Congress President: यह है नए कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के सामने पहली सबसे बड़ी चुनौती, आसान नहीं है इससे निपटना
Congress President: कांग्रेस के नव निर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सिर्फ आने वाले महीनों में विधानसभा के चुनाव ही बड़ी चुनौती नहीं हैं, बल्कि सबसे बड़ी चुनौती राजस्थान के उदयपुर में आयोजित किए गए चिंतन शिविर के एजेंडों को जमीन पर उतारने की है...
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मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव जीतने के साथ ही खरगे के सामने चुनौतियों का अंबार खड़ा हो गया है। सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की शुरू हो गई है कि आखिर इन चुनौतियों से निपटने के लिए खरगे के पास त्वरित योजना क्या है। क्योंकि सबसे पहले खरगे को अगले दो महीने के भीतर गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों में पार्टी को एक नए मुकाम पर पहुंचाने की जिम्मेदारी है, साथ ही अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को जीतने और फिर लोकसभा के चुनावों के लिए फुलप्रूफ प्लान तैयार करने की चुनौती भी है। इसके अलावा खरगे के सामने सबसे बड़ी चुनौती उदयपुर में आयोजित हुए चिंतन शिविर के उन सभी एजेंडों को सिरे तक पहुंचाने की है, जिसके दम पर पार्टी ने अगले कई सालों का पूरा विजन तैयार किया है।
कैसे रोकेंगे भगदड़ को
राजनीतिक विश्लेषक ओम प्रकाश मिश्रा कहते हैं कि यह सबको पता था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कौन जीतेगा? अब जब खरगे राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं तो उनके सामने वह सभी चुनौतियां आकर खड़ी हो गई हैं, जो लंबे अरसे से पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के न होने पर पार्टी में होती हैं। उनका कहना है कि इसमें सबसे बड़ी चुनौती राजनैतिक संगठन को मजबूती से खड़ा करने की होगी। क्योंकि बीते कुछ समय से कांग्रेस पार्टी के भीतर जिस तरीके की राजनीतिक उठापटक मची थी और उसका परिणाम चुनावों में जिस तरीके से आ रहा था, वह सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर मल्लिकार्जुन खरगे के सामने खड़ी है। इसके अलावा बीते कुछ समय के भीतर कई बड़े कद्दावर नेता कांग्रेस छोड़ कर जा चुके हैं। ऐसे में नए अध्यक्ष के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती होगी कि पार्टी में मची भगदड़ को न सिर्फ रोका जाए, बल्कि नए लोगों को ज्वाइन भी कराया जाए। कांग्रेस के जानकारों का कहना है कि पार्टी में अभी भी गाहे-बगाहे बगावती सुर अख्तियार करने वाले कई नेता पार्टी में मौजूद हैं। ऐसे में इन सभी लोगों को साथ लेकर चलने की बड़ी चुनौती भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने रहेगी।
कैसे लागू करेंगे चिंतन शिविर के एजेंडे
कांग्रेस के नव निर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सिर्फ आने वाले महीनों में विधानसभा के चुनाव ही बड़ी चुनौती नहीं हैं, बल्कि सबसे बड़ी चुनौती राजस्थान के उदयपुर में आयोजित किए गए चिंतन शिविर के एजेंडों को जमीन पर उतारने की है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक वैसे तो सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को राज्य इकाइयों से न सिर्फ साझा किया जा चुका है, बल्कि उसे जमीन पर उतारने का पूरा रोडमैप भी दिया जा चुका है। उनमें ज्यादातर राज्यों में उन बिंदुओं के अनुसार कार्य योजना शुरू हो गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष को सभी बिंदुओं की मॉनिटरिंग करनी है। कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से जुड़े एक वरिष्ठ सदस्य बताते हैं कि उदयपुर चिंतन शिविर के बाद गुजरात और हिमाचल प्रदेश में पहले बड़े चुनाव हो रहे हैं। इसलिए मलिकार्जुन खरगे के सामने चिंतन शिविर के बिंदुओं पर इन दोनों राज्यों में चुनावी रणनीतिक ढांचे को न सिर्फ खड़े करने की जिम्मेदारी है। बल्कि उसे उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए अगले साल होने वाले अलग-अलग राज्यों के चुनावों में भी बढ़ाने की जिम्मेदारी है।
हिमाचल-गुजरात चुनाव खरगे के नेतृत्व में
कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पास पार्टी के भीतर की चुनौतियों से निपटने की कार्य योजना नहीं है। उनका कहना है कि खरगे पहले से ही कांग्रेस के भीतर अहम भूमिका में थे और तमाम तरीके के फैसलों में उनका न सिर्फ हस्तक्षेप था, बल्कि उनकी बात को मानकर पार्टी को आगे ले जाने की दिशा में बताए जाने वाले सभी प्रयास भी किए जाते थे। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि मलिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव प्रचार के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर न सिर्फ प्रचार किया, बल्कि पार्टी संगठन को मजबूती से खड़े करने के लिए किए जाने वाले दिशा निर्देशों को भी राज्य इकाइयों को निर्देशित किया था। उनका कहना है कि रही बात अगले दो महीने के भीतर होने वाले हिमाचल प्रदेश और गुजरात के चुनावों की, तो मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में ही पार्टी वहां पर अपनी चुनावी रैलियां और जनसभाएं करने जा रही है।

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