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ED: भक्तों को धोखा देने के लिए भोंदू बाबा ने खुद को बताया शिव का अवतार, लोगों की संपत्तियों पर किया हाथ साफ
Sat, 18 Jul 2026 03:33 PM IST
प्रशांत तिवारी
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sat, 18 Jul 2026 03:33 PM IST
सार
ईडी ने स्वयं को भगवान शिव का अवतार बताकर भक्तों से करोड़ों रुपये और संपत्ति ठगने वाले अशोक कुमार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। जांच में 36.90 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी है। आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
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ईडी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस ने मुंबई की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में अशोक कुमार एकनाथ खरात (उर्फ कैप्टन/भोंदू बाबा), उनकी पत्नी कल्पना खरात और चार अन्य लोगों के खिलाफ मनी-लॉन्ड्रिंग की शिकायत (पीसी) दर्ज की है। यह मामला पीएमएलए, 2002 की धारा 3 के तहत मनी-लॉन्ड्रिंग के अपराध से जुड़ा है। इसमें धारा 4 के तहत सजा का प्रावधान है। भोंदू बाबा ने भक्तों को धोखा देने के लिए खुद को भगवान शिव का अवतार बताया। लोगों के पैसे व संपत्ति पर हाथ साफ कर दिया।
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ईडी ने अब तक कितनी संपत्ति अटैच की?
ईडी ने इसी सप्ताह पीएमएलए, 2002 की धारा 5 के तहत आरोपी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद 19.20 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) किया है। यह उन संपत्तियों के अतिरिक्त है, जिन्हें अप्रैल और मई में जब्त किया गया था। उनकी कीमत 17.70 करोड़ रुपये थी। जांच एजेंसी ने आरोपी की कई जगहों पर छापा मारकर, बैंक लॉकरों और गाड़ियों की तलाशी के दौरान संपत्ति जब्त की थी। अब तक इस मामले में लगभग 36.90 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी है।
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भक्तों को किस तरह जाल में फंसाया गया?
ईडी ने सरकार वाडा, शिरडी, सिन्नर और राहाता पुलिस स्टेशनों में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। जांच से पता चला कि अशोक कुमार एकनाथ खरात ने भक्तों की धार्मिक आस्था का फायदा उठाया। बेईमानी से उन्हें 'अवतार पूजा' करने, बीमारियों को ठीक करने, दुर्भाग्य को टालने और व्यापार में तरक्की सुनिश्चित करने के बहाने पैसे और संपत्ति देने के लिए उकसाया। इस तरह उसने भक्तों से जबरन वसूली की। धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के जरिए जमकर कमाई की।
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मनी लॉन्ड्रिंग का नेटवर्क कैसे चलाया गया?
जांच में यह भी पता चला कि खरात ने भक्तों को धोखा देने के लिए खुद को दैवीय शक्तियों वाला और भगवान शिव का अवतार बताया। उसने दो सहकारी क्रेडिट सोसायटियों के ज़रिए अपराध से हुई कमाई को लॉन्डर किया। इसके लिए उसने एक कर्मचारी की मिलीभगत से कई खाते चलाए। बड़ी मात्रा में कैश जमा करने और बाद में निकालने (मैच्योरिटी की रकम सहित) के लिए कई बेनामी खातों का इस्तेमाल किया। लॉन्डर किए गए फंड को भरोसेमंद साथियों के पास रखा गया। इसके बाद आरोपी ने नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, पुणे और मुंबई में अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियों में निवेश किया। इससे पहले, ईडी ने मनी-लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए 19 मई को अशोक कुमार एकनाथ खरात को गिरफ्तार किया था। वह अभी भी न्यायिक हिरासत में है।