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कोरोना वायरस सिर्फ फेफड़े ही नहीं, अन्य अंगों को भी बना रहा निशाना

pradeep pandey प्रदीप पाण्डेय
Updated Fri, 22 May 2020 06:54 PM IST
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सार
  • फेफड़े के अलावा अन्य अंगों को भी प्रभावित कर रहा कोरोना
  • कई सर्वे में सामने आईं नई बातें
  • पेशाब में भी वायरस की हुई है पुष्टि
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coronavirus target not only the lungs but also impact other organs like Kidney
coronavirus impact on body - फोटो : ग्राफिक्स/रोहित झा/अमर उजाला

विस्तार

पिछले छह महीने में कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में 5,127,251 लोग प्रभावित हैं और 3,30,944 लोगों की मौत हो गई है। शुरुआत में कोरोना के बुखार और खांसी जैसे तीन ही लक्षण बताए गए और उसके बाद अप्रैल में छह और नए लक्षण सामने आए। कोरोना के कुछ लक्षण ऐसे हैं जो असामान्य हैं और इनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है।



इन लक्षणों में त्वचा पर चकत्ते, दस्त, गुर्दे में दिक्कत और रक्त में थक्के बनने जैसे लक्षण शामिल हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर क्रिस्टिन एंगलंड के मुताबिक जब कोई वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो वह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है, लेकिन इन्फ्लूएंजा और सांस संबंधि वायरस के संक्रमण के मामले में आमतौर पर ऐसा नहीं होता है।

फेफड़े के साथ त्वचा को भी बना रहा निशाना

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को में त्वचाविज्ञान के प्रोफेसर और जेएएमए डर्मेटोलॉजी के प्रमुख संपादक डॉक्टर कानाडे शिंकाई कहते हैं कि वायरल संक्रमण से किसी की त्वचा पर चकत्ते दिखाई देना असामान्य नहीं है। ऐसा लगता है कि चिकन पॉक्स या दाद की समस्या है। इसका यह कारण हो सकता है कि चिकन पॉक्स की तरह यह वायरस भी सीधे त्वचा को निशाना बना रहा है। इससे पहले भी कई डॉक्टरों ने कहा है कि कोरोना से संक्रमित होने पर भी त्वचा से संबंधित कई दिक्कतें हो सकती हैं दिनमें सिर से पैर तक लाल चकत्ते, छाले, पीर की उंगलियों और एड़ी के चारों ओर लाल धब्बे दिखाई देते हैं। इससे यह साबित होता है कि कोरोना वायरस त्वचा को भी प्रभावित कर रहा है।

 

आंतों में दिक्कत

सीडर के सिनाई मेडिकल सेंटर में स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान के निदेशक और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉक्टर ब्रेनन स्पीगेल के मुताबिक कोरोना वायरस सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर की कोशिकाओं में भी चला जाता है। इससे पहले भी शोध में यह बात सामने आ चुकी है कि सभी संक्रमित लोगों में सांस लेने की दिक्कत नहीं थी। कई लोगों को दस्त और उल्टी की भी शिकायत रही है। कोविड-19 के लक्षणों के बारे में रिपोर्ट देने वाली संस्था न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन पेपर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केवल 3.8 फीसदी रोगियों को ही दस्त की शिकायत थी।

किडनी (गुर्दा)

कोरोना वायरस केवल आंत को ही निशाना नहीं बनाता है, बल्कि किडनी को भी यह निशाने पर लेता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के पेशाब में भी वायरस मौजूद है। न्यूयॉर्क के नॉर्थवेल हेल्थ में नेफ्रोलॉजी के एसोसिएट चीफ डॉक्टर केनार झावेरी ने कहा है कि कुछ अध्ययनों में मूत्र में वायरस पाया गया है, और कुछ अध्ययनों में नहीं पाया गया। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि वायरस शरीर के किसी खास अंग तक ही सीमित नहीं है। नॉर्थवेल हेल्थ सिस्टम के कोविड-19 अस्पताल में भर्ती 5,000 से अधिक लोगों के इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया जिसमें पता चला कि 36.6 फीसदी रोगियों में गुर्दे की समस्या थी, वहीं 14 फीसदी लोगों को डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी।

लीवर

कई अध्ययनों से भी यह भी पता चला है कि लीवर भी वायरस से अछूता नहीं है। एक COVID-19 अस्पताल में भर्ती आधे से अधिक लोगों को लिवर एंजाइमों का स्तर सामान्य से कम या अधिक मिला है जिससे पता चलता है कि वायरस ने लीवर पर भी अटैक किया है। मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल में हेपटोलॉजी के निदेशक और लिवर केंद्र डॉक्टर रेमंड चुंग के मुताबिक लीवर के फेल होने के पीछे कोरोना वायरस जिम्मेवार नहीं है।

खून के थक्के और दौरा

COVID-19 मामलों के ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें खून का थक्का बनना और स्ट्रोक (दौरे) शामिल हैं। इस पर पहले से ही रिसर्च चल रहा है किइन्फ्लूएंजा और बैक्टीरिया स्ट्रोक के उच्च जोखिमों के लिए जिम्मेदार हैं या नहीं। कोलंबिया विश्वविद्यालय में न्यूरोलॉजी और महामारी विज्ञान के प्रोफेसर और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष माइकल एल्किंड के मुताबिक यह संभव है कि कोरोना वायरस के कारण खून के थक्के बन जाएं और मरीज को दौरा पड़े। कई डॉक्टर्स अपने मरीजों को खून को पतला करने की दवा भी दे रहे हैं। कुछ शुरुआती अध्ययनों से पता चलता है कि COVID-19 रोगियों का इलाज रक्त पतला करके किया गया। ऐसे मरीजों को अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिल गई।

गंध और स्वाद

पहले ही कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कोरोना से संक्रमित लोगों में सूंघने और स्वाद पहचानने में दिक्कत हो रही है। कई लोगों की सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता खत्म हो गई है, हालांकि इस बात की पुष्टि के लिए अभी कुछ डॉक्टर्स शोध कर रहे हैं। 26 मार्च अमेरिकन एकेडमी ऑफ ओटोलर्यनोलोजी-हेड एंड नेक सर्जरी ने डॉक्टरों ने अपनी वेबसाइट पर मरीजों के इन लक्षणों को लेकर एक सर्वे शुरू किया है। सर्वे में गंध और स्वाद को लेकर 16 सवाल पूछे जा रहे हैं। 900 लोगों ने इन 16 सवालों के जवाब दिए हैं जिनमें से एक चौथाई लोगों ने गंध और स्वाद ना मिलने की शिकायत की है। इसे लेकर और शोध अभी किए जा रहे हैं।

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