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Bengal First Phase Voting: Who is this BJP candidate who was chased down and beaten?
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Bengal First Phase Voting: कौन है ये भाजपा प्रत्याशी जिसे दौड़ा-दौड़ाकर पीटा?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Thu, 23 Apr 2026 04:01 PM IST
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पश्चिम बंगाल में चुनावी गर्मी अब हिंसा की आंच में बदलती नजर आ रही है। सवाल ये है कि क्या लोकतंत्र के इस महापर्व में डर और दबाव की राजनीति हावी हो रही है? क्या उम्मीदवार अब वोट नहीं, अपनी जान बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं? और आखिर कुमारगंज में बीजेपी प्रत्याशी पर हमला सियासी साजिश है या जमीनी गुस्से का विस्फोट? इन सभी सवालों के जवाब इस वीडियो में।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बीच दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज से आई एक तस्वीर ने सियासी माहौल को और ज्यादा गरमा दिया है। बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु सरकार पर कथित हमले का वीडियो सामने आया है, जिसमें भीड़ के बीच उनके साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई साफ देखी जा सकती है। इससे पहले की आपको आगे की पूरी कहानी बताऊ आप पहले लोकतंत्र और कानून को ताड़-ताड़ कर देने वाली इस वीडियो को देखिए।
आइए अब आपको बताते है आखिर हुआ क्या। वीडियो में नजर आता है कि हालात अचानक बेकाबू हो जाते हैं और इसी दौरान शुभेंदु सरकार के कान से खून बहता हुआ भी दिखता है। हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि उन्हें अपने बॉडीगार्ड के साथ मौके से निकलना पड़ता है। यह घटना अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
घटना के बाद बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु सरकार ने सीधे तौर पर सत्ताधारी टीएमसी सरकार पर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि यह हमला कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है, जिसका मकसद चुनाव के दौरान डर का माहौल बनाना है। उन्होंने दावा किया कि उनके पोलिंग एजेंट्स को 8 से 10 बूथों से जबरन बाहर निकाल दिया गया था। आइए आपको सुनाते है की आखिर सुवेंदु सरकार ने अपने साथ हुई इस बर्बरता पर क्या कहा।
वहीं दूसरी ओर, इस घटना ने चुनावी सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की हिंसक घटनाएं यह संकेत देती हैं कि जमीनी स्तर पर हालात कितने तनावपूर्ण हैं।
शुभेंदु सरकार, जो कि बीजेपी के ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, इस बार कुमारगंज सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका राजनीतिक कद भले ही राज्य स्तर पर नया हो, लेकिन इस घटना के बाद वे अचानक सुर्खियों में आ गए हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या बंगाल में चुनावी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो पाएगी, या फिर इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र पर लगातार सवाल खड़े करती रहेंगी। फिलहाल, कुमारगंज की यह घटना सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि पूरे राज्य के चुनावी माहौल की तस्वीर पेश कर रही है।
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