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बिहार की हार पर 'सिरफुटौव्वल': दो कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस की खबर, पप्पू यादव ने खंडन किया; जानिए मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 27 Nov 2025 10:59 PM IST
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सार

कांग्रेस ने बिहार में मिली करारी हार की समीक्षा के दौरान उम्मीदवारों से फीडबैक लिया, जिसमें 10,000 रुपये ट्रांसफर, देर से सीट बंटवारा, आंतरिक कलह और चुनावी गड़बड़ियों को बड़ी वजह बताया गया। बैठक में इंजीनियर संजीव और जितेंद्र कुमार के बीच नोकझोंक की अपुष्ट खबरें सामने आईं, हालांकि पप्पू यादव ने इन्हें गलत बताया। 

Congress Review Meeting Bihar poll debacle leaders dispute reports pappu yadav kharge and party top brass news
कांग्रेस की बैठक में कलह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस ने कारणों की गहराई से समीक्षा शुरू कर दी है। पार्टी अध्यक्ष खरगे, राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल ने गुरुवार को उम्मीदवारों से मुलाकात की, जिसमें नेताओं ने खुलकर शिकायतें रखीं। कई उम्मीदवारों ने कहा कि एनडीए सरकार द्वारा महिलाओं को 10,000 रुपये का ट्रांसफर, समय पर सीट बंटवारा तय न होना, आंतरिक कलह और चुनावी गड़बड़ियों ने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया। 

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सूत्रों के अनुसार, विवाद कथित तौर पर उस समय हुआ जब कांग्रेस अध्यक्ष खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी बैठक में मौजूद नहीं थे। पार्टी ने अभी तक इस घटना पर कोई बयान नहीं दिया है।  हालांकि, पप्पू यादव ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि बैठक में कोई झगड़ा नहीं हुआ। चुनावी हार के कारणों पर पार्टी नेतृत्व ने उम्मीदवारों से विस्तृत फीडबैक लिया।
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बैठक में हुई तीखी नोकझोंक
बताया गया कि इंजीनियर संजीव और जितेंद्र कुमार के बीच बाहरी लोगों को टिकट देने के मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हुई और संजीव ने जितेंद्र को धमकाया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। समीक्षा बैठक में उम्मीदवारों ने कांग्रेस अध्यक्ष खरगे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल से कहा कि हार की बड़ी वजह एनडीए सरकार द्वारा महिलाओं को चुनाव से ठीक पहले 10,000 रुपये ट्रांसफर करना, गठबंधन में देरी और कई चरणों में ‘चुनावी गड़बड़ी’ रही। नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया संदिग्ध रही और कई सीटों पर एक जैसे अंतर से नतीजे आए, जिससे प्रक्रिया पर सवाल बढ़े।

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बैठक में उम्मीदवारों ने ‘मतदाता सूची में हेरफेर’, मतदान केंद्रों पर नकद बांटने और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का दुरुपयोग किए जाने के आरोप दोहराए। वेणुगोपाल ने कहा कि बिहार का परिणाम “संगठित चुनावी कदाचार” का उदाहरण है और यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उनका कहना था कि चुनाव आयोग ने भाजपा के पक्ष में असामान्य रूप से सहयोगी भूमिका निभाई।  वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर बताया कि बैठक में उम्मीदवारों और नेताओं ने कई गंभीर मुद्दे उठाए। उनके अनुसार, ये मुद्दे दर्शाते हैं कि चुनाव में संगठित तरीके से चुनावी धांधली की गई है:

  • निशाने पर वोटर सूची: नेताओं ने बताया कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' प्रक्रिया का उपयोग करके निशाना साधकर मतदाताओं के नाम हटाए गए और संदिग्ध नाम जोड़े गए।
  • वोटरों को प्रभावित करने के लिए नकद: 'महिला मुख्यमंत्री रोज़गार योजना' नामक कथित योजना के तहत पोलिंग बूथों पर भी खुलेआम नकद रिश्वत का इस्तेमाल कर मतदाताओं को प्रभावित किया गया।
  • समान जीत का अंतर: कई निर्वाचन क्षेत्रों में जीत के अंतर का एक जैसा पैटर्न दिखा, जो एक स्वतंत्र चुनाव आयोग को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए था।

गठबंधन में देरी और आंतरिक विवाद
अररिया के विधायक अबिदुर रहमान ने कहा कि गठबंधन तय करने में देरी ने जनता में गलत संदेश दिया। 10–11 सीटों पर ‘फ्रेंडली कॉन्टेस्ट’ की वजह से भी नुकसान हुआ। उन्होंने दावा किया कि कई परिवारों में पति कांग्रेस को वोट दे रहा था और पत्नी 10,000 रुपये मिलने के कारण एनडीए के पक्ष में मतदान कर रही थी। रहमान ने यह भी स्वीकार किया कि पार्टी में पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल की कमी रही।

लोकतंत्र पर सीधा हमला और ECI पर मिलीभगत का आरोप
कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनावों में जो कुछ भी हुआ, वह 'लोकतंत्र पर सीधा हमला' है। उन्होंने कहा कि ये सभी मुद्दे 'चुनाव आयोग की देखरेख' में किए गए 'संगठित चुनावी कदाचार और आदर्श आचार संहिता के बेशर्म उल्लंघन' की ओर इशारा करते हैं। वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी के साथ सक्रिय रूप से मिलकर धांधली करने का गंभीर आरोप लगाया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस पार्टी इस 'चुराए गए जनादेश' को नई सामान्य स्थिति नहीं बनने देगी और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई निडरता और अथक रूप से जारी रहेगी।

अन्य उम्मीदवारों की राय
अन्य उम्मीदवार तौकीर आलम ने बताया कि नेताओं के साथ 10-10 के समूह में विस्तृत चर्चा हुई। पार्टी ने अपनी हार के हर पहलू की पड़ताल की। उम्मीदवारों ने कहा कि धर्म और जाति आधारित ध्रुवीकरण ने भी चुनाव को प्रभावित किया। सीमांचल क्षेत्र में एआईएमआईएम के मजबूत प्रदर्शन का प्रभाव कांग्रेस के वोटबैंक पर स्पष्ट रूप से देखा गया।

इस चुनाव में कांग्रेस 61 सीटों में से केवल छह जीत सकी। प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार, लीडर ऑफ विपक्ष शकील अहमद खान सहित कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कहा है कि ‘चोरी हुए जनादेश’ को सामान्य नहीं बनने दिया जाएगा और पार्टी लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रखेगी।

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