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पीएम मोदी का वीडियो हटाना मेटा को पड़ा भारी: सरकार ने कंपनी की ग्लोबल टीम को किया तलब, दी कौन सी सलाह?
Tue, 04 Aug 2026 01:20 PM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 04 Aug 2026 01:20 PM IST
सार
पीएम मोदी का फेसबुक वीडियो हटाए जाने के मामले को लेकर केंद्र सरकार ने मेटा से जवाब तलब किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी की वैश्विक टीम को भारत बुलाकर पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण देने को कहा है। सरकार का कहना है कि बड़े डिजिटल मंचों को अपने तकनीकी सिस्टम की विश्वसनीयता सुनिश्चित करनी चाहिए।
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मेटा ने हटाया था पीएम मोदी का वीडियो
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो हटाए जाने के मामले पर केंद्र सरकार ने मेटा के अधिकारियों को तलब किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने मंगलवार को बताया कि सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को 5-6 अगस्त को भारत बुलाया है। उन्होंने कहा कि मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों को यह पक्का करना चाहिए कि उनके सिस्टम उम्मीद के मुताबिक काम करें।
इससे पहले सोमवार को यह मामले पर संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति की बैठक में भी उठाया गया। समिति ने मेटा के अधिकारियों से इस मामले में जवाब मांगा और वीडियो हटाने की वजह पर कड़े सवाल किए। मेटा ने बैठक में स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री का वीडियो गलती से हट गया था और इसके लिए माफी भी मांगी। हालांकि, समिति के कई सदस्यों ने कहा कि केवल माफी से बात खत्म नहीं होगी और इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
संसद की स्थायी समिति के सामने मेटा ने दिया था क्या जवाब?
सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता में हुई। बैठक का मुख्य विषय सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन पर चर्चा था। इसमें गूगल, मेटा, यूट्यूब, एक्स, स्नैपचैट, गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो हटाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मेटा ने कहा कि वीडियो तकनीकी त्रुटि के कारण हटा था और बाद में उसे बहाल कर दिया गया।
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निशिकांत दुबे ने की थी क्या मांग?
सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने जैसी घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को स्वयं इस मामले में माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कंपनी ऐसा नहीं करती है तो भारत में उसे मिली 'सेफ हार्बर' सुरक्षा पर पुनर्विचार होना चाहिए। उनका कहना था कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों को भारतीय कानूनों और जवाबदेही के दायरे में रहकर काम करना होगा।
सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर सवाल क्यों उठे?
'सेफ हार्बर' एक कानूनी सुरक्षा है, जिसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं द्वारा डाली गई सामग्री के लिए कुछ शर्तों के साथ सीमित कानूनी संरक्षण मिलता है। निशिकांत दुबे ने कहा कि अगर कोई डिजिटल मंच अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से पालन नहीं करता या गंभीर मामलों में लापरवाही बरतता है, तो इस सुरक्षा की समीक्षा की जा सकती है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही पर बहस और तेज हो गई है।
समिति ने मेटा से कौन-कौन से सवाल पूछे?
बैठक के दौरान समिति के कई सदस्यों ने मेटा के अधिकारियों से कड़े सवाल किए। सदस्यों ने कहा कि मामला केवल माफी मांगने तक सीमित नहीं रह सकता। उन्होंने पूछा कि वीडियो हटाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। कुछ सदस्यों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की। इसके अलावा मेटा से यह भी पूछा गया कि उसके प्लेटफॉर्म पर मौजूद विवादित और आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ कंपनी ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और ऐसे मामलों में उसकी जवाबदेही क्या है।
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इससे पहले सोमवार को यह मामले पर संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति की बैठक में भी उठाया गया। समिति ने मेटा के अधिकारियों से इस मामले में जवाब मांगा और वीडियो हटाने की वजह पर कड़े सवाल किए। मेटा ने बैठक में स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री का वीडियो गलती से हट गया था और इसके लिए माफी भी मांगी। हालांकि, समिति के कई सदस्यों ने कहा कि केवल माफी से बात खत्म नहीं होगी और इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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संसद की स्थायी समिति के सामने मेटा ने दिया था क्या जवाब?
सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता में हुई। बैठक का मुख्य विषय सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन पर चर्चा था। इसमें गूगल, मेटा, यूट्यूब, एक्स, स्नैपचैट, गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो हटाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मेटा ने कहा कि वीडियो तकनीकी त्रुटि के कारण हटा था और बाद में उसे बहाल कर दिया गया।
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निशिकांत दुबे ने की थी क्या मांग?
सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने जैसी घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को स्वयं इस मामले में माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कंपनी ऐसा नहीं करती है तो भारत में उसे मिली 'सेफ हार्बर' सुरक्षा पर पुनर्विचार होना चाहिए। उनका कहना था कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों को भारतीय कानूनों और जवाबदेही के दायरे में रहकर काम करना होगा।
सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर सवाल क्यों उठे?
'सेफ हार्बर' एक कानूनी सुरक्षा है, जिसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं द्वारा डाली गई सामग्री के लिए कुछ शर्तों के साथ सीमित कानूनी संरक्षण मिलता है। निशिकांत दुबे ने कहा कि अगर कोई डिजिटल मंच अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से पालन नहीं करता या गंभीर मामलों में लापरवाही बरतता है, तो इस सुरक्षा की समीक्षा की जा सकती है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही पर बहस और तेज हो गई है।
समिति ने मेटा से कौन-कौन से सवाल पूछे?
बैठक के दौरान समिति के कई सदस्यों ने मेटा के अधिकारियों से कड़े सवाल किए। सदस्यों ने कहा कि मामला केवल माफी मांगने तक सीमित नहीं रह सकता। उन्होंने पूछा कि वीडियो हटाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। कुछ सदस्यों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की। इसके अलावा मेटा से यह भी पूछा गया कि उसके प्लेटफॉर्म पर मौजूद विवादित और आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ कंपनी ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और ऐसे मामलों में उसकी जवाबदेही क्या है।