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CRPF: 235वीं बटालियन में अमानवीय अत्याचार सहती रही 10 वर्षीय बच्ची, एफआईआर दर्ज होने में क्यों लगे तीन दिन

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 20 Jan 2026 05:28 PM IST
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सार

 'सीआरपीएफ' की 235वीं बटालियन में दस वर्षीय बच्ची से मारपीट का मामला सामने आया है। बच्ची को जख्मी हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया तब मामले का खुलासा हुआ। 

CRPF 10-year old girl suffered inhumane torture in the 235th battalion
सीआरपीएफ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की 235वीं बटालियन में दस वर्षीय बच्ची के साथ अमानवीय अत्याचार, इस मामले में जो कार्रवाई हुई है, उस पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्ची के शरीर पर लगे गंभीर चोटों के निशान खुद-ब-खुद बर्बरता की कहानी कह रहे थे। बुरी तरह से जख्मी हुई बच्ची को 14-15 जनवरी की रात को नोएडा के सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया। एफआईआर 18 जनवरी को दर्ज कराई गई। इसमें तीन दिन की देरी हुई। सूत्र बताते हैं कि इस अवधि के दौरान बर्बरता के सबूत नष्ट करने का प्रयास किया गया। क्या सीआरपीएफ की 235वीं बटालियन के सीओ ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की है। क्या इस मामले को दबाने का प्रयास  किया गया, जैसे कई दूसरे सवाल भी उठ रहे हैं।   

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एफआईआर दर्ज होने में लगा तीन दिन का समय

सीआरपीएफ के आरोपी सिपाही तारिक अनवर और उनकी पत्नी रिम्पा खातून के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। गंभीर रूप से घायल हुई बच्ची को 15 जनवरी को सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बच्ची की जांच की तो वे हैरान रह गए। बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। कई जगह पर घाव बने हुए थे। सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को उसी दिन इस मामले की सूचना दे दी थी, लेकिन एफआईआर, 18 जनवरी को दर्ज की गई है। आखिर केस दर्ज होने में तीन दिन का समय क्यों लगा। इतने समय में घटनास्थल पर मौजूद सबूत नष्ट किए जा सकते हैं। 

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इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि सिपाही जीडी तारीक अनवर और उसकी पत्नी रिम्पा खातून, ब्लॉक संख्या 60, क्वार्टर नंबर 13 सीआरपीएफ कैंप, गौतम बुद्ध में रह रहे हैं। इस सरकारी क्वार्टर में दो कमरे बताए जाते हैं। आसपास दूसरे क्वार्टर भी हैं। जब बच्ची को यातनाएं दी गई तो उसकी चीख पुकार किसी ने नहीं सुनी। यह हैरानी वाली बात है कि किसी पड़ोसी को इस घटना का पता नहीं चला। सिपाही तारीक ने अपने क्वार्टर में घरेलू कामकाज के लिए जब इस बच्ची को रखा तो उस बाबत सीआरपीएफ से अनुमति नहीं ली थी। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में क्या सीआरपीएफ की 235वीं बटालियन के सीओ ने त्वरित कार्रवाई की है, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सोशल मीडिया में जब यह मामला उछला तो इसे बल के शीर्ष नेतृत्व के संज्ञान में लाया गया। 

सीआरपीएफ का सिपाही गिरफ्तार

एफआईआर दर्ज होने के बाद सीआरपीएफ कांस्टेबल और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया। नोएडा में थाना ईकोटेक-3 पुलिस द्वारा यह कार्रवाई की गई है। सूबेदार मेजर (सीआरपीएफ ग्रेटर नोएडा) द्वारा 18 जनवरी को थाना ईकोटेक-3 में यह सूचना दी गई। शिकायत में कहा गया है कि वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति के बिना उक्त बच्ची को सिपाही तारीक ने अपने क्वार्टर पर रखा था। पीड़िता को घरेलू कामकाज व बच्चों की देखभाल के लिए लाया गया था। छोटी-छोटी बातों पर पीड़िता को बुरी तरह से प्रताड़ित किया जाने लगा। उसके साथ मारपीट की गई। धारा 110 बीएनएस के तहत एफआईआर (संख्या 0028/2026 पीएस इकोटेक III, गौतम बुद्ध नगर) दर्ज की गई है। 

सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई नाकाफी है। इस बच्ची को अवैध रूप से घरेलू कामगार के रूप में रखा गया। उसे स्कूल नहीं भेजा गया। लंबे समय तक उसके साथ क्रूरतापूर्वक मारपीट की गई। उसे इतना भूखा रखा गया कि उसका हीमोग्लोबिन बहुत नीचे तक गिर गया। बच्ची की हड्डियां टूट गईं। बच्ची के नाखूनों को उतारने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद केस में सख्त प्रावधान गायब हैं। बाल श्रम कानून कहां हैं, न्याय अधिनियम के प्रावधान कहां हैं, मानव तस्करी, क्रूरता, संस्थागत जवाबदेही कहां है। इस मामले में आरोपी सीआरपीएफ का जवान है। अभी तक बच्ची के माता-पिता का कुछ पता नहीं है। 

सूत्रों ने बताया कि इस मामले में क्या सीआरपीएफ के डीजी को तुरंत सूचना देने से गुरेज किया गया। क्या यह मामला एक चिंताजनक विरोधाभास को उजागर करता है। एमएलसी और पुलिस को सूचना दिए जाने के बावजूद बच्ची को गंभीर हालत में सर्वोदय अस्पताल से क्यों छुट्टी दे दी गई। अत्यधिक चिकित्सा साक्ष्य और वैधानिक कर्तव्य के बावजूद एफआईआर देरी से क्यों दर्ज कराई गई। संदिग्ध अपराध स्थल को संरक्षित करने के बजाय उसे खाली क्यों कराया जा रहा है। 

इस मामले में सीआरपीएफ महानिदेशालय की तरफ से कहा गया है कि कांस्टेबल (जीडी) तारिक अनवर जनवरी 2024 से नोएडा स्थित 235 बटालियन में तैनात है। वह सीआरपीएफ नोएडा अस्पताल में प्राथमिक उपचारकर्ता के रूप में कार्यरत है। नोएडा पुलिस से सर्वोदय अस्पताल में बच्ची के भर्ती होने की सूचना मिलने पर, वरिष्ठ अधिकारियों और एक टीम को मामले की जानकारी जुटाने के लिए भेजा गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए उक्त कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। प्रक्रिया के अनुसार केस की जांच शुरू कर दी गई है। अस्पताल से प्रारंभिक चिकित्सा रिपोर्ट प्राप्त होने पर, इकाई द्वारा 17.01.2026 को पुलिस स्टेशन इकोटेक में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर तारिक अनवर और उनकी पत्नी को पुलिस ने 18.06.2026 को गिरफ्तार कर लिया गया। सीआरपीएफ, इस जांच में पुलिस को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। बच्ची के उपचार में पूर्ण सहयोग देगी। डीजी की तरफ से बच्ची के पुनर्वास और भविष्य की देखभाल का भरोसा दिया गया है। 

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