Skyroot Aerospace: विक्रम-1 की लॉन्चिंग पर क्या बोले के CEO और COO? इसरो प्रमुख ने बताए भारत के भविष्य के मिशन
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। देश की पहली निजी कंपनी द्वारा विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण किया गया। इस रॉकेट को हैदराबाद स्थित निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया है। पढ़ें, इस लॉन्च के बाद कंपनी के सीईओ-सीओओ और इसरो प्रमुख ने क्या कुछ कहा है...
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युवा टीम का कमाल: कार्बन कंपोजिट से बना है रॉकेट
स्काईरूट एयरोस्पेस के सीईओ और फाउंडर पवन कुमार चंदना ने इस सफलता पर भारी खुशी जताई। उन्होंने कहा, 'यह भारत में पहली बार हुआ है जब किसी प्राइवेट कंपनी ने खुद का रॉकेट बनाया, खुद का लॉन्च पैड तैयार किया और उड़ान भरी। यह पूरी दुनिया के स्पेस सेक्टर के लिए एक बेहद अहम पल है। हमें गर्व है कि हम इसे कर दिखाए। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस रॉकेट को बनाने वाली टीम की औसत उम्र सिर्फ 28 साल है। यह पूरा रॉकेट पूरी तरह से 'कार्बन कंपोजिट' से बना है जो इसे बेहद हल्का और मजबूत बनाता है'। कंपनी के सीओओ और को-फाउंडर नागा भरत डाका ने भी इसे एक मील का पत्थर बताते हुए कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास निजी स्तर पर कक्षा में रॉकेट भेजने की ताकत है।
#WATCH | Sriharikota, Andhra Pradesh: On the launch of India's first privately developed orbital-class rocket, Vikram-1, by Skyroot Aerospace, Pawan Kumar Chandana, CEO and Founder of Skyroot Aerospace, says, "... This is the first time that a private company in India has built… pic.twitter.com/yLvnUJ2OYS
— ANI (@ANI) July 18, 2026
#WATCH | Sriharikota, Andhra Pradesh: On the launch of India's first privately developed orbital-class rocket, Vikram-1, by Skyroot Aerospace, Naga Bharath Daka, COO and Co-founder of Skyroot Aerospace, says, "... This is a significant milestone... India has become the third… pic.twitter.com/P8dWWA1CxH
— ANI (@ANI) July 18, 2026
लॉन्च के दौरान आई तकनीकी दिक्कत, 35 मिनट में हुई दूर
इस ऐतिहासिक लॉन्चिंग के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि लॉन्च रुक सकता है। इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि जब ऑटोमैटिक लॉन्चिंग प्रक्रिया चल रही थी, तब ग्राउंड सिस्टम से रॉकेट के ऑनबोर्ड कंप्यूटर में कंट्रोल ट्रांसफर होते समय एक तकनीकी खराबी आ गई थी। हालांकि, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने बिना वक्त गंवाए सिर्फ 35 मिनट के भीतर इस समस्या को ठीक कर लिया और रॉकेट ने शानदार उड़ान भरी।
इसरो के आने वाले बड़े मिशन
इसरो प्रमुख ने देश के भविष्य के स्पेस प्रोजेक्ट्स को लेकर भी कई अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष विभाग को सरकार से कई नई मंजूरियां मिल चुकी हैं और इसरो इस समय निम्नलिखित बड़े मिशनों पर तेजी से काम कर रहा है। इसमें-
- चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5: चांद पर भारत के अगले बड़े खोजी अभियान।
- गगनयान: भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन, जिसके तहत पहले 'मानवरहित' रॉकेट की लॉन्चिंग की तैयारी चल रही है।
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन: भारत का अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने का प्रोजेक्ट।
- नया लॉन्च पैड: तमिलनाडु के कुलशेखरपट्टिनम में बन रहे नए लॉन्च पैड को इसी वित्तीय वर्ष के खत्म होने से पहले चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
#WATCH | Sriharikota, Andhra Pradesh: On the launch of India's first privately developed orbital-class rocket, Vikram-1, by Skyroot Aerospace, ISRO Chairman V Narayanan says, "So the initial glitch as it was explained when the automatic sequence was running and there was smooth… pic.twitter.com/5nV3XzapTG
— ANI (@ANI) July 18, 2026
140 करोड़ भारतीयों के लिए स्पेस रिफॉर्म जरूरी
इसरो चेयरमैन ने अंतरिक्ष क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए अगर हमें अंतरिक्ष के फायदों को पूरी तरह जमीन पर उतारना है, तो हमें बहुत बड़ी संख्या में सैटेलाइट्स की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार द्वारा स्पेस सेक्टर को खोलना और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना एक बेहतरीन और ऐतिहासिक फैसला साबित हो रहा है।