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Women's Reservation Bill: Jagadambika Pal gave this warning to the opposition on 33% reservation for women!
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Women's Reservation Bill : महिलाओं के 33% आरक्षण पर जगदंबिका पाल ने विपक्ष को दी ये चेतावनी!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Tue, 21 Apr 2026 03:45 AM IST
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भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, "2023 में सदन में महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था। यह विधेयक 2034 की जगह 2029 में लागू होना था, जिसमें महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा तो इसमें सरकार की मंशा तो स्पष्ट थी.इससे साफ है कि विपक्ष महिलाओं के आरक्षण को लागू ही नहीं होने देना चाहता है.यह महिलाओं के साथ विश्वासघात है
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद Jagadambika Pal ने महिला प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया Women's Reservation Bill सरकार की स्पष्ट और सकारात्मक मंशा को दर्शाता है। इस विधेयक, जिसे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के नाम से भी जाना जाता है, का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है, ताकि राजनीति में उनकी भागीदारी और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल सके।
जगदंबिका पाल के अनुसार, यह ऐतिहासिक निर्णय देश की लोकतांत्रिक संरचना को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विधेयक को 2034 के बजाय 2029 तक लागू करने की बात सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार महिलाओं को राजनीति के मुख्यधारा में लाने के लिए गंभीर है। हालांकि, इस कानून के लागू होने की प्रक्रिया परिसीमन (delimitation) और जनगणना जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी हुई है, जिसके कारण इसकी समयसीमा को लेकर अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।
फिर भी, भाजपा नेताओं का मानना है कि सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है और जल्द से जल्द इसे प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा। इस विधेयक के पारित होने के बाद देशभर में महिला संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसका स्वागत किया, क्योंकि इससे लंबे समय से लंबित मांग पूरी होती नजर आई। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाना न केवल समानता के सिद्धांत को मजबूत करेगा, बल्कि नीति-निर्माण में भी विविधता और संतुलन लाएगा।
जगदंबिका पाल का यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि सरकार केवल वादे ही नहीं कर रही, बल्कि ठोस कदम उठाकर उन्हें पूरा करने की दिशा में भी अग्रसर है। कुल मिलाकर, महिला आरक्षण विधेयक का पारित होना और इसके शीघ्र कार्यान्वयन की दिशा में प्रयास भारतीय राजनीति में एक नई दिशा और ऊर्जा का संकेत देता है, जो आने वाले वर्षों में महिलाओं की भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बना सकता है।
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