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दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: जज को 'मर्डरर' कहने वाले वीडियो-पोस्ट तुरंत हटाओ, चलेगा अवमानना का मुकदमा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Mon, 08 Jun 2026 04:56 PM IST
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सार

30 मई को साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक इमारत के ढहने से छह लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कपिल कक्कड़ ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर) और लिंक्डइन पर कई वीडियो जारी किए। इन वीडियो में कक्कड़ ने आरोप लगाया कि एक हाईकोर्ट जज ने अवैध निर्माण रोकने वाली याचिका खारिज कर दी थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। 

Delhi High Court Order Immediately remove video post calling the judge murderer
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक सुनवाई में उन सभी वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है, जिनमें एक वरिष्ठ हाईकोर्ट जज को साकेत में इमारत ढहने की घटना का जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें मर्डरर कहा गया था। कोर्ट की अवकाश खंडपीठ ने (न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा और न्यायमूर्ति मधु जैन) ने कहा कि ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट न केवल न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि जनता के न्याय व्यवस्था में विश्वास को भी कमजोर करते हैं। बेंच ने संकेत दिया कि वह संबंधित खातों को ब्लॉक करने के आदेश पर भी विचार कर सकती है।

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सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट के खिलाफ सक्रिय रूप से कार्रवाई करनी चाहिए। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा सोशल मीडिया इतना शक्तिशाली कैसे हो गया? क्या हम इन प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकते? जब उन्हें इतना अमर्यादित कंटेट पता चल जाए तो उन्हें खुद ही उसे हटाना चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि वीडियो में दिए गए बयान सच्चाई पर आधारित नहीं हैं, बल्कि अदालत को बदनाम करने और स्कैंडलाइज करने का प्रयास हैं। बेंच ने आशा जताई कि जनता ऐसे बयानों पर कोई ध्यान न दे।

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यह है मामला
30 मई को साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक इमारत के ढहने से छह लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कपिल कक्कड़ ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर) और लिंक्डइन पर कई वीडियो जारी किए। इन वीडियो में कक्कड़ ने आरोप लगाया कि एक हाईकोर्ट जज ने अवैध निर्माण रोकने वाली याचिका खारिज कर दी थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने इस पर आपराधिक अवमानना की याचिका दायर की। बार एसोसिएशन का कहना है कि कक्कड़ के आरोप पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। वास्तव में जज का आदेश केवल याचिका वापस लेने की अनुमति देने वाला था, क्योंकि उसमें संपत्ति मालिक को पक्षकार नहीं बनाया गया था।

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