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Climate Change: गर्मी ने बदला फलों का स्वाद, सूख कर गिर रहे जामुन, खीरा हो रहा कड़वा, आम-केले में आए ये बदलाव
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जलवायु परिवर्तन का फलों पर असर।
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अमर उजाला।
विस्तार
देश में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब घरों में बनने वाली सब्जियों के साथ सलाद और फलों पर भी नजर आ रहा है। गर्मी के कारण पहले ही सब्जियों और फलों की आवक बाजार में कम हो गई है। लेकिन जो सब्जियां और फल मंडी में आ रहे हैं, उनमें भी ज्यादातर में कड़वाहट है। खीरे कड़वे हो गए हैं, जबकि जो जामुन बाजार में आए है वह भी ठीक से पके नहीं हैं। आम और केले के स्वाद का भी बदल गया है।दरअसल, पूरा उत्तर भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। हीटवेव के कारण बीते कई दिनों से फल-सब्जियों की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। पिछले एक हफ्ते में कई सब्जियों के दाम दोगुने हो गए हैं। बढ़ते तापमान के कारण खेतों में हरी सब्जियों के पौधे भी जल गए हैं। जिससे आवक प्रभावित हुई है। तापमान और तेज धूप की वजह से खेतों में ही हरी सब्जियों के पौधे सूख रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ जो कुछ सब्जियां मंडी तक पहुंच रही हैं। वह भी भीषण गर्मी के कारण खराब हो रही हैं। टमाटर, घीया, तोरई की फसल नष्ट हो गई है। इसका असर अब बाजारों पर 50 फीसदी तक दामों में उछाल देखने को मिल रहा है।
दिल्ली-एनसीआर की सबसे बड़ी आजादपुर मंडी के व्यापारियों का कहना है कि ज्यादा गर्मी से हरी सब्जियों की सप्लाई घटी है। गर्मी में आम के बाद जामुन का लोगों को इंतजार रहता है। अभी यूपी का जामुन बाजार में नहीं आया है। कुछ जगहों में जामुन नजर आ रहा है, लेकिन वह दूसरे राज्यों का है। भारत में दक्षिण से लेकर उत्तर में गंगा-सिंधु के मैदानों तक इसका उत्पादन किया जाता है। यूपी के अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक प्रमुख जामुन उत्पादक राज्य हैं।
व्यापारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश का जामुन न आने की वजह ये है कि जून में एक बार भी बारिश नहीं हुई। जब बारिश हो जाती है तभी जामुन पकता है। पिछले वर्षों में इस समय तक कुछ बारिश हो जाती थी और पकने की शुरुआत हो जाती थी। अभी बारिश न होने और तापमान बढ़ने के कारण वह आकार नहीं ले पाएगा। भीषण गर्मी के कारण काफी जामुन तो सूखकर गिर जा रहे हैं। ऐसे में जामुन को बचाने के लिए किसानों की मशक्कत और लागत बढ़ गई है। इससे ये महंगे भी मिल रहे हैं और वह स्वाद भी नहीं है। वहीं, केला जो इस समय बाजार में मिल रहा है, उसमें मिठास नहीं है, फीकापन ज्यादा है। साथ ही, वह ज्यादा दिन तक टिक भी नहीं पा रहा है और पिलपिला हो जा रहा है।
आजादपुर मंडी के व्यापारियों का कहना है कि गर्मियों में सलाद और खीरा बहुत पसंद किया जाता है। लेकिन इन दिनों प्याज-आलू के साथ टमाटर भी महंगा होता जा रहा है। पिछले दो हफ्तों में टमाटर के दामों में दोगुना इजाफा हुआ है। गर्मी के कारण खीरे की फसल भी खत्म हो गई है। अब बारिश के बाद वाली फसल आएगी। कुछ किसानों ने खेतों में लगातार पानी देकर खीरा बचाने की कोशिश जरूर की, लेकिन सिंचाई की बढ़ती लागत से किसान परेशान है। खीरे में थोड़ा भी पानी कम रह गया, तो उसमें कड़वाहट आ जाएगी। इतनी मेहनत के बाद भी किसान को उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।
आम का साइज भी हो रहा छोटा
किसानों का कहना है कि गर्मी का असर आम पर देखने को मिल रहा है। आम के बागों में भी लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है। बागों में नमी बरकरार रहनी चाहिए। यदि पानी समय पर नहीं दिया, तो आम का साइज छोटा रहेगा। जल्दी पककर गिर जाएगा। गर्मी के कारण लागत और मेहनत दोनों बढ़ गई है। कृषि जानकारों का कहना है कि पहले ज्यादा सर्दी और अब ज्यादा गर्मी का भी आम के उत्पादन पर असर पड़ा है। जनवरी में ज्यादा सर्दी के दौरान धूप नहीं निकलने से आम के फूल आने की प्रक्रिया धीमी हो गई थी। जिन आम के बागों में देरी से फूल आए वे तेज गर्मी का शिकार हो गए। यूपी में आम का तकरीबन 20.85 फीसदी उत्पादन होता है। इसके बाद आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु ,बिहार और गुजरात में उत्पादन होता है। लेकिन इस बार मौसम की मार भी आम दिखी है यूपी में समेत इन राज्यों में 60 फीसदी की कमी आई है।