Gujarat fisherman: गुजरात के मछुआरे की पाकिस्तानी जेल में मौत, तीन साल पहले ही पूरी हो चुकी थी सजा
गुजरात के एक मछुआरे की 16 जनवरी को कराची की जेल में मौत हो गई। उसे 2022 में अनजाने में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पार करने पर पकड़ा गया था। शांति कार्यकर्ता जतिन देसाई और पोरबंदर बोट एसोसिएशन ने घटना की पुष्टि की।
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गुजरात के एक मछुआरे की कराची जेल में 16 जनवरी को मौत हो गई। एक कार्यकर्ता ने बताया कि 2022 में पाकिस्तानी एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा अनजाने में पार करने के बाद पकड़ लिया था। उसने लगभग तीन साल पहले ही अपनी सजा पूरी कर ली थी।
पाकिस्तान के जेलों में बंद अन्य लोगों की रिहाई की मांग
उसकी मौत के एक महीने से भी कम समय बाद मछली पकड़ने वाले समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर पाकिस्तानी जेलों में बंद ऐसे लोगों की रिहाई में तेजी लाने का अनुरोध किया था। शांति कार्यकर्ता जतिन देसाई ने सोमवार को बताया कि 16 जनवरी को कराची की मलिर जेल में एक मछुआरे की मौत हो गई। यह कार्यकर्ता उन भारतीय मछुआरों के मुद्दे को उठा रहे हैं, जिन्हें मछली पकड़ने के दौरान अनजाने में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार करने के बाद पाकिस्तान में पकड़कर जेल में डाल दिया जाता है।
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सजा खत्म के बाद भी जेल में बंद था मछुआरा
पोरबंदर बोट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जीवन जुंगी ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि मृतक संभवत गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना का रहने वाला था। पिछले कई महीनों से बीमार था। देसाई ने बताया, “जिस मछुआरे का निधन हुआ, उसे 2022 में पकड़ा गया था और उसकी राष्ट्रीयता सत्यापित होने के बाद उसी वर्ष उसकी सजा समाप्त हो गई थी। दोनों देशों के बीच 2008 के कांसुलर एक्सेस समझौते के बावजूद, सजा पूरी होने और राष्ट्रीयता सत्यापित होने के बाद भी मछुआरे पाकिस्तान की जेलों में सड़ रहे हैं।”
समझौते की धारा 5 में यह प्रावधान है कि दोनों सरकारें राष्ट्रीयता की पुष्टि और सजा पूरी होने के एक महीने के भीतर व्यक्तियों को रिहा कर देंगी। उन्हें उनके स्वदेश वापस भेज देंगी। पिछले साल 22 दिसंबर को, दीव में मछुआरा समुदाय के सदस्यों और उनके दोस्तों ने विदेश मंत्री जयशंकर को एक पत्र सौंपकर इस मुद्दे की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकांश मछुआरे गुजरात, दीव और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं, जिनमें से 160 ने राष्ट्रीयता सत्यापन के बाद अपनी सजा पूरी कर ली है।
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समझौते के बावजूद, मछुआरे पाकिस्तानी जेलों में बंद
पत्र में कहा गया कि "दोनों देशों के बीच 2008 में हुए समझौते के बावजूद, मछुआरे पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं। सजा पूरी होने के बाद भी उनकी हिरासत ने परिवारों को वर्षों तक संपर्क से वंचित रखा है, जिससे उन्हें गहरा दुख हुआ है। इससे उनके स्वास्थ्य और कल्याण को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि कृपया इस मामले पर ध्यान दें और उनकी रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। उठाई गई मांगों में मछुआरों की रिहाई और स्वदेश वापसी, उनकी तत्काल चिकित्सा देखभाल और मानवीय वापसी, संचार और परिवार से संपर्क, कैदियों पर संयुक्त न्यायिक समिति का पुनरुद्धार, जब्त की गई मछली पकड़ने वाली नौकाओं की वापसी और संकटग्रस्त परिवारों का समर्थन शामिल है।