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पुरी रथ यात्रा में टूटी सदियों पुरानी परंपरा?: बिना 'ताहिया' के रथ पर पहुंचे भगवान जगन्नाथ, मचा सियासी बवाल

Sat, 18 Jul 2026 10:05 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 18 Jul 2026 10:05 AM IST
सार

पुरी रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक पुष्प मुकुट 'ताहिया' के बिना रथ तक ले जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मंदिर प्रशासन और सेवायतों ने बारिश तथा सुरक्षा कारणों का हवाला दिया, जबकि बीजेडी और कांग्रेस ने इसे सदियों पुरानी परंपरा से छेड़छाड़ बताते हुए भाजपा सरकार से माफी की मांग की और ओड़िया अस्मिता पर आघात करार दिया।

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Centuries old tradition broken Puri Rath Yatra Lord Jagannath reached chariot without Tahiya sparking uproar
पुरी रथयात्रा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ओडिशा के पुरी में आयोजित विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ की 'पाहंडी' (मंदिर से रथ तक ले जाने की पारंपरिक शोभायात्रा) में सदियों पुरानी परंपरा से अलग एक घटना ने विवाद खड़ा कर दिया। इस बार भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक पुष्प मुकुट 'ताहिया' के बिना ही मंदिर से बाहर लाकर रथ तक पहुंचाया गया। इस घटना को लेकर बीजू जनता दल (बीजेडी) और कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताया है।

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बारिश बनी वजह या परंपरा से समझौता?
यह घटना गुरुवार को उस समय हुई, जब 12वीं शताब्दी के श्रीजगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ को 'ताहिया' के बिना बाहर लाया गया। 'ताहिया' फूलों से बना पारंपरिक मुकुट होता है, जो भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पाहंडी यात्रा की विशेष पहचान माना जाता है। हालांकि, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने-अपने ताहिया के साथ ही रथ तक पहुंचे।
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मंदिर प्रशासन ने क्या सफाई दी?
श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) का कहना है कि भगवान जगन्नाथ का ताहिया तेज बारिश के कारण भीगकर काफी भारी हो गया था। इसलिए मंदिर की 'बैसी पहाचा' (22 सीढ़ियों) पर ही सेवायतों ने उसे हटा दिया, ताकि भगवान की रथ यात्रा में किसी तरह की देरी न हो।
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फिर मंदिर प्रशासन ने अपना रुख क्यों बदला?
विवाद बढ़ने और मामला राजनीतिक रंग लेने के बाद एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने कहा कि ताहिया पहनाना या हटाना पूरी तरह सेवायतों का निर्णय होता है। मंदिर प्रशासन केवल पूरी व्यवस्था की निगरानी करता है और इस मामले में उसने कोई निर्देश जारी नहीं किया था। उन्होंने बताया कि कई सेवायतों का मानना है कि ताहिया के बिना पाहंडी निकालने से धार्मिक परंपरा या उसकी पवित्रता पर कोई असर नहीं पड़ता।

विपक्ष ने सफाई को क्यों नकार दिया?
बीजेडी और कांग्रेस ने मंदिर प्रशासन की दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनका कहना है कि रथ यात्रा हर वर्ष बारिश के मौसम में ही होती है और अतीत में कभी भी भगवान जगन्नाथ को बिना ताहिया के बाहर नहीं लाया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि भगवान जगन्नाथ का बिना ताहिया के श्रद्धालुओं के सामने आना करोड़ों भक्तों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।

बीजेडी ने सरकार से माफी क्यों मांगी?
बीजेडी की वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने कहा कि भगवान जगन्नाथ ओडिशा की अस्मिता और करोड़ों ओड़िया लोगों की आस्था के केंद्र हैं। उन्हें बिना ताहिया के नंदीघोष रथ तक ले जाना गंभीर चूक है और राज्य सरकार को इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि उस समय मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्य के मंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे।

बीजेडी ने और कौन से आरोप लगाए?
प्रमिला मलिक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने एक और परंपरा को भी तोड़ा। उनके अनुसार, इस बार रथों को सूर्यास्त के बाद भी खींचा गया, जो पारंपरिक व्यवस्था के विपरीत है। उन्होंने इसे ओडिशा की संस्कृति और पहचान पर आघात बताया।

कांग्रेस ने भाजपा पर क्या हमला बोला?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले 'ओड़िया अस्मिता' की रक्षा का वादा किया था, लेकिन अब वही सरकार धार्मिक संस्थाओं की पवित्रता बनाए रखने में विफल साबित हो रही है।

सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार ने गुरुवार को कहा कि खराब मौसम और देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद रथ यात्रा का आयोजन शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

सेवायतों ने ताहिया हटाने का क्या कारण बताया?
दैतापति निजोग के सचिव रामकृष्ण दासमहापात्र ने कहा कि ताहिया पूरी तरह भीगकर काफी भारी हो गया था। यदि उसे नहीं हटाया जाता तो भगवान जगन्नाथ को रथ तक पहुंचाने में अनावश्यक देरी होती।


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क्या सुरक्षा भी एक वजह थी?
एक अन्य सेवायत बिनायक दासमहापात्र ने बताया कि ताहिया में इस्तेमाल होने वाली नुकीली बांस की पतली छड़ियां पाहंडी के दौरान सेवायतों की आंखों में चुभ रही थीं। इसी कारण उसे हटाने का निर्णय लिया गया, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से पूरी हो सके।

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