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कमांडर सम्मेलन: ड्रोन और डाटा नेटवर्क से लैस होंगे सेना के अग्रिम मोर्चे, कमांडरों ने तैयार किया भविष्य का रोड

ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Nirmal Kant Updated Fri, 17 Apr 2026 05:09 AM IST
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सार

कमांडर सम्मेलन में सेना ने भविष्य के युद्धों के लिए तकनीक-आधारित रणनीति पर जोर देते हुए 2026 को 'इयर ऑफ नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी' घोषित किया है। अब सीमा सुरक्षा में पारंपरिक हथियारों के साथ डाटा, नेटवर्क और आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका तय की गई है, जिसमें ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम को मजबूत करने की योजना शामिल है। पढ़ें रिपोर्ट-

commanders conference Indian army frontlines to be equipped with drones and data networks future roadmap
कमांडर सम्मेलन - फोटो : एक्स/एडीजी पीआई- इंडियन आर्मी
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विस्तार

भारतीय सेना ने भविष्य के युद्धों के लिए अपने लड़ाकू दस्तों को हाईटेक बनाने का व्यापक रोडमैप तैयार किया है। हाल ही में संपन्न चार दिवसीय सैन्य कमांडर सम्मेलन में यह तय किया गया कि सीमाओं की सुरक्षा अब पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ डाटा और नेटवर्किंग के दम पर होगी। सेना ने वर्ष 2026 को इयर ऑफ नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी घोषित किया है।
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सम्मेलन में अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों को सटीक हमलों के लिए ड्रोन प्रणालियों से लैस करने और दुश्मन के ड्रोन हमलों को नाकाम करने के लिए उन्नत एंटी-ड्रोन तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, युद्ध के मैदान में सुरक्षित और हैक-प्रूफ संचार प्रणाली विकसित करने की योजना बनाई गई है, ताकि डाटा के आधार पर त्वरित सैन्य निर्णय लिए जा सकें। 
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संप्रभु एआई और थिएटरीकरण पर जोर
कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने संप्रभु एआई (सॉवरिन एआई) मॉडल पर जोर दिया, ताकि संवेदनशील सैन्य डाटा देश के भीतर सुरक्षित रहे और सेना विदेशी क्लाउड सिस्टम पर निर्भर न रहे। वहीं, सीडीएस जनरल अनिल चौहान और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए थिएटरीकरण और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल को अनिवार्य बताया। सम्मेलन में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों व नागरिक एजेंसियों के साथ सहयोग को मजबूत करने का भी संकल्प लिया गया। 

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