Covid-19: क्या टेस्ट बढ़ने से भारत में तेजी से सामने आ रहे हैं कोरोना वायरस के मामले
मई का महीना आधा निकलने को है, लेकिन कोरोना वायरस का शिकंजा कसता ही चला जा रहा। लाख जतन के बावजूद यह अनजान बीमारी कम होने की बजाय लगातार बढ़ रही है। तमिलनाडु ने जैसे ही अपने सूबे में कोरोना वायरस टेस्ट बढ़ाए, वैसे ही राज्य में संक्रमितों की संख्या बढ़ती गई। अब दक्षिण भारत का यह बड़ा राज्य महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली के बाद चौथे पायदान पर पहुंच गया है।
टेस्टिंग की रफ्तार पर निर्भर करते हैं नए मामले
कोरोना पॉजिटिव मामलों की बढ़ती संख्या निश्चित ही चिंता की बात है, लेकिन इस ट्रेंड से यह भी पता लगता है कि शायद टेस्टिंग की रफ्तार बढ़ने से नए केस में भी तेजी आई है। इसे और बेहतर तरीके से समझने के लिए हम दिल्ली का उदाहरण देख सकते हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में प्रति 10 लाख आबादी पर 4,062 टेस्ट हुए हैं, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। बीते गुरुवार यानी 4 मई को एक ही दिन में 448 नए मरीज मिले। अगर पिछले चार दिन की बात करें तो राष्ट्रीय राजधानी में1600 से ज्यादा केस बढ़ चुके हैं।
एक दिन में तीन हजार से ज्यादा नए केस
देश में भी कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बीते कई दिनों में रोजाना तीन हजार से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे , क्योंकि अब हर दिन 80 हजार से ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं। यानी यह कहा जा सकता है कि टेस्टिंग बढ़ने से बीमारों के बारे में सही जानकारी मिल रही है।
बंगाल में टेस्ट कम तो मामले भी कम
बंगाल सबसे कम टेस्ट कराने वाला राज्य है, जिसकी वजह से उसे चौतरफा आलोचना भी झेलनी पड़ रही है। वहां 10 लाख की आबादी पर सिर्फ 358 टेस्ट हो रहे हैं, जो दिल्ली की तुलना में 11.3 गुना कम है। शायद यही कारण है कि बंगाल में नए मामले भी कम आ रहे हैं। ICMR पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि देश में जो नए केस सामने आ रहे हैं, अधिकतर में कोई लक्षण ही नहीं थे। पश्चिम बंगाल में कोरोना की मृत्यु दर 13.2 प्रतिशत है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है।
देश में सबसे ज्यादा टेस्टिंग वाले पांच राज्य
- दिल्ली (प्रति 10 लाख आबादी पर 4,062 टेस्ट)
- तमिलनाडु (प्रति 10 लाख आबादी पर 2806 टेस्ट)
- राजस्थान (प्रति 10 लाख आबादी पर 2122 टेस्ट)
- महाराष्ट्र (प्रति 10 लाख आबादी पर 1798 टेस्ट)
- आंध्र प्रदेश (प्रति 10 लाख आबादी पर 1766 टेस्ट)

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