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Gujarat: 'दूषित पानी' से भरी बोतल लेकर गुजरात विधानसभा पहुंचे कांग्रेस विधायक, अध्यक्ष ने लगाई फटकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Fri, 20 Feb 2026 05:03 PM IST
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सार

कांग्रेस नेताओं ने गुजरात विधानसभा में महिसागर जिले के जामियातपुरा में भूजल में कथित रासायनिक प्रदूषण के संबंध में सरकार से विवरण मांगा था। इस पर जवाब देते हुए वन और पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने सदन को सूचित किया कि प्रदूषण की शिकायतें मिली थीं, लेकिन नमूनों की जांच में कोई प्रदूषण नहीं निकला।

Congress MLA Shailesh Parmar brings bottle contaminated water into Gujarat assembly gets pulled up by speaker
कांग्रेस विधायक शैलेश परमार - फोटो : facebook/shaileshMparmar
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विस्तार

कांग्रेस विधायक शैलेश परमार ने शुक्रवार को गुजरात विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान एक बोतल दिखाई, जिसमें उनके अनुसार दूषित पानी था। इस पर अध्यक्ष शंकर चौधरी ने उन्हें फटकार लगाई और भविष्य में ऐसी हरकतें न करने को कहा। राज्य के कृषि मंत्री जीतू वाघानी ने भी परमार की आलोचना की।
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यह घटना तब घटी जब कांग्रेस विधायक दल के नेता तुषार चौधरी ने महिसागर जिले के जामियातपुरा में मौर्य एनवायरो प्रोजेक्ट्स के अपशिष्ट प्रसंस्करण स्थल के आसपास भूजल में कथित रासायनिक प्रदूषण के संबंध में सरकार से विवरण मांगा था।
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शिकायतें मिलीं, लेकिन प्रदूषण के संकेत नहीं
सरकार की ओर से जवाब देते हुए वन और पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने सदन को सूचित किया कि आसपास के क्षेत्रों में कुओं के कथित प्रदूषण के संबंध में 2024 और 2025 में पांच शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

उन्होंने बताया कि कई बार निरीक्षण किए गए और इकाई परिसर के साथ-साथ आसपास के गांवों से भूजल के नमूने एकत्र किए गए। माली ने कहा कि नमूनों के विश्लेषण से भूजल की गुणवत्ता में किसी व्यापक या स्थायी प्रदूषण का संकेत नहीं मिला। मंत्री ने आगे कहा कि परीक्षण के दौरान महत्वपूर्ण प्रदूषण का कोई सबूत नहीं मिला।

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इस जवाब से असंतुष्ट होकर बायद से निर्दलीय विधायक धवलसिंह जाला ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि कचरा फेंकने का स्थान उनके निर्वाचन क्षेत्र के करीब स्थित है और स्थानीय निवासियों ने इससे होने वाले प्रदूषण के बारे में अधिकारियों से कई शिकायतें की हैं।

परमार ने लगाए गंभीर आरोप
जाला ने सदन को बताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पहले उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को उस स्थल को बंद करने का निर्देश दिया था, लेकिन आरोप लगाया कि उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। जैसे ही मंत्री ने दोहराया कि इलाके में जल प्रदूषण नहीं है, परमार खड़े हो गए और भूरे रंग के तरल पदार्थ से भरी एक छोटी बोतल निकाल ली। उन्होंने उसे दिखाते हुए दावा किया कि इसमें कुछ दिन पहले डंपिंग साइट के पास एक कुएं से इकट्ठा किया गया पानी है।

परमार ने कहा कि यह बोतल इस बात का सबूत है कि सरकार के दावों के विपरीत, इलाके का भूजल दूषित है और स्थानीय निवासी और किसान इससे प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य प्रभावित गांवों में जमीनी हकीकत को प्रदर्शित करना था।

विधानसभा अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
इस कृत्य पर अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन के अंदर बोतल प्रदर्शित किए जाने पर अपनी नाराजगी जताई। सरकार की ओर से जीतू वाघानी ने भी आपत्ति जताई और अध्यक्ष से इस मामले पर उचित फैसला देने का आग्रह किया। अपने फैसले में चौधरी ने परमार को भविष्य में ऐसे कृत्य करने से परहेज करने को कहा।

चौधरी ने कहा, 'आप भली-भांति जानते हैं कि सदन के सदस्यों को ऐसी वस्तुएं सदन के अंदर लाना और इस तरह प्रदर्शित करना मना है। मैं इस मामले में कोई सख्त कार्रवाई नहीं करना चाहता। और कौन जाने, बोतल में सिर्फ पानी ही तो था? अगर इस तरह से कोई और वस्तु लाई जाती है तो ऐसा कृत्य अन्य सदस्यों के जीवन को खतरे में डाल सकता है।'

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भविष्य में ऐसा कृत्य न करने की मिली सलाह
उन्होंने विधानसभा के सार्जेंट को परमार से बोतल ले जाने का निर्देश दिया और सदस्यों को इस तरह के व्यवहार को दोहराने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने आगे कहा, 'यह देखना महत्वपूर्ण है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और मैं विशेष रूप से परमार से भविष्य में ऐसे कृत्यों से परहेज करने का अनुरोध करता हूं।'

हालांकि, परमार ने कहा कि उनका एकमात्र इरादा यह साबित करना था कि कचरा फेंकने वाली जगह के पास का भूजल वास्तव में दूषित था। उन्होंने दावा किया कि पानी घटनास्थल के पास स्थित एक कुएं से एकत्र किया गया था और ग्रामीण लंबे समय से इस बारे में चिंता जता रहे थे।

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