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Brajesh Pathak Bhatuk Samman: Politics heats up over 'Batuk Puja', Akhilesh plays this big political move!
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Brajesh Pathak Bhatuk Samman: 'बटुक पूजा' पर सियासत गरम, अखिलेश ने खेला ये बड़ा सियासी दांव!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Fri, 20 Feb 2026 06:28 PM IST
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समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बयान पर कहा, "अगर उन्हें लगता है कि अपमान हुआ है. उनके साथ ऐसा बर्ताव करने वाले लोग दोषी होंगे और पापी कहलाएंगे, तो वह सज़ा क्यों नहीं दिला पा रहे हैं? क्या वजह है कि दोनों उपमुख्यमंत्री मिलकर भी सज़ा नहीं दिला पा रहे हैं और अगर दो दिन में सज़ा नहीं दिला पाए तो मुख्यमंत्री जापान चले जाएंगे, तो क्या हमारे उपमुख्यमंत्री धरना करने जापान जाएंगे।"
ब्रजेश पाठक द्वारा आयोजित ‘बटुक पूजा’ को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। ब्रजेश पाठक, जो योगी आदित्यनाथ सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं, ने धार्मिक परंपरा के तहत ‘बटुक पूजा’ का आयोजन किया। हिंदू धर्म में बटुक पूजा का विशेष महत्व माना जाता है इसमें बालकों को भगवान का रूप मानकर उनका पूजन, सम्मान और भोजन कराया जाता है। समर्थकों का कहना है कि यह सनातन परंपरा का हिस्सा है और इसमें राजनीति खोजने की जरूरत नहीं है।
हालांकि विपक्षी दलों ने इस आयोजन को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सरकारी पद पर रहते हुए इस तरह के धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक मंच की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए धार्मिक भावनाओं को साधने की कोशिश बताया। विपक्ष का कहना है कि जब प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे मौजूद हैं, तब सरकार को उन पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि भारत एक आस्थावान देश है और जनप्रतिनिधियों को भी अपनी धार्मिक परंपराओं के पालन का अधिकार है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि जब अन्य दलों के नेता विभिन्न धर्मों के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, तब उस पर सवाल नहीं उठते, लेकिन हिंदू परंपराओं से जुड़े आयोजनों पर ही राजनीति की जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक प्रतीकों और आयोजनों का प्रभाव हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में किसी भी बड़े नेता द्वारा किया गया धार्मिक आयोजन स्वाभाविक रूप से चर्चा और विवाद का विषय बन जाता है। ‘बटुक पूजा’ को लेकर छिड़ी यह सियासत भी इसी व्यापक राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य का हिस्सा मानी जा रही है।
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