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US-India Partnership: अमेरिकी उपविदेश सचिव क्रिस्टोफर लैंडो भारत पहुंचे, रायसीना डायलॉग में होंगे शामिल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 03 Mar 2026 03:06 PM IST
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सार
अमेरिकी उपविदेश सचिव क्रिस्टोफर लैंडो तीन से छह मार्च तक भारत दौरे पर रहेंगे। वह रायसीना डायलॉग 2026 में अमेरिकी दल की अगुवाई करेंगे और अमेरिका फर्स्ट नीति को बढ़ावा देंगे। इस दौरान व्यापार, सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा होगी।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडो।
- फोटो : एक्स/@IndianEmbassyUS
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विस्तार
अमेरिका के उपविदेश सचिव क्रिस्टोफर लैंडो आज से चार दिनों की भारत यात्रा पर रहेंगे। वह तीन से छह मार्च तक नई दिल्ली में रुकेंगे। लैंडो भारत के सबसे बड़े भू-राजनीतिक मंच 'रायसीना डायलॉग 2026' में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस कार्यक्रम में वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगे।
अमेरिकी विदेश विभाग ने जानकारी दी है कि उपविदेश सचिव क्रिस्टोफर लैंडो नई दिल्ली में अमेरिकी दल का नेतृत्व करेंगे। वह राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों को मजबूती से रखेंगे। वह वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ जरूरी खनिजों और नशीली दवाओं की तस्करी रोकने पर द्विपक्षीय चर्चा करेंगे। वह अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में पहुंच बढ़ाने और आर्थिक रिश्तों को गहरा करने पर जोर देंगे। उनका मकसद एक स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा विजन को बढ़ावा देना है।
इनके साथ ही, दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक सचिव एस. पॉल कपूर भी 1 से 3 मार्च तक नई दिल्ली में हैं। अमेरिकी दूतावास ने बताया कि कपूर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और साझा हितों पर भारतीय अधिकारियों से बात कर रहे हैं। दूतावास का कहना है कि यह दौरा राष्ट्रपति ट्रंप के उस विजन का हिस्सा है, जो भारत और अमेरिका की साझेदारी को मजबूत और आपसी फायदे वाला बनाना चाहता है।
ये भी पढ़ें: TN Polls: डीएमके संग 32 सीटों की मांग पर फंसा पेंच, कांग्रेस की समयसीमा हो रही खत्म; अधर में गठबंधन का भविष्य
रायसीना डायलॉग भारत का सबसे प्रमुख रणनीतिक मंच बन चुका है। इसमें हर साल दुनिया के बड़े नेता, मंत्री और सुरक्षा विशेषज्ञ आते हैं। पिछले दस वर्षों में भारत और अमेरिका ने रक्षा और रणनीतिक सहयोग को काफी बढ़ाया है। दोनों देशों ने कई जरूरी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी साथ मिलकर काम किया है। इस सहयोग में अब जरूरी खनिज, नई तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषय भी शामिल हैं।
भारत का विदेश मंत्रालय और एक स्वतंत्र थिंक टैंक 'ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन' (ओआरएफ) मिलकर रायसीना डायलॉग 2026 का आयोजन कर रहे हैं। यह कार्यक्रम 5 से 7 मार्च तक चलेगा। इसकी शुरुआत साल 2016 में हुई थी। यह मंच सिंगापुर के 'शांगरी-ला डायलॉग' और म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन जैसा ही बड़ा है। इस सम्मेलन में अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विदेश मंत्री और कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। इसमें उद्योगपति, रक्षा विशेषज्ञ और शिक्षाविद भी हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बदलती वैश्विक राजनीति और आर्थिक सुरक्षा पर चर्चा करना है। इसमें एआई तकनीक, जलवायु परिवर्तन और ग्रीन एनर्जी जैसे मुद्दों पर भी बात होगी।
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अमेरिकी विदेश विभाग ने जानकारी दी है कि उपविदेश सचिव क्रिस्टोफर लैंडो नई दिल्ली में अमेरिकी दल का नेतृत्व करेंगे। वह राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों को मजबूती से रखेंगे। वह वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ जरूरी खनिजों और नशीली दवाओं की तस्करी रोकने पर द्विपक्षीय चर्चा करेंगे। वह अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में पहुंच बढ़ाने और आर्थिक रिश्तों को गहरा करने पर जोर देंगे। उनका मकसद एक स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा विजन को बढ़ावा देना है।
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इनके साथ ही, दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक सचिव एस. पॉल कपूर भी 1 से 3 मार्च तक नई दिल्ली में हैं। अमेरिकी दूतावास ने बताया कि कपूर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और साझा हितों पर भारतीय अधिकारियों से बात कर रहे हैं। दूतावास का कहना है कि यह दौरा राष्ट्रपति ट्रंप के उस विजन का हिस्सा है, जो भारत और अमेरिका की साझेदारी को मजबूत और आपसी फायदे वाला बनाना चाहता है।
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रायसीना डायलॉग भारत का सबसे प्रमुख रणनीतिक मंच बन चुका है। इसमें हर साल दुनिया के बड़े नेता, मंत्री और सुरक्षा विशेषज्ञ आते हैं। पिछले दस वर्षों में भारत और अमेरिका ने रक्षा और रणनीतिक सहयोग को काफी बढ़ाया है। दोनों देशों ने कई जरूरी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी साथ मिलकर काम किया है। इस सहयोग में अब जरूरी खनिज, नई तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषय भी शामिल हैं।
भारत का विदेश मंत्रालय और एक स्वतंत्र थिंक टैंक 'ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन' (ओआरएफ) मिलकर रायसीना डायलॉग 2026 का आयोजन कर रहे हैं। यह कार्यक्रम 5 से 7 मार्च तक चलेगा। इसकी शुरुआत साल 2016 में हुई थी। यह मंच सिंगापुर के 'शांगरी-ला डायलॉग' और म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन जैसा ही बड़ा है। इस सम्मेलन में अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विदेश मंत्री और कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। इसमें उद्योगपति, रक्षा विशेषज्ञ और शिक्षाविद भी हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बदलती वैश्विक राजनीति और आर्थिक सुरक्षा पर चर्चा करना है। इसमें एआई तकनीक, जलवायु परिवर्तन और ग्रीन एनर्जी जैसे मुद्दों पर भी बात होगी।
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