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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, एसआईटी से मांगी है स्टेटस रिपोर्ट

Sat, 18 Jul 2026 01:12 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 18 Jul 2026 01:12 PM IST
सार

राम मंदिर चंदा चोरी से जुड़ी चार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 20 जुलाई को सुनवाई करेगा। अदालत ने पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जवाब तलब किया है।

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Ram Mandir offering theft case Supreme Court to hear matter on July 20 seeks status report from SIT
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट 20 जुलाई को अयोध्या स्थित राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट की 20 जुलाई की कॉज़ लिस्ट के अनुसार, इस मुद्दे से जुड़ी चार अलग-अलग याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ सुनवाई करेगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या निर्देश दिए थे?
13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी और मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को अदालत के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही पीठ ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी कर इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा था।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की थी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चूंकि कुछ रिट याचिकाओं में यह कहा गया है कि कुछ एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं और मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया है, इसलिए हम उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी को इस न्यायालय के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हैं।
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सीएजी ऑडिट की मांग क्यों उठी है?
इस मामले के एक याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने की भी मांग की है। यह ट्रस्ट राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़े वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों का प्रबंधन करता है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने कहा है कि मंदिर ट्रस्ट के कामकाज, प्रशासन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और अन्य कथित गैरकानूनी गतिविधियों की जांच सीबीआई के नेतृत्व वाली बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) एसआईटी से कराई जानी चाहिए।

आरजेडी सांसद की याचिका में क्या मांग की गई है?
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग के अलावा, आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर तीसरी याचिका में ट्रस्ट के पूरे वित्तीय रिकॉर्ड का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। 'हिंदू धर्म परिषद' की ओर से दायर एक अन्य याचिका में इन आरोपों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।


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उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन कब किया था?
13 जून को राम मंदिर में मिले दान के कथित दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। इस एसआईटी में लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं।
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