों में नहीं, बल्कि सूखे और अर्ध-शुष्क इलाकों में होने की संभावना है।राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में कार्बन भंडारण 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ सकता है। इसके विपरीत पश्चिमी घाट और हिमालय जैसे क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है।वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका कारण यह है कि ये क्षेत्र पहले से ही घने और संतुलित जंगलों वाले हैं, जहां विस्तार की गुंजाइश सीमित है।
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एनवायरनमेंटल रिसर्च क्लाइमेट पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार बारिश में वृद्धि और वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड यानी सीओ2 की बढ़ती मात्रा जंगलों में पेड़ों की वृद्धि तेज कर सकती है, जिससे कार्बन संग्रहण बढ़ेगा। सबसे अधिक वृद्धि राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में दर्ज हो सकती है। भारतीय शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह समझने की कोशिश की कि बदलती जलवायु का भारत के जंगलों पर भविष्य में क्या प्रभाव पड़ेगा। अध्ययन के अनुसार, अलग-अलग जलवायु परिदृश्यों में कार्बन भंडारण की वृद्धि अलग-अलग होगी। यदि प्रदूषण कम रहता है, तो जंगलों में कार्बन भंडारण लगभग 35 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। मध्यम स्तर के प्रदूषण की स्थिति में यह वृद्धि 62 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं, यदि उत्सर्जन बहुत अधिक रहा तो यह बढ़ोतरी 97 प्रतिशत तक जा सकती है।
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शोध में कहा गया है कि 2030 तक लगभग सभी परिदृश्यों में समान प्रकार की वृद्धि दिखाई देती है, लेकिन 2050 के बाद अंतर तेजी से बढ़ने लगता है। वैज्ञानिकों ने इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए हैं। पहला कारण है वर्षा में वृद्धि। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के कई हिस्सों में अधिक बारिश की संभावना है। अधिक पानी मिलने से पेड़ों और पौधों की वृद्धि तेज हो सकती है। दूसरा कारण है वायुमंडल में सीओ2 की बढ़ती मात्रा। अधिक सीओ2 होने पर पौधे तेजी से प्रकाश संश्लेषण करते हैं। प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे सूर्य के प्रकाश की मदद से अपना भोजन बनाते हैं। इससे उनकी वृद्धि तेज होती है और जंगलों में अधिक कार्बन जमा होता है।
सूखे इलाकों में ज्यादा असर
अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सबसे अधिक कार्बन वृद्धि घने जंगलों वाले क्षेत्रों में नहीं, बल्कि सूखे और अर्ध-शुष्क इलाकों में होने की संभावना है।राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में कार्बन भंडारण 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ सकता है। इसके विपरीत पश्चिमी घाट और हिमालय जैसे क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है।वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका कारण यह है कि ये क्षेत्र पहले से ही घने और संतुलित जंगलों वाले हैं, जहां विस्तार की गुंजाइश सीमित है।
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