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Caste Census: 'जातीय सर्वे को टालना चाहते हैं पीएम मोदी', जानिए कांग्रेस क्यों लगा रही सरकार पर ये बड़ा आरोप
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Thu, 30 Apr 2026 11:08 AM IST
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सार
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार जातीय सर्वेक्षण को टालना चाहती है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि एलान के एक साल बाद भी सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है।
कांंग्रेस ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
- फोटो : ANI
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विस्तार
कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि सरकार द्वारा जातीय जनगणना की घोषणा किए एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक ये साफ नहीं है कि यह प्रक्रिया कैसे पूरी की जाएगी। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जातीय सर्वे को टालना चाहते हैं। कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि आज ही के दिन एक साल पहले मोदी सरकार ने आगामी जनगणना में जातीय गणना को भी शामिल करने की घोषणा की थी।
जयराम रमेश ने बताई जातीय सर्वेक्षण के एलान की टाइमलाइन
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा पोस्ट में कहा, 'प्रधानमंत्री के नाटकीय यू-टर्न की समयरेखा ये है कि 21 जुलाई 2021 को लोकसभा में एक भाजपा सांसद के सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने कहा था कि सरकार ने नीति के तौर पर जातिवार जनसंख्या की गणना नहीं करने का फैसला किया है। इसके बाद 21 सितंबर 2021 को मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके कहा कि जातिवार जनगणना के लिए अदालत का कोई भी निर्देश सरकार के नीति-निर्णय में हस्तक्षेप के समान होगा।'
कांग्रेस नेता ने यह भी उल्लेख किया कि 16 अप्रैल 2023 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जनगणना के साथ ही जातीय जनगणना कराने की मांग की थी। हालांकि 28 अप्रैल 2024 को एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा था कि जातीय जनगणना की मांग अर्बन नक्सल की सोच को दर्शाती है। जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस टिप्पणी के लिए कांग्रेस नेतृत्व से माफी मांगनी चाहिए और साथ ही देश की जनता को यह भी बताना चाहिए कि 30 अप्रैल 2025 को जातीय जनगणना की घोषणा करते समय उनकी सोच कथित अर्बन नक्सल के विचार से कैसे प्रभावित हुई।
कांग्रेस का आरोप- 'जातीय सर्वेक्षण टालना चाहते हैं पीएम मोदी'
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पोस्ट में लिखा, 'पूरा एक साल बीत चुका है, लेकिन अब तक ये साफ नहीं है कि जातीय गणना कैसे की जाएगी। विपक्षी दलों, राज्य सरकारों और इस विषय के विशेषज्ञों से कोई बातचीत नहीं की गई है।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने 5 मई 2025 को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को फिर पत्र लिखा था, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उस पत्र में उठाए गए मुद्दे आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में समाप्त हुए संसद के विशेष सत्र के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री जातीय जनगणना को टालने की मंशा रखते हैं।
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जयराम रमेश ने बताई जातीय सर्वेक्षण के एलान की टाइमलाइन
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा पोस्ट में कहा, 'प्रधानमंत्री के नाटकीय यू-टर्न की समयरेखा ये है कि 21 जुलाई 2021 को लोकसभा में एक भाजपा सांसद के सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने कहा था कि सरकार ने नीति के तौर पर जातिवार जनसंख्या की गणना नहीं करने का फैसला किया है। इसके बाद 21 सितंबर 2021 को मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके कहा कि जातिवार जनगणना के लिए अदालत का कोई भी निर्देश सरकार के नीति-निर्णय में हस्तक्षेप के समान होगा।'
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कांग्रेस नेता ने यह भी उल्लेख किया कि 16 अप्रैल 2023 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जनगणना के साथ ही जातीय जनगणना कराने की मांग की थी। हालांकि 28 अप्रैल 2024 को एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा था कि जातीय जनगणना की मांग अर्बन नक्सल की सोच को दर्शाती है। जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस टिप्पणी के लिए कांग्रेस नेतृत्व से माफी मांगनी चाहिए और साथ ही देश की जनता को यह भी बताना चाहिए कि 30 अप्रैल 2025 को जातीय जनगणना की घोषणा करते समय उनकी सोच कथित अर्बन नक्सल के विचार से कैसे प्रभावित हुई।
कांग्रेस का आरोप- 'जातीय सर्वेक्षण टालना चाहते हैं पीएम मोदी'
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पोस्ट में लिखा, 'पूरा एक साल बीत चुका है, लेकिन अब तक ये साफ नहीं है कि जातीय गणना कैसे की जाएगी। विपक्षी दलों, राज्य सरकारों और इस विषय के विशेषज्ञों से कोई बातचीत नहीं की गई है।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने 5 मई 2025 को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को फिर पत्र लिखा था, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उस पत्र में उठाए गए मुद्दे आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में समाप्त हुए संसद के विशेष सत्र के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री जातीय जनगणना को टालने की मंशा रखते हैं।
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