Covid-19: हवाई जहाज में सफर करना कितना सुरक्षित, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
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- विमान में संक्रमण फैलने का खतरा है बहुत कम
- एयर फिल्टर कोरोना वायरस को मारने में है सक्षम
- एयरपोर्ट पर है अधिक खतरा
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विस्तार
संक्रमण के कारण पिछले तीन महीने से भी अधिक समय से कई देशों की उड़ानें बंद थी लेकिन अब धीरे-धीरे उड़ानों को शुरू किया जा रहा है। भारत में भी राष्ट्रीय विमानों की उड़ान को हरी झंडी दे दी गई है। संक्रमण के कारण पूरी दुनिया की करीब 80 फीसदी उड़ानें बंद हो गई थीं। कई विमानन कंपनियों ने अपनी सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी थी, तो कईयों ने कार्गो सेवाओं की ओर अपना रुख किया।
हवाई यात्रा को लेकर राज्य और केंद्र सरकार की ओर से कुछ दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं। यात्रा के बाद यात्रियों को होम आइसोलेशन और क्वारंटीन किया जा रहा है, लेकिन इसी बीच इस सवाल का जवाब भी ढूंढ़ने की जरूरत है कि इस वक्त हवाई यात्रा करनी कितनी उचित और कितनी सुरक्षित है?
विमान के अंदर नहीं, बाहर है ज्यादा खतरा
करीब छह महीने बाद भी दुनिया के लिए कोरोना वायरस एक नया वायरस ही है तो ऐसे में इसके संक्रमण का सटीक डाटा किसी के पास नहीं है। यात्री विमान से कोरोना संक्रमण के फैलने को लेकर कोई ठोस डाटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन पिछले कुछ अध्ययनों में यात्रियों में श्वसन संबंधी बीमारियों के प्रसार को देखा गया है। साल 2018 में अटलांटा की एमोरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया था।
यह शोध यात्रियों और चालक दल के बीच संक्रामक रोगों के संक्रमण को लेकर किया गया था। शोध से पता चला था कि संक्रामक बीमारियां संक्रमित यात्री से सिर्फ एक मीटर के दायरे तक में ही फैल सकती हैं, लेकिन एक और शोध में दावा किया गया कि इंफ्लूएंजा जैसी बीमारी से संक्रमित यात्री कई यात्रियों को संक्रमित कर सकता है। उसके लिए एक मीटर का दायरा कोई मायने नहीं रखता है। रिपोर्ट में यह कहा गया था कि विमान में संक्रमण चढ़ते-उतरते और सतहों को छूने से तेजी से फैलता है।
केबिन क्रू से क्यों है संक्रमण का ज्यादा खतरा?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि केबिन क्रू के कारण विमान में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि वे कई यात्रियों के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में जरूरी है कि यदि किसी केबिन क्रू को थोड़ी-सी भी दिक्कत है तो उसे सेवा से वंचित रहना चाहिए। वहीं कनाडा में सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि गुआंगजो से टोरंटो की उड़ान में दो यात्रियों को कोविद-19 से संक्रमित थे लेकिन आगे किसी अन्य यात्री के संक्रमित होने का मामला सामने नहीं आया, जबकि विमान में कुल 350 लोग सवार थे और यात्रा 15 घंटे की थी।
विमान में संक्रमण फैलने का खतरा कम क्यों?
एयरबस के चीफ इंजीनियर जीन-ब्राइस ड्यूमॉन्ट का तर्क है कि आधुनिक विमान इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि अंदर दी हवा काफी साफ रहती है, क्योंकि हर दो से तीन मिनट में हवा को फिल्टर (नवीनीकृत) किया जाता है। इसका मतलब यह है कि विमान के अंदर की हवा प्रति घंटे 20 से 30 बार फिल्टर हो रही है। विमान में हवा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए HEPA (उच्च दक्षता वाले कण हवा) फिल्टर का इस्तेमाल होता है।
बता दें कि इसी फिल्टर का इस्तेमाल अस्पतालों में और एयर फिल्टर डिवाइस में किया जाता है। कोविद -19 वायरस करीब 125 नैनोमीटर व्यास (एक नैनोमीटर मीटर का एक अरबवां) है जो कि वायु कण के आकार की सीमा के भीतर है जिसे HEPA फिल्टर कैप्चर करता है। HEPA फिल्टर 10 नैनोमीटर और इससे ऊपर के कण को साफ करने में सक्षम है। ड्यूमॉन्ट का कहना है कि HEPA फिल्टर का एक स्टैंडर्ड होता है जिसका इस्तेमाल विमान में होता है। यह फिल्टर 99.97 फीसदी तक छोटे कण (कोरोना को भी) को साफ कर देता है।

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