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कांग्रेस बनाम शिवसेना (UBT): महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी गठबंधन में पड़ी दरार, बैसाखी टिप्पणी से बढ़ी तकरार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Shivam Garg Updated Mon, 06 Apr 2026 01:47 PM IST
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सार

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बीच ‘बैसाखी’ विवाद को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। गठबंधन राजनीति, नेतृत्व और समन्वय पर दोनों दल आमने-सामने आ गए हैं।

Congress vs Shiv Sena UBT: Rift Deepens Over Crutches Remark in Maharashtra Politics
महाविकास अघाड़ी के नेता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव गुट) के बीच ‘बैसाखी’ वाली टिप्पणी को लेकर तनातनी खुलकर सामने आ गई है। दरअसल, शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र सामना में प्रकाशित एक संपादकीय में कांग्रेस पर आरोप लगाया गया कि वह क्षेत्रीय दलों को बराबरी का दर्जा देने के बजाय उन्हें बैसाखी की तरह इस्तेमाल करती है। इस टिप्पणी ने कांग्रेस नेताओं को नाराज कर दिया।

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दोषारोपण के बजाय आत्ममंथन ज्यादा जरूरी
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने इस पर कड़ा जवाब देते हुए कहा कि संपादकीय के जरिए पार्टी पर निशाना साधना गठबंधन की भावना के खिलाफ है। उन्होंने सामना के कार्यकारी संपादक और सांसद संजय राउत पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे कई बार पत्रकार और राजनेता की भूमिकाओं में भ्रमित नजर आते हैं। सचिन सावंत ने स्पष्ट किया कि गठबंधन राजनीति में सभी दलों की अपनी राय होती है और किसी भी फैसले से पहले आपसी संवाद जरूरी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एकतरफा निर्णय लेने की प्रवृत्ति से गठबंधन को नुकसान पहुंचा है, जिसका असर मुंबई और चंद्रपुर जैसे महत्वपूर्ण निकायों के चुनावों में देखा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ रही है और इस समय दोषारोपण के बजाय आत्ममंथन ज्यादा जरूरी है।
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वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने संपादकीय में यह भी कहा कि अगर कांग्रेस को केंद्र में सत्ता हासिल करनी है, तो उसे राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ मजबूत और सम्मानजनक गठबंधन बनाना होगा। पार्टी का मानना है कि क्षेत्रीय दलों को साथ लेना कमजोरी नहीं, बल्कि राजनीतिक परिपक्वता की निशानी है।

शरद पवार के निर्विरोध चुने जाने पर बनी असहमति
गौरतलब है कि यह विवाद हाल के राज्यसभा और आगामी विधान परिषद चुनावों के संदर्भ में और गहरा गया है। राज्यसभा चुनाव में शरद पवार सर्वसम्मति से उम्मीदवार बने और निर्विरोध चुने गए, लेकिन इसके बाद भी गठबंधन के भीतर असहमति बनी रही। संपादकीय में कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया गया कि वह क्षेत्रीय दलों की राय को नजरअंदाज करती है, जो गठबंधन की मजबूती के लिए सही संकेत नहीं है।

दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में लोकसभा चुनावों में महाविकास अघाड़ी (MVA) ने महाराष्ट्र में 48 में से 30 सीटें जीतकर मजबूत प्रदर्शन किया था, जिसका श्रेय बेहतर तालमेल और संवाद को दिया गया था।

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