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CJP: प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई पर सीजेपी सख्त, पुलिसकर्मियों की पहचान के लिए बनाएंगे वेबसाइट; क्या है प्लान?

Fri, 24 Jul 2026 06:28 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 24 Jul 2026 06:28 PM IST
सार

संसद चलो मार्च के दौरान 20 जुलाई को हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बड़ा कदम उठाने का एलान किया है। इतना ही नहीं सीजेपी के पदाधिकारियों ने कि कैसे वो कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ एफआईआर और कानूनी कार्रवाई कराई करवाएंगे। आखिर CJP की पूरी योजना क्या है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
 

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CJP Launch Website to Identify Police Personnel Involved in July 20 Crackdown Seek Legal Action What is Plan
पुलिसकर्मियों की पहचान कर क्या कार्रवाई कराना चाहती है पार्टी? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कॉकरोज जनता पार्टी ने नई कानूनी रणनीति का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि वह एक समर्पित वेबसाइट शुरू करेगी, जहां प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई से जुड़े फोटो और वीडियो अपलोड कर सकेंगे। इन सामग्रियों की जांच के बाद कथित तौर पर कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ अदालत का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा। यह घोषणा पार्टी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में की।

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सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के दौरान छात्रों के साथ मारपीट की गई और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने छात्रों पर हमला किया, उन्हें घायल किया और युवा लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार किया, उन्हें पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है। हम चुप नहीं बैठेंगे। हमें सब कुछ याद रहेगा।उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे अपने पास मौजूद सभी फोटो और वीडियो वेबसाइट पर अपलोड करें, ताकि उनकी जांच कर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की पहचान की जा सके।

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वेबसाइट लॉन्च करने का उद्देश्य क्या?

सौरव दास ने कहा कि सीजेपी की टीम वेबसाइट पर अपलोड की गई तस्वीरों और वीडियो की बारीकी से जांच करेगी। इसके बाद जिन पुलिस अधिकारियों की पहचान होगी, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि हम वेबसाइट लॉन्च कर रहे हैं और सभी प्रदर्शनकारियों से अपील करते हैं कि जिन पुलिस अधिकारियों ने उन पर हमला किया, उनके फोटो और वीडियो अपलोड करें। हमारी टीम पूरे रिकॉर्ड की जांच करेगी और हर अधिकारी की पहचान करेगी। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।

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अगर एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो सीजेपी क्या करेगी?

सीजेपी ने साफ कहा कि यदि दिल्ली पुलिस संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करती है तो पार्टी अदालत का रुख करेगी। सौरव दास ने कहा कि देशभर के वकील उनकी मदद कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया, "हम अदालत से आदेश लेकर आएंगे कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। समय आने पर हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी जिम्मेदार लोग जेल जाएं। यह हमारा वादा है।" इसी के साथ तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने भी छात्रों और प्रदर्शनकारियों से 20 जुलाई की कार्रवाई से जुड़े फोटो, वीडियो और अन्य साक्ष्य भेजने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन साक्ष्यों की जांच कर संबंधित पुलिसकर्मियों की पहचान की जाएगी और कानूनी कार्रवाई में उनका उपयोग किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात में सीजेपी ने क्या मांगें रखीं?

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह से विठ्ठलभाई पटेल हाउस में करीब दो घंटे तक मुलाकात की। इस दौरान पार्टी ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी गैर-समझौतावादी मांग है। साथ ही 20 जुलाई को कथित तौर पर पिटाई झेलने वाले छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगने की भी मांग की गई। पार्टी ने 3 मई को नीट परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की भी मांग रखी। दोनों पक्षों के बीच शनिवार को फिर बैठक होने वाली है।

20 जुलाई को क्या हुआ था और पुलिस का क्या कहना है?

20 जुलाई को प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में सीजेपी ने संसद चलो मार्च निकाला था। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इस कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया, जो बाद में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया। हालांकि दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था तोड़ने की कोशिश की थी, जिसके बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए सीमित बल का इस्तेमाल किया गया।

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