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Women's Reservation Bill: Union Minister Kiren Rijiju gets angry at Congress-TMC, gives this open warning to t
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Women's Reservation Bill : कांग्रेस-TMC पर भड़के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, विपक्ष को दी ये खुली चेतावनी!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Mon, 20 Apr 2026 07:00 AM IST
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को टीएमसी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। किरेन रिजिजू ने कहा, "हाल ही में हुए तीन दिन के संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया गया। यह बिल भारत की आधी आबादी के लिए था। संविधान संशोधन इसलिए नहीं हो सका क्योंकि हमारे पास आवश्यक संख्या नहीं थी। जब ममता दीदी ने नंदीग्राम आंदोलन शुरू किया था, तब वह NDA में हमारे साथ थीं... उस समय आडवाणी जी ने कहा था कि नंदीग्राम संघर्ष लेफ्ट के अंत की शुरुआत है। इसी तरह, कल TMC, कांग्रेस और विपक्ष द्वारा महिला आरक्षण बिल का गिराया जाना पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और TMC के पतन की शुरुआत है, और कांग्रेस की हार की शुरुआत है। जिन पार्टियों ने महिलाओं को न्याय न देकर ऐसा किया है, उन्हें महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन चल रहा है।"
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने हाल ही में संसद के विशेष सत्र के दौरान विपक्षी दलों, खासकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तीन दिन के विशेष सत्र में सरकार ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया, जिसका उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना है। रिजिजू के अनुसार, यह विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, लेकिन विपक्ष ने इसका समर्थन करने के बजाय राजनीति करने का रास्ता चुना। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी और कांग्रेस जैसे दल महिला आरक्षण के मुद्दे पर गंभीर नहीं हैं और केवल दिखावटी समर्थन देते हैं।
रिजिजू ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर लोकतंत्र को और मजबूत करना है। “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” को आमतौर पर महिला आरक्षण विधेयक के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें महिलाओं के लिए एक निश्चित प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि जब देश में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की बात हो रही है, तब वे इसका विरोध क्यों कर रहे हैं।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि इस विधेयक को लागू करने की समयसीमा और प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। उनका आरोप है कि सरकार ने इसे जल्दबाजी में पेश किया और इसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा हो सकती है। कांग्रेस और टीएमसी का कहना है कि वे महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में हैं, लेकिन इस विधेयक में कुछ खामियां हैं, जिन पर गंभीर चर्चा की जरूरत है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। जहां एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अधूरा और राजनीतिक कदम करार दे रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमा सकता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध महिलाओं की भागीदारी और लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़ा हुआ है।
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