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बजट 2024: इस साल भी जनगणना की संभावना नहीं, मंत्रियों के वेतन, राजकीय मेहमानों के मनोरंजन के लिए 1248.91 करोड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 23 Jul 2024 08:30 PM IST
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सार
केंद्रीय बजट 2024-24 में जनगणना के लिए 1,309.46 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो 2021-22 से काफी कम है और इस बात का संकेत है कि काफी देरी के बाद भी इस साल भी ये नहीं हो पाएगा। वहीं आतिथ्य व्यय के लिए 4 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो 2023-24 के बराबर है।
केंद्रीय बजट 2024-25
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
24 दिसंबर, 2019 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 8,754.23 करोड़ रुपये की लागत से भारत की 2021 की जनगणना कराने और 3,941.35 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। जनगणना का हाउस लिस्टिंग चरण और एनपीआर को अपडेट करने की कवायद 1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2020 तक पूरे देश में की जानी थी, लेकिन कोविड-19 के प्रकोप के कारण इसे स्थगित कर दिया गया।
जनगणना, NPR पर 12 हजार करोड़ खर्च होने की संभावना
उसके बाद से जनगणना का काम अभी भी रुका हुआ है और सरकार ने अभी तक नए कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है। अधिकारियों ने बताया कि इस साल आम चुनाव हो चुके हैं, इसलिए 2024 में जनगणना नहीं हो पाएगी। बजट 2024-25 के अनुसार, जनगणना सर्वेक्षण और सांख्यिकी के लिए 1,309.46 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि 2023-24 में यह 578.29 रुपये था। अधिकारियों ने बताया कि पूरी जनगणना और एनपीआर प्रक्रिया पर सरकार को 12,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की संभावना है।
यह प्रक्रिया, जब भी होगी, नागरिकों को स्वयं गणना करने का अवसर देने वाली पहली डिजिटल जनगणना होगी। एनपीआर उन नागरिकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है जो सरकारी गणनाकर्ताओं के माध्यम से जनगणना फॉर्म भरने के बजाय स्वयं भरने के अधिकार का प्रयोग करना चाहते हैं। इसके लिए जनगणना प्राधिकरण ने एक स्व-गणना पोर्टल तैयार किया है, जिसे अभी लॉन्च किया जाना है।
केंद्रीय मंत्रियों के वेतन, राज्य अतिथियों के स्वागत के लिए 12 सौ करोड़
वहीं 2024-25 के केंद्रीय बजट में मंत्रिपरिषद, कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से किए जाने वाले व्यय और राज्य अतिथियों के आतिथ्य के लिए 1,248.91 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बता दें कि ये आवंटित राशि 2023-24 में निर्धारित 1,803.01 करोड़ रुपये से काफी कम है। मंत्रिपरिषद के व्यय के लिए कुल 828.36 करोड़ रुपये दिए गए हैं। जो 2023-24 में 1,289.28 करोड़ रुपये था।
यह आवंटन कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और पूर्व प्रधानमंत्रियों के वेतन, आतिथ्य और अन्य भत्तों और यात्रा पर होने वाले व्यय के लिए है। इसमें वीवीआईपी के लिए विशेष अतिरिक्त सत्र उड़ान संचालन का प्रावधान भी शामिल है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को 202.10 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 2023-24 में यह 299.30 करोड़ रुपये था। यह राशि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के प्रशासनिक व्यय और अंतरिक्ष कार्यक्रम को पूरा करने के लिए है।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय को कुल 72.11 करोड़ रुपये (2023-24 में 76.20 करोड़ रुपये) दिए गए हैं। यह प्रावधान प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के प्रशासनिक व्यय को पूरा करने के लिए है। वहीं रासायनिक हथियार सम्मेलन (सीडब्ल्यूसी) के प्रशासनिक व्यय को पूरा करने के लिए कैबिनेट सचिवालय को 2023-24 में 70.28 करोड़ रुपये के मुकाबले 75.24 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
आतिथ्य व्यय के लिए 4 करोड़ रुपये
यह प्रावधान विदेशी राजकीय अतिथियों के सरकारी आतिथ्य और मनोरंजन, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से राष्ट्रपति भवन में आयोजित आधिकारिक मनोरंजन, राष्ट्रीय दिवसों पर स्वागत, अलंकरण और परिचय पत्र प्रस्तुत करने के समारोहों आदि पर व्यय के लिए है। जबकि बजट में पूर्व राज्यपालों को सचिवालय सहायता के भुगतान पर व्यय के लिए 1.80 करोड़ रुपये (2023-24 में 1.30 करोड़ रुपये) आवंटित किए गए हैं।
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जनगणना, NPR पर 12 हजार करोड़ खर्च होने की संभावना
उसके बाद से जनगणना का काम अभी भी रुका हुआ है और सरकार ने अभी तक नए कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है। अधिकारियों ने बताया कि इस साल आम चुनाव हो चुके हैं, इसलिए 2024 में जनगणना नहीं हो पाएगी। बजट 2024-25 के अनुसार, जनगणना सर्वेक्षण और सांख्यिकी के लिए 1,309.46 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि 2023-24 में यह 578.29 रुपये था। अधिकारियों ने बताया कि पूरी जनगणना और एनपीआर प्रक्रिया पर सरकार को 12,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की संभावना है।
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यह प्रक्रिया, जब भी होगी, नागरिकों को स्वयं गणना करने का अवसर देने वाली पहली डिजिटल जनगणना होगी। एनपीआर उन नागरिकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है जो सरकारी गणनाकर्ताओं के माध्यम से जनगणना फॉर्म भरने के बजाय स्वयं भरने के अधिकार का प्रयोग करना चाहते हैं। इसके लिए जनगणना प्राधिकरण ने एक स्व-गणना पोर्टल तैयार किया है, जिसे अभी लॉन्च किया जाना है।
केंद्रीय मंत्रियों के वेतन, राज्य अतिथियों के स्वागत के लिए 12 सौ करोड़
वहीं 2024-25 के केंद्रीय बजट में मंत्रिपरिषद, कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से किए जाने वाले व्यय और राज्य अतिथियों के आतिथ्य के लिए 1,248.91 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बता दें कि ये आवंटित राशि 2023-24 में निर्धारित 1,803.01 करोड़ रुपये से काफी कम है। मंत्रिपरिषद के व्यय के लिए कुल 828.36 करोड़ रुपये दिए गए हैं। जो 2023-24 में 1,289.28 करोड़ रुपये था।
यह आवंटन कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और पूर्व प्रधानमंत्रियों के वेतन, आतिथ्य और अन्य भत्तों और यात्रा पर होने वाले व्यय के लिए है। इसमें वीवीआईपी के लिए विशेष अतिरिक्त सत्र उड़ान संचालन का प्रावधान भी शामिल है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को 202.10 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 2023-24 में यह 299.30 करोड़ रुपये था। यह राशि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के प्रशासनिक व्यय और अंतरिक्ष कार्यक्रम को पूरा करने के लिए है।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय को कुल 72.11 करोड़ रुपये (2023-24 में 76.20 करोड़ रुपये) दिए गए हैं। यह प्रावधान प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के प्रशासनिक व्यय को पूरा करने के लिए है। वहीं रासायनिक हथियार सम्मेलन (सीडब्ल्यूसी) के प्रशासनिक व्यय को पूरा करने के लिए कैबिनेट सचिवालय को 2023-24 में 70.28 करोड़ रुपये के मुकाबले 75.24 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
आतिथ्य व्यय के लिए 4 करोड़ रुपये
यह प्रावधान विदेशी राजकीय अतिथियों के सरकारी आतिथ्य और मनोरंजन, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से राष्ट्रपति भवन में आयोजित आधिकारिक मनोरंजन, राष्ट्रीय दिवसों पर स्वागत, अलंकरण और परिचय पत्र प्रस्तुत करने के समारोहों आदि पर व्यय के लिए है। जबकि बजट में पूर्व राज्यपालों को सचिवालय सहायता के भुगतान पर व्यय के लिए 1.80 करोड़ रुपये (2023-24 में 1.30 करोड़ रुपये) आवंटित किए गए हैं।