G S Sharanya: चार दिन तक जंगल में पानी पीकर जिंदा रही शरण्या, जानें कैसे बचाई जान; बोलीं- फिर जाऊंगी ट्रेक पर
केरल की ट्रेकर शरण्या कर्नाटक के जंगल में रास्ता भटकने के बाद चार दिनों तक अकेली फंसी रहीं और सिर्फ पानी पीकर जिंदा रहीं। बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद उन्हें ढूंढ लिया गया। इस कठिन अनुभव के बावजूद उनका ट्रेकिंग के प्रति जुनून बरकरार है। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
केरल की एक ट्रेकर की साहसिक कहानी इन दिनों चर्चा में है। 36 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल जी एस शरण्या, जो कोझिकोड की रहने वाली हैं, कर्नाटक के कोडागु जिले स्थित ताडियांडामोल हिल्स में ट्रेकिंग के दौरान रास्ता भटक गईं और चार दिनों तक घने जंगल में अकेली फंसी रहीं। रविवार रात उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।
कैसे भटकीं शरण्या?
शरण्या 2 अप्रैल को 10 सदस्यीय ट्रेकिंग ग्रुप के साथ ट्रेक पर गई थीं। वापसी के दौरान उन्होंने एक अलग रास्ता चुन लिया, जिससे वह समूह से बिछड़ गईं। उनका आखिरी संपर्क कक्काबे गांव के एक होमस्टे से फोन कॉल के जरिए हुआ, जिसमें उन्होंने बताया कि वह रास्ता खो चुकी हैं। इसके तुरंत बाद मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई और उनका बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया।
चार दिन का संघर्ष
घने जंगल, लगातार बारिश और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों के बीच शरण्या ने चार दिन तक बिना भोजन के गुजारा किया। उनके पास सिर्फ एक जैकेट, मोबाइल फोन और 500 मिलीलीटर की पानी की बोतल थी। हालांकि, पास में बह रही एक धारा ने उन्हें पानी की कमी नहीं होने दी।
खुद को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने घबराने के बजाय सूझबूझ दिखाई। वह चट्टानों के ऊपर रहीं, क्योंकि उन्हें लगा कि जंगली जानवर पानी पीने नीचे आते हैं और ऊंचाई पर रहना ज्यादा सुरक्षित होगा।
जंगल में अनोखा अनुभव
अकेलेपन और मुश्किल हालात के बावजूद शरण्या ने इस अनुभव को अलग नजरिए से देखा। उन्होंने बताया कि हर शाम जंगल जुगनुओं की रोशनी से जगमगा उठता था। चांदनी रात और साफ आसमान में तारे साफ दिखाई देते थे, जो उनके लिए एक सुकून भरा अनुभव था।
रात में झींगुरों और अन्य कीड़ों की आवाजें सुनाई देती थीं, लेकिन चार दिनों में उनका किसी जंगली जानवर से सामना नहीं हुआ।
उम्मीद नहीं छोड़ी
शरण्या ने बताया कि उन्होंने डर को खुद पर हावी नहीं होने दिया और हमेशा उम्मीद बनाए रखी कि मदद जरूर पहुंचेगी। वह बीच-बीच में खुले इलाकों में रुकती रहीं ताकि ड्रोन या सर्च टीम उन्हें देख सके।
बड़े स्तर पर चला सर्च ऑपरेशन
उनकी तलाश के लिए व्यापक अभियान चलाया गया, जिसमें वन विभाग, एंटी-नक्सल स्क्वॉड और स्थानीय आदिवासी समुदाय शामिल थे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के निर्देशन में थर्मल ड्रोन कैमरों की मदद से खोज तेज की गई।
कैसे हुआ रेस्क्यू?
चार दिन बाद स्थानीय लोगों ने जंगल के एक कम इस्तेमाल होने वाले इलाके में शरण्या को देखा। जब रेस्क्यू टीम वहां पहुंची, तो वह शांत और संयमित नजर आईं और खुद चलकर बाहर आईं।
घर वापसी
रविवार रात नादापुरम स्थित घर पहुंचने पर उनका भावुक स्वागत हुआ। उनकी मां, जो लगातार उनकी सलामती की दुआ कर रही थीं, बेटी को सुरक्षित देखकर भावुक हो गईं और कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि शरण्या वापस आएंगी।
फिर भी नहीं टूटा हौसला
इस पूरे अनुभव के बाद भी शरण्या का ट्रेकिंग के प्रति जुनून बरकरार है। उन्होंने कहा कि ट्रेकिंग उनका पैशन है और वह गर्मियों के बाद फिर से ट्रेक पर जाने की योजना बना रही हैं।
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