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Explainer: सोनम वांगचुक का आंदोलन और अनशन से कितना पुराना नाता, शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कर चुके?

Sat, 18 Jul 2026 02:53 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Sat, 18 Jul 2026 02:53 PM IST
सार

शिक्षा सुधार से लेकर पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के अधिकारों की लड़ाई तक, सोनम वांगचुक पिछले तीन दशक से लगातार सक्रिय रहे हैं। लेकिन आखिर वह कौन हैं, उनके प्रमुख नवाचार क्या हैं और किन-किन आंदोलनों के कारण वे चर्चा में रहे? आइए जानते हैं...

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Sonam Wangchuk's Long History of Protests, What Has He Done to Reform India's Education System?
सोनम वांगचुक - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को आज सुबह दिल्ली पुलिस उठाकर अस्पताल ले गई। वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल थे। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सोनम पिछले तीन दशक से अधिक समय से शिक्षा, पर्यावरण और लद्दाख के अधिकारों के लिए काम करते रहे हैं। 
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ऐसे में सवाल उठता है कि सोनम वांगचुक कौन हैं? कब-कब और किन वजहों से चर्चा में आए? उन्हें किन कार्यों के लिए जाना जाता है? इस अनशन से पहले कौन से आंदोलन कर चुके हैं? उनके नाम के साथ 3 इडियट्स फिल्म की चर्चा क्यों होती है? आइये जानते हैं...
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कौन हैं सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक का जन्म 1966 में लद्दाख के लेह जिले के नदी किनारे बसे गांव उलेयटोकपो में हुआ था। उस समय उनके गांव में कोई स्कूल नहीं था, इसलिए उनकी शुरुआती पढ़ाई उनकी मां ने घर पर ही कराई। बाद में उन्होंने तत्कालीन रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, श्रीनगर (अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-एनआईटी श्रीनगर) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद वांगचुक ने नौकरी करने के बजाय लद्दाख की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए काम शुरू किया और 1988 में स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की स्थापना की। उस समय लद्दाख के सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद खराब थी। लगभग 95 प्रतिशत छात्र सरकारी परीक्षाओं में असफल हो जाते थे। वांगचुक ने इन छात्रों को पढ़ाना शुरू किया, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि केवल कोचिंग से समस्या हल नहीं होगी। इसलिए उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार का अभियान शुरू किया।

Sonam Wangchuk's Long History of Protests, What Has He Done to Reform India's Education System?
सोनम वांगचुक - फोटो : Amar Ujala

सोनम को किन कार्यक्रमों ने बदली तस्वीर? 

रेमन मैग्सेसे की वेबसाइट के अनुसार, 1994 में सोनम वांगचुक के नेतृत्व में ऑपरेशन न्यू होप शुरू किया गया। यह सरकार, गांवों और नागरिक समाज की साझेदारी वाला शिक्षा सुधार कार्यक्रम था।

इस कार्यक्रम के तहत;
  • गांवों में शिक्षा समितियां बनाई गईं।
  • शिक्षकों को बच्चों के अनुकूल और गतिविधि आधारित शिक्षा का प्रशिक्षण दिया गया।
  • लद्दाख की स्थानीय परिस्थितियों और संस्कृति के अनुसार नई किताबें तैयार की गईं।
  • अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा दिया गया और स्थानीय भाषा लद्दाखी को भी महत्व मिला।
  • गांव के लोगों को स्कूलों की जिम्मेदारी में भागीदार बनाया गया।
  • इस मॉडल को पहले एक गांव में लागू किया गया, फिर 33 स्कूलों तक विस्तार मिला।
  • इसका असर भी दिखा। 1996 में जहां सरकारी परीक्षाओं में केवल पांच प्रतिशत छात्र सफल होते थे, वहीं 2015 तक सफलता दर बढ़कर 75 प्रतिशत पहुंच गई। 
  • इस दौरान लगभग 700 शिक्षकों और 1,000 से अधिक गांव शिक्षा समिति के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया।

फेल छात्रों के लिए बनाया अलग स्कूल

द नोबेल प्राइज की वेबसाइट के मुताबिक, सोनम वांगचुक ने उन छात्रों के लिए एसईसीएमओएल अल्टरनेटिव स्कूल की स्थापना की जो सरकारी परीक्षाओं में असफल हो चुके थे। इस स्कूल की सबसे खास बात यह है कि यहां प्रवेश के लिए अच्छे अंक नहीं, बल्कि परीक्षा में असफल होना ही पात्रता है। यहां छात्रों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि जीवन कौशल, नेतृत्व, उद्यमिता और सौर ऊर्जा जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

वांगचुक ने छात्रों के साथ मिलकर मिट्टी और स्थानीय सामग्री से ऐसे सौर ऊर्जा आधारित भवन बनाए जो बाहर का तापमान -15 डिग्री सेल्सियस होने पर भी अंदर लगभग 15 डिग्री सेल्सियस बनाए रखते हैं। 2005 में सोनम वांगचुक को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की प्राथमिक शिक्षा से जुड़ी नेशनल गवर्निंग काउंसिल का सदस्य नियुक्त किया गया।
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Sonam Wangchuk's Long History of Protests, What Has He Done to Reform India's Education System?
सोनम वांगचुक का नवाचार - फोटो : Amar Ujala

पानी की समस्या का समाधान बना 'आइस स्तूप'

जलवायु परिवर्तन के कारण लद्दाख में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे थे, जिससे खेती के लिए पानी की कमी होने लगी। इस समस्या का समाधान निकालते हुए सोनम वांगचुक ने आइस स्तूप विकसित किया।

इस तकनीक में सर्दियों के दौरान बहते पानी को विशाल शंकु (स्तूप) के रूप में जमा कर कृत्रिम ग्लेशियर बनाया जाता है। गर्मियों में यही बर्फ धीरे-धीरे पिघलती है और किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराती है।

उनकी टीम अब तक छह आइस स्तूप बना चुकी है, जिनमें लगभग तीन करोड़ लीटर पानी संग्रहित किया जा सकता है। इस तकनीक को हिमालय के कई अन्य क्षेत्रों और स्विट्जरलैंड तक साझा किया गया है।

शिक्षा से आगे पर्यावरण और नवाचार

  • वांगचुक ने लद्दाख की समस्याओं पर लगातार शोध किया और कई समाधान विकसित किए।
  • इनमें सोलर टेंट, लद्दाख के लिए एग्री-वोल्टाइक रोडमैप जैसी पहलें शामिल हैं।
  • 2018 में उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो के साथ हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेट लर्निंग (HIAL) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य अनुभव आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है।

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सोनम वांगचुक - फोटो : Amar Ujala

सोनम वांगचुक को कौन से सम्मान मिले हैं?

सोनम वांगचुक को शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक नवाचार के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।  उन्हें उनके प्रसिद्ध 'आइस स्तूप' प्रोजेक्ट के लिए 2016 में 'रोलेक्स अवॉर्ड्स फॉर एंटरप्राइज' से सम्मानित किया गया, जिसने जलवायु परिवर्तन के कारण लद्दाख में बढ़ते जल संकट का अभिनव समाधान पेश किया। 

इसके बाद 2018 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिसे अक्सर एशिया का सर्वोच्च सम्मान कहा जाता है। रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड फाउंडेशन ने उन्हें "लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार लाने वाले शिक्षा सुधारक" बताया है। 

Sonam Wangchuk's Long History of Protests, What Has He Done to Reform India's Education System?
सोनम वांगचुक - फोटो : Amar Ujala

क्या पहले भी अनशन कर चुके हैं सोनम वांगचुक? 

अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। शुरुआत में वांगचुक ने इस फैसले का स्वागत किया था। लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि लद्दाख को पर्याप्त लोकतांत्रिक अधिकार नहीं मिले हैं। इसके बाद उनका आंदोलन मुख्य रूप से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा दिलाने की मांग पर केंद्रित हो गया। छठी अनुसूची के तहत जनजातीय क्षेत्रों को प्रशासनिक, विधायी और न्यायिक मामलों में विशेष स्वायत्तता मिलती है।

जलवायु और लद्दाख के अधिकारों के लिए अनशन
2023 में सोनम वांगचुक ने दुनिया के सबसे ऊंचे दर्रों में शामिल खारदुंग ला पर जलवायु उपवास किया। इसका उद्देश्य लद्दाख के नाजुक पर्यावरण और वहां के लोगों के अधिकारों की रक्षा की मांग उठाना था। इसके बाद उन्होंने लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर आमरण अनशन का भी एलान किया।

2024: क्लाइमेट फास्ट, पश्मीना मार्च और दिल्ली पदयात्रा
मार्च 2024 में सोनम वांगचुक ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, क्षेत्र के पर्यावरण की सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों की मांग को लेकर 21 दिन का क्लाइमेट फास्ट किया। अनशन समाप्त होने के बाद उन्होंने अप्रैल 2024 में 'पश्मीना मार्च' की घोषणा की। इस मार्च का उद्देश्य चांगथांग क्षेत्र में पश्मीना बकरी पालने वाले चरवाहों के घटते चरागाहों, चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चरागाहों के नुकसान और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को उजागर करना था। हालांकि, प्रशासन की ओर से धारा 144 लागू किए जाने और अन्य प्रतिबंधों के कारण यह मार्च दो बार स्थगित करना पड़ा।

इसके बाद 1 सितंबर 2024 को वांगचुक ने अपने समर्थकों के साथ 'दिल्ली चलो पदयात्रा' शुरू की। यह यात्रा गांधी जयंती (2 अक्तूबर) पर राजघाट पहुंचने वाली थी। लेकिन 1 अक्तूबर को दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने वांगचुक और उनके साथ चल रहे 100 से अधिक पदयात्रियों को हिरासत में ले लिया।

Sonam Wangchuk's Long History of Protests, What Has He Done to Reform India's Education System?
सोनम वांगचुक - फोटो : Amar Ujala

कुछ समय पहले जेल भी तो जाना पड़ा था वो क्या मामला है?

सितंबर 2025 में सोनम वांगचुक ने लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण देने की मांग को लेकर अनशन किया। 24 सितंबर को लेह में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई, जिसमें पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को प्रशासन ने वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें जोधपुर केंद्रीय जेल भेजा गया। केंद्र सरकार ने उन पर सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने और युवाओं को भड़काने के आरोप लगाए।

वांगचुक पर विदेशी फंडिंग को लेकर क्या आरोप लगे? 

गृह मंत्रालय ने सितंबर 2025 में वांगचुक के संस्थान का विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) का पंजीकरण भी रद्द कर दिया।

सरकार के अनुसार;

  • वर्ष 2021-22 में संस्था के एफसीआरए खाते में 3.5 लाख रुपये नियमों के विपरीत जमा किए गए।
  • संस्था को स्वीडन के एक दानदाता से 4,93,205 रुपये मिले थे, जिनका उपयोग शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, प्रवासन, खाद्य सुरक्षा और संप्रभुता जैसे विषयों पर कार्यक्रमों के लिए किया जाना था।
  • सरकार का कहना था कि देश की संप्रभुता से जुड़े विषयों पर विदेशी धन स्वीकार करना राष्ट्रीय हित के खिलाफ है।

जेल चले गए तो फिर बाहर कैसे आए सोनम वांगचुक? 

मार्च 2026 में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप वापस ले लिए गए और वे लेह लौट आए। सोनम वांगचुक खुद को गांधीवादी मानते हैं और अहिंसक आंदोलनों व लंबे उपवासों को अपना प्रमुख माध्यम बताते हैं। वे कई बार कह चुके हैं कि उनके 21 दिन के उपवास महात्मा गांधी के सबसे लंबे 21 दिन के उपवास से प्रेरित है।

3 इडियट्स फिल्म के साथ उनका नाम क्यों जुड़ता है?

फिल्म 3 इडियट्स के 'फुंसुख वांगड़ू' और सोनम वांगचुक के बीच समानताओं के चलते वर्षों से दोनों को जोड़ा जाता रहा है। हालांकि, मौजूदा आंदोलन के दौरान ही लंदन भारतीय फिल्म महोत्सव में आमिर खान ने पहली बार कहा कि यह किरदार सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था। उनके मुताबिक, 2009 में फिल्म बनाते समय वह, निर्देशक राजकुमार हिरानी और लेखक अभिजात जोशी सोनम वांगचुक से परिचित नहीं थे।

हालांकि, उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर हो रहा है। वीडियो 2008 का बताया जा रहा है। इस वीडियो में सोनम वांगचुक मंच से वहां मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे हैं। सामने जो लोग मौजूद हैं उनमें आमिर खान भी नजर आ रहे हैं।

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