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चिकन नेक पर दिल्ली की पैनी नजर: शाह के बंगाल दौरे पर ढाका-चीन की निगाहें, सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा पर मंथन
Sat, 18 Jul 2026 03:34 PM IST
एन अर्जुन
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: एन अर्जुन
Updated Sat, 18 Jul 2026 03:34 PM IST
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गृह मंत्री अमित शाह
- फोटो : एएनआई
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ढाका और बीजिंग के बदलते रणनीतिक समीकरणों तथा तीस्ता परियोजना में चीन की बढ़ती भूमिका के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का उत्तर बंगाल दौरा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश की सामरिक जीवनरेखा कहे जाने वाले सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी 'चिकन नेक' की सुरक्षा को लेकर होने वाली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक पर जहां नई दिल्ली की पैनी नजर है, वहीं रणनीतिक और सुरक्षा हलकों के मुताबिक बांग्लादेश और चीन भी इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए हैं।
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उल्लेखनीय है कि हाल ही में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने उत्तर बंगाल में सैन्य तैयारियों, सुरक्षा स्थिति और परिचालन क्षमता की समीक्षा की थी। इसके कुछ ही दिनों बाद गृह मंत्री अमित शाह स्वयं उत्तर बंगाल पहुंचकर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), खुफिया एजेंसियों और नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीमा सुरक्षा, घुसपैठ, तस्करी और देश के सबसे संवेदनशील रणनीतिक गलियारों में शामिल चिकन नेक की सुरक्षा व्यवस्था पर मंथन कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञ इसे गृह मंत्री के कार्यकाल में सिलिगुड़ी कॉरिडोर को लेकर अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा समीक्षाओं में से एक मान रहे हैं। तीन दिवसीय दौरे पर शुक्रवार रात बागडोगरा पहुंचे शाह का भाजपा नेताओं ने स्वागत किया।
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सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा पर होगी चर्चा
करीब 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा सिलिगुड़ी कॉरिडोर भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाला एकमात्र स्थलीय संपर्क मार्ग है। पूर्वोत्तर के करीब 5.5 करोड़ लोगों की नागरिक आपूर्ति, सैन्य रसद, रेलवे नेटवर्क, राष्ट्रीय राजमार्ग और व्यापारिक गतिविधियां इसी गलियारे पर निर्भर हैं। इस कॉरिडोर के पश्चिम में नेपाल, उत्तर में भूटान और चीन की चुंबी घाटी, जबकि दक्षिण में बांग्लादेश स्थित है। यही वजह है कि इसे भारत का सबसे संवेदनशील भू-रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी संकट, सैन्य तनाव या बड़े व्यवधान का सीधा असर पूरे पूर्वोत्तर भारत पर पड़ सकता है।
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सूत्रों के मुताबिक, हाल के महीनों में क्षेत्रीय भू-राजनीतिक गतिविधियों ने नई दिल्ली की चिंताओं को बढ़ाया है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 24 जून 2026 को अपनी पहली विदेश यात्रा के तहत चीन का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की। रणनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना को लेकर हुई, जिस पर ढाका और बीजिंग के बीच महत्वपूर्ण सहमति बनी। भारत की ओर से पहले दिए गए प्रस्ताव के बावजूद परियोजना में चीन की बढ़ती भागीदारी को नई दिल्ली ने गंभीरता से लिया है।
सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चीन के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव और बांग्लादेश के साथ उसके मजबूत होते संबंधों के बीच भारत सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। ऐसे में गृह मंत्री का स्वयं उत्तर बंगाल पहुंचकर सीमा चौकियों का दौरा करना और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समीक्षा करना विशेष महत्व रखता है।
अमित शाह शनिवार को भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट जुमागाछ स्थित बीएसएफ की 18वीं बटालियन की सीमा चौकी का दौरा करेंगे। वह सीमा प्रहरियों के साथ संवाद करेंगे, सीमा सुरक्षा से जुड़े विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे तथा बाद में उत्तरकन्या में पश्चिम बंगाल की सीमा सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
बैठक में अवैध घुसपैठ, सीमा पार तस्करी, फर्जी दस्तावेज नेटवर्क, नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की हालिया उत्तर बंगाल यात्रा और उसके तुरंत बाद गृह मंत्री अमित शाह का दौरा इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार ने सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया है।
क्या है चिकन नेक?
सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जिसे सामरिक हलकों में "चिकन नेक" कहा जाता है, पश्चिम बंगाल के उत्तर में स्थित करीब 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा भू-भाग है। यह देश के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाला एकमात्र स्थलीय संपर्क मार्ग है। इसके पश्चिम में नेपाल, उत्तर में भूटान और चीन की चुंबी घाटी तथा दक्षिण में बांग्लादेश स्थित है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है
-पूर्वोत्तर के आठ राज्यों का देश के बाकी हिस्से से एकमात्र स्थलीय संपर्क मार्ग।
-भारतीय सेना की रसद और सैन्य आवाजाही के लिए रणनीतिक जीवनरेखा।
-राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे नेटवर्क और महत्वपूर्ण संचार ढांचा इसी क्षेत्र से गुजरता है।
-किसी भी व्यवधान का असर पूरे पूर्वोत्तर और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
-2017 के डोकलाम संकट के बाद इसका सामरिक महत्व और बढ़ गया है।
ढाका और बीजिंग की नजर क्यों?
-चुंबी घाटी की निकटता इस क्षेत्र को चीन के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
-बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हालिया चीन यात्रा ने क्षेत्रीय समीकरणों को नई दिशा दी है।
-तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना में चीन की बढ़ती भूमिका को भारत रणनीतिक दृष्टि से देख रहा है।
-सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलते क्षेत्रीय परिदृश्य में सिलिगुड़ी कॉरिडोर का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
-गृह मंत्री की यात्रा और सुरक्षा समीक्षा को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।